
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊभरती नयी चुनौतियों को देखते हुए, विश्व अर्थव्यवस्था के वृद्धि दर में कुछ गिरावट आ सकती है लेकिन प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में भारत की आर्थिक वृद्धि की दर सबसे तेज रहेगी।श्रीमती सीतारमण यहां अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की वित्त समिति की पूर्ण बैठक को संबोधित कर रही थी।उन्होंने ऊभरती चुनौतियों की पृष्ठभूमी में कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर में कुछ गिरावाट आ सकती है।
श्रीमती सीतारमण ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की ताजा अनुमान में 2022-23 में भारत की वृद्धि 8.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। जो कि दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे ऊंची वृद्धि दर है।उन्होंने कहा कि भारत ने महत्वपूर्ण बुनियादी सुधार कार्यक्रम जारी रखे हुए हैं। इनका उद्देश्य उत्पादकता और रोजगार को प्रोत्साहित करना है।गौरतलब है कि मुद्रा कोष ने इसी सप्ताह विश्व अर्थव्यवस्था के परिदृष्य के विषय में जारी अपनी ताजा वर्ल्ड आउटलुक रिपोर्ट में भारत की वृद्धि दर के अनुमान को जनवरी के अपने 9 प्रतिशत के अनुमान की तुलना में घटाकर 8.2 प्रतिशत कर दिया।
श्रीमती सीतारमण ने कोविड महामारी के बाद के दौर में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की भूमिका बढ़ाए जाने पर बल दिया।उन्होंने मुद्रा कोष में कोटा की 16वीं सामान्य समीक्षा को समय से पूरा किए जाने पर बल दिया। ताकि ऊभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के प्रतिनिधित्व में कमी की समस्या का सामाधान किया जा सके।वित्त मंत्री ने जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना करने के लिए बहुपक्षीय दृष्टिकोष के महत्व पर बल दिया औऱ कहा कि इसके लिए विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन रोधी परियोजनाओं के लिए धन और सस्ती लागत वाली प्रद्योगिकी उपलब्ध कराए जाना महत्वपूर्ण है।श्रीमती सीतारमण मुद्रा कोष-विश्व बैंक की ग्रीष्मकालीन बैठकों औऱ जी-20 समूह के देशों के वित्त मंत्रियों औऱ केंद्रीय बैंकों के प्रमुखों के सम्मेलन में भाग लेने के लिए इस समय यहां आई हुई हैं।न्यूज़ सोर्स वार्ता



