सेवा क्षेत्र की ताकत से भारत का निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर, 860 अरब डॉलर का अनुमान
भारत का कुल निर्यात चालू वित्त वर्ष 2025-26 में 860 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि सेवा क्षेत्र निर्यात की मुख्य ताकत बना हुआ है और वस्तु निर्यात में भी सकारात्मक वृद्धि जारी है। अप्रैल-जनवरी अवधि में कुल निर्यात 720.76 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष से 6.15 प्रतिशत अधिक है। इंजीनियरिंग, पेट्रोलियम, समुद्री उत्पाद और डेयरी निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे निर्यात को मजबूती मिली है।
नयी दिल्ली : सेवा क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन और वस्तु निर्यात में वृद्धि बने रहने के साथ भारत को अपना कुल निर्यात आगामी मार्च में समाप्त हो रहे चालू वित्त वर्ष में 860 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंचने की उम्मीद है।
केंद्रीय वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने विदेश व्यापार के जनवरी 2026 के आंकड़ों को जारी करते हुए सोमवार को कहा, ‘भारत के निर्यात में तेजी बरकार है। सेवा क्षेत्र निर्यात की ताकत बना हुआ है और वाणिज्यिक वस्तुओं के निर्यात की वृद्धि दर भी सकारात्मक है। निर्यात की वर्तमान गति और दिशा को देखते हुए चालू वित्त वर्ष 2025-26 में कुल निर्यात (वस्तु और सेवाएं) 860 अरब डालर के स्तर पर जा सकता है। इसमें सेवा निर्यात 410 अरब डालर का रहने की संभावना है।
“आज जारी आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष के पहले दस महीनों अप्रैल-जनवीर 2025-26 में कुल निर्यात 720.76 अरब डालर का रहा जो एक साल पहले इसी अवधि के 679.02 अरब डॉलर से 6.15 प्रतिशत अधिक है। इस दौरान वाणिज्यिक वस्तुओं का संचयी निर्यात 320.94 अरब डॉलर का रहा जो एक साल पहले इसी अवधि के 305.98 अरब डॉलर की तुलना में 4.89 प्रतिशत अधिक है।अप्रैल-जनवरी 2025-26 में कुल आयात आयात 823.41 अरब डालर था जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में 772.85 अरब डॉलर था।
इस तरह अप्रैल-जनवरी 2025-26 में व्यापार घाटा सालाना आधार पर बढ़ कर 102.65 अरब डॉलर हो गया जो एक साल पहले 93.83 अरब डॉलर था।जनवरी, 2026 में वस्तु निर्यात साल-दर-साल 0.6 प्रतिशत बढ़कर 36.56 अरब डॉलर और सेवा निर्यात 26.33 प्रतिशत की जोरदार वृद्धि के साथ 43.90 अरब डॉलर रहा।इस दौरान वस्तु आयात 19.19 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 71.24 अरब डॉलर रहा जनवरी 2025 में यह 59.77 अरब डॉलर था। जनवरी में सेवाओं का आयात 17.30 प्रतिशत बढ़कर 19.60 अरब डॉलर रहने का अुनमान है।जनवरी में वाणिज्यिक वस्तुओं के व्यापार में घाटा उछल कर 34.68 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया।
वाणिज्य सचिव ने कहा , ‘ आयात में उछाल मुख्य रूप से सोने और चांदी के आयात की लागत बढ़ने से हुई है।’जनवरी में अमेरिका को हुआ वाणिज्यिक निर्यात मासिक आधार पर 4.5 प्रतिशत कम हो कर 6.58 अरब डॉलर रहाजनवरी का महीना अमेरिका में ऊंचे 50 प्रतिशत शुल्क के प्रभाव का आखरी महीना है। अमेरिका ने सात फरवरी से भारत पर 25 प्रतिशत का दंडात्मक शुल्क हटा लिया है।जनवरी में सेवाओं सहित कुल निर्यात 80.45 अरब डॉलर और कुल आयात 90.83 अरब डॉलर दर्ज किया गया।
पिछले साल जनवरी में कुल आयात 71.90 अरब डॉलर और कुल निर्यात 76.48 अरब डॉलर पर था।जनवरी में गैर पेट्रोलियम वस्तुओं का निर्यात 32.78 अरब डॉलर और आयात 57.83 अरब डॉलर रहा।इसी माह गैर पेट्रोलियम और गैर रत्नआभूषण निर्यात 30.47 अरब डॉलर और आयात 42.56 अरब डलार था।उल्लेखनीय है कि भारत आयातित कच्चे तेल और रत्न आभूषण के एक बड़े हिस्से का निर्यात करता है।इस वर्ष जनवरी में वाणिज्यिक निर्यात को गति देने वाले प्रमुख उत्पादों में इंजीनियरिंग सामान, पेट्रोलियम उत्पाद, मीट, डेयरी और पोल्ट्री , समुद्री उत्पाद और लौह उत्पाद एवं अयस्क शामिल हैं।
गत वर्ष जनवरी की तुलना में इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्यात 10.37 प्रतिशत बढ़कर 10.40 अरब डॉलर हो गया।पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात 8.55 प्रतिशत की वृद्धि से 3.77 अरब डालर , मीट, डेयरी और पोल्ट्री निर्यात 17.92 प्रतिशत बढ़कर 0.61 अरब डॉलर , समुद्री उत्पाद का 13.29 प्रतिशत बढ़कर 0.61 अरब डालर तथा लोहा और लौह अयस्क निर्यात जनवरी में एक साल पहले की तुलना में 31.54 के उछाल के साथ 0.21 अरब डॉलर के बराबर रहा।(वार्ता)
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