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भारत-इज़राइल रणनीतिक साझेदारी मज़बूत : डॉ. एस. जयशंकर ने गाजा शांति योजना का समर्थन किया

नई दिल्ली में इज़राइल के विदेश मंत्री गिदोन सार के साथ हुई वार्ता के दौरान विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भारत-इज़राइल संबंधों को परस्पर विश्वास और रणनीतिक साझेदारी पर आधारित बताया। उन्होंने गाजा शांति योजना का समर्थन करते हुए इसे स्थायी समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत और इज़राइल दोनों आतंकवाद की साझा चुनौती का सामना कर रहे हैं और आतंकवाद के सभी रूपों के प्रति शून्य-सहिष्णुता के वैश्विक दृष्टिकोण की आवश्यकता है। बैठक में दोनों देशों के बीच सहयोग के नए क्षेत्रों पर भी चर्चा हुई।

  • विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा – भारत और इज़राइल परस्पर विश्वास पर आधारित साझेदारी निभा रहे हैं; आतंकवाद पर शून्य-सहिष्णुता की वैश्विक नीति अपनाने की आवश्यकता

नयी दिल्ली : विदेश मंत्री डा. एस जयशंकर ने इजरायल के साथ संबंधों को परस्पर विश्वास पर आधारित बताते हुए गाजा शांति योजना का समर्थन किया है और कहा है कि आतंकवाद की चुनौती का सामना कर रहे दोनों देशों को आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने के वैश्विक दृष्टिकोण को सुनिश्चित करने की दिशा में काम करना चाहिए।डा. जयशंकर ने भारत की यात्रा पर आये इजरायत के विदेश मंत्री गिदोन सार के साथ मंगलवार को यहां वार्ता से पहले अपने प्रारंभिक वक्तव्य में यह बात कही।विदेश मंत्री ने बातचीत के बाद श्री सार के साथ बैठक को सार्थक बताते हुए कहा कि उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी को मजबूत बनाने पर सार्थक चर्चा की।

डा. जयशंकर ने कहा , ” आज नई दिल्ली में इज़राइल के विदेश मंत्री गिदोन सार के साथ एक शानदार बैठक हुई। विभिन्न क्षेत्रों में हमारी रणनीतिक साझेदारी को मज़बूत करने पर सार्थक चर्चा हुई। आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के प्रति हमारी शून्य सहिष्णुता की पुष्टि की। क्षेत्र के विकास, गाजा शांति योजना और एक स्थायी समाधान के निर्माण के प्रयासों पर इज़राइली दृष्टिकोण साझा करने के लिए विदेश मंत्री सार की सराहना करता हूं। बहुपक्षीय मंचों पर हमारे सहयोग पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ। दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के बीच प्रशिक्षण पर समझौता ज्ञापन के आदान-प्रदान का भी साक्षी रहा।

“विदेश मंत्री ने इजरायली नेता का उनकी पहली भारत यात्रा पर स्वागत करते हुए कहा कि भारत और इज़राइल के बीच एक रणनीतिक साझेदारी है और दोनों कठिन समय में एक साथ खड़े रहे हैं। दोनों देशों ने परस्पर अटूट विश्वास के आधार पर एक रिश्ता बनाया है।डा. जयशंकर ने आतंकवाद को भारत और इजरायल के लिए साझा चुनौती बताते हुए कहा कि हमें आतंकवाद को कतई बर्दाश्त न करने के वैश्विक दृष्टिकोण की दिशा में मिलकर काम करना चाहिए।

उन्होंने कहा , ” हमारे दोनों देश आतंकवाद की एक विशेष चुनौती का सामना कर रहे हैं। यह आवश्यक है कि हम आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के प्रति शून्य-सहिष्णुता के वैश्विक दृष्टिकोण को सुनिश्चित करने की दिशा में काम करें।”गाजा शांति योजना का समर्थन करते हुए विदेश मंत्री ने उम्मीद जतायी कि यह समस्या के स्थायी समाधान का मार्ग प्रशस्त करेगी।उन्होंने कहा, ” हम स्वाभाविक रूप से आपके क्षेत्र में के घटनाक्रमों पर बहुत बारीकी से नज़र रख रहे हैं। हम बंधकों और दुर्भाग्य से अपनी जान गंवाने वालों के अवशेषों की वापसी का स्वागत करते हैं। भारत गाजा शांति योजना का समर्थन करता है और आशा करता है कि यह एक स्थायी और स्थायी समाधान का मार्ग प्रशस्त करेगी।

“डा. जयशंकर ने विभिन्न क्षेत्रों में भारत की क्षमताओं और उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत इन क्षेत्रों में इजरायल में कार्य करने के लिए उत्सुक है। उन्होंने कहा,” भारत ने कई नई क्षमताएं विकसित की हैं, विशेष रूप से रेल, सड़क और बंदरगाह अवसंरचना, नवीकरणीय ऊर्जा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में। हमारे व्यवसाय इज़राइल में अवसरों का पता लगाने के लिए बहुत उत्सुक हैं और हम निश्चित रूप से इस पर अधिक ध्यान देना चाहेंगे।

“उन्होंने कहा कि कृषि और नवाचार में साथ मिलकर काम करने का हमारा एक बहुत ही मज़बूत रिकॉर्ड है और इसे आगे बढाना दोनों देशों के हित में है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सेमीकंडक्टर और साइबर क्षेत्र में सहयोग का एक लंबा इतिहास रहा है। यह अब और भी प्रासंगिक हो गया है। (वार्ता)

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