पश्चिम एशिया में बढ़ता संघर्ष: ट्रंप का “बिग वेव” संकेत, भारत ने जताई गहरी चिंता
अमेरिका-ईरान संघर्ष तेज हो गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सैन्य अभियान के और तीव्र होने का संकेत दिया है, जबकि विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसे पूर्वव्यापी कार्रवाई बताया। आईएईए ने नतान्ज़ यूरेनियम संवर्धन संयंत्र के प्रवेश द्वारों पर हमले की पुष्टि की है। भारत ने क्षेत्रीय अस्थिरता और जनहानि पर गहरी चिंता जताते हुए कूटनीतिक समाधान का आह्वान किया है। खाड़ी क्षेत्र में बड़ी भारतीय आबादी और ऊर्जा हितों को देखते हुए सरकार स्थिति पर सतत निगरानी रखे हुए है।
- Donald Trump ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को “बहुत प्रभावी” बताते हुए कहा है कि सबसे तीव्र चरण अभी बाकी है।
- Marco Rubio ने इजरायल के साथ समन्वित हमलों को ईरानी खतरे को निष्क्रिय करने की रणनीति बताया।
- International Atomic Energy Agency ने पुष्टि की कि नतान्ज़ परमाणु सुविधा के प्रवेश द्वार प्रभावित हुए हैं।
वॉशिंगटन/तेहरान : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी सुरक्षा बल ईरान को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं, लेकिन सैन्य अभियान का सबसे तीव्र चरण अभी शुरू होना बाकी है।श्री ट्रंप ने सीएनएन को दिये एक साक्षात्कार में कहा कि कार्रवाई “बहुत प्रभावी” है और अमेरिका अपनी सैन्य शक्ति का उपयोग कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि शुरुआती हमलों में अमेरिका ने राजनीतिक और सैन्य हस्तियां सहित 49 ईरानी नेताओं को समाप्त कर दिया है।श्री ट्रंप ने कहा कि अगला चरण शीघ्र आने वाला है। उन्होंने इसे “बिग वेव” करार देते हुए कहा, “हमने अभी तक उन्हें पूरी ताकत से नहीं मारा है। बड़ी कार्रवाई अभी बाकी है।
“उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ईरान द्वारा बहरीन, जॉर्डन, कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात सहित अरब देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले “सबसे बड़ा आश्चर्य” रहे।श्री ट्रंप ने संघर्ष की अवधि पर कहा कि वह इसे लंबा नहीं देखना चाहते और उनका अनुमान था कि यह लगभग चार सप्ताह तक चलेगा।इस बीच, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि इजरायल के साथ समन्वय में किये गये पूर्वव्यापी हमलों का उद्देश्य ईरानी खतरे को निष्क्रिय करना और अमेरिकी बलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। उन्होंने कहा कि अमेरिका को आशंका थी कि यदि इजरायल कार्रवाई करता तो ईरान अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमला करता, इसलिए पहले प्रहार किया गया।
श्री रूबियो ने कहा कि अभियान का मुख्य ध्यान ईरान की कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता और उसकी नौसेना से उत्पन्न खतरे को समाप्त करना है।अमेरिकी सेना ने इस संघर्ष में छह अमेरिकी सैनिकों की मौत की पुष्टि की है, जबकि ईरानी रेड क्रिसेंट सोसायटी के अनुसार ईरान में 500 से अधिक लोग मारे गये हैं।अमेरिका में इस कार्रवाई पर राजनीतिक मतभेद स्पष्ट हैं। रिपब्लिकन नेताओं ने श्री ट्रंप के कदम का समर्थन किया है, जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता चक श्यूमर ने इसे “चयनित युद्ध” बताते हुए प्रशासन के बयानों को अपर्याप्त करार दिया।
पश्चिम एशिया घटनाक्रम पर भारत ने जतायी चिंता, बातचीत से जल्द समाधान पर दिया जोर
पश्चिम एशिया में स्थिति के निरंतर बिगड़ने और बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने के मद्देनजर भारत ने सभी संबद्ध पक्षों से बातचीत और कूटनीति से समस्या का जल्द समाधान निकालने का एक बार फिर आह्वान किया है। भारत ने कहा है कि निकट पड़ोसी होने के नाते क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता से उसके महत्वपूर्ण हित जुड़े हुए हैं , इस वजह से भी वहां का घटनाक्रम बड़ी चिंता का विषय है।
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता ने मंगलवार को ताजा स्थिति पर वक्तव्य जारी करते हुए कहा कि पश्चिम एशियाई देशों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों की मौजूदगी और उस क्षेत्र से भारत के आर्थिक हितों के जुड़े होने से इन हालातों को नजरंदाज नहीं किया जा सकता।वक्तव्य में कहा गया है कि हाल के दिनों में इस संघर्ष में तेजी आयी है और इसका अन्य देशों तक विस्तार हुआ है। इससे विनाश और जनहानि बढ़ी है तथा सामान्य जीवन और आर्थिक गतिविधियां ठप हो गई हैं। भारत का मानना है कि क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता में महत्वपूर्ण हित रखने वाले निकटवर्ती पड़ोसी के रूप में ये घटनाक्रम गहरी चिंता उत्पन्न करते हैं।
प्रवक्ता ने कहा कि इस पृष्ठभूमि में भारत समस्या के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति का अपना आह्वान दृढ़ता से दोहराता है। उन्होंने कहा,” हम संघर्ष की शीघ्र समाप्ति के पक्ष में स्पष्ट रूप से अपनी आवाज उठाते हैं। पहले ही अनेक बहुमूल्य जीवन दुखद रूप से नष्ट हो चुके हैं और इस संबंध में हम गहरा शोक व्यक्त करते हैं।”खाड़ी क्षेत्रों में लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिकों की मौजूदगी का उल्लेख करते हुए प्रवक्ता ने उनकी सुरक्षा और कल्याण को भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है। भारत ने साफ कहा है कि वह अपने नागरिकों के हितों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करने वाले किसी भी घटनाक्रम के प्रति उदासीन नहीं रह सकता।
भारत के व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति शृंखलाएँ भी इसी भौगोलिक क्षेत्र से होकर गुजरती हैं और किसी भी बड़े व्यवधान के भारतीय अर्थव्यवस्था पर गंभीर परिणाम होते हैं।प्रवक्ता ने कहा है कि वैश्विक कार्यबल में महत्वपूर्ण भागीदारी वाले देश के रूप में भारत व्यापारिक जहाजों पर हमलों का दृढ़ता से विरोध करता है। पिछले कुछ दिनों में ऐसे हमलों के परिणामस्वरूप कुछ भारतीय नागरिकों की मृत्यु हुई है या वे लापता हैं।वक्तव्य में कहा गया है कि प्रभावित देशों में स्थित भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास भारतीय नागरिकों और सामुदायिक संगठनों के साथ निरंतर संपर्क में हैं तथा आवश्यकता अनुसार नियमित परामर्श जारी कर रहे हैं। संघर्ष के कारण फंसे हुए लोगों को हर संभव सहायता भी प्रदान की गई है। दूतावास और वाणिज्य दूतावास इस संघर्ष से संबंधित विभिन्न वाणिज्यिक एवं कांसुलर मामलों के समाधान में सक्रिय भूमिका निभाते रहेंगे।
प्रवक्ता ने कहा कि भारत इस क्षेत्र की सरकारों तथा अन्य प्रमुख साझेदारों के साथ संपर्क में हैं। प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री ने अपने समकक्षों के साथ इस विषय पर चर्चा की है।उन्होंने कहा कि सरकार निरंतर बदल रही स्थिति पर निकट दृष्टि बनाए रखेगी और राष्ट्रीय हित में आवश्यक निर्णय लेती रहेगी।उल्लेखनीय है कि भारत ने ईरान और खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष के आरंभ होने पर 28 फरवरी को गहरी चिंता व्यक्त की थी। उस समय भी भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव बढ़ाने से बचने और नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आग्रह किया था। दुर्भाग्यवश, रमज़ान के पवित्र महीने में इस क्षेत्र की स्थिति लगातार और गंभीर रूप से बिगड़ गई है।
अमेरिका-इजरायल हमलों में नतान्ज़ यूरेनियम संवर्धन सुविधा के प्रवेश द्वारों पर हुआ हमला: आईएईए
संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था आईएईए ने मंगलवार को पुष्टि करते हुए कहा कि नतान्ज़ में ईरान के भूमिगत यूरेनियम संवर्धन स्थल के प्रवेश द्वार हाल ही में हुए अमेरिकी-इजरायली सैन्य हमलों में फिर से प्रभावित हुए। इन्हें पिछले वर्ष भी अमेरिकी बमबारी में नुकसान झेलना पड़ा था।भूमिगत ईंधन संवर्धन संयंत्र (एफईपी) ईरान में स्थित तीन यूरेनियम संवर्धन सुविधाओं में से एक है, जिनके बारे में माना जाता है कि वे उस समय चालू थे जब इजरायल और अमेरिका ने पिछले जून में ईरानी परमाणु स्थलों पर हमला शुरू किया था।
अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने एक्स पर कहा, “उपलब्ध नवीनतम उपग्रह चित्रों के आधार पर, आईएईए अब ईरान के भूमिगत नतान्ज़ ईंधन संवर्धन संयंत्र के प्रवेश भवनों को हुए हाल के कुछ नुकसान की पुष्टि कर सकता है।”इसमें आगे कहा गया, “किसी भी प्रकार के विकिरण की उम्मीद नहीं है और एफईपी पर कोई अतिरिक्त प्रभाव नहीं देखा गया है, जो जून के संघर्ष में बुरी तरह नष्ट हो गया था।”एजेंसी का आकलन विज्ञान और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा संस्थान द्वारा सोमवार को जारी निष्कर्षों से मेल खाता है। रविवार को ईरान द्वारा नतान्ज़ को निशाना बनाए जाने की सूचना देने के बाद, आईएईए ने संकेत दिया कि किसी भी सैन्य कार्रवाई की कोई खास संभावना नहीं है।
भारतीय संचालकों ने मंगलवार से पश्चिम एशिया के चुनिंदा शहरों के लिए उड़ानें शुरू की
भारतीय विमान सेवा कंपनियों ने मंगलवार से पश्चिम एशिया के चुनिंदा शहरों के लिए नियमित और विशेष उड़ानें शुरू करने की घोषणा की है।निजी विमान सेवा कंपनी स्पाइसजेट ने बताया है कि वह आज और अगले कुछ दिनों के लिए संयुक्त अरब अमीरात के फूजैराह से दिल्ली और कोच्चि के लिए एक-एक तथा मुंबई के लिए दो विशेष उड़ानों का परिचालन करेगी। इसके अलावा 04 मार्च से वह फूजैराह से दिल्ली और मुंबई के लिए अपनी नियमित उड़ानें शुरू करेगी।
नवोदित विमान सेवा कंपनी अकासा ने 03 मार्च से मुंबई और सऊदी अरब के शहर जेद्दा के बीच अपनी नियमित उड़ान शुरू करने की घोषणा की है। वह बुधवार से मुंबई और अहमदाबाद से जद्दा के लिए नियमित उड़ानों का परिचालन करेगी। हालांकि अबू धाबी, दोहा, कुवैत और रियाद को जाने वाली उसकी सभी उड़ानें 04 मार्च तक रद्द रहेंगी।इंडिगो जेद्दा से आज मुंबई, हैदराबाद और अहमदाबाद के लिए चार उड़ानों का परिचालन कर रही है। उसने बताया है कि इन उड़ानों का परिचालन उन यात्रियों के लिए किया जा रहा है जिन्होंने पहले से इंडिगो की फ्लाइट में टिकट बुक कराये हुए थे।
एयर इंडिया एक्सप्रेस ने आज से ओमान की राजधानी मस्कट से दिल्ली, कोच्चि, कोझीकोड, बेंगलुरु, मुंबई और तिरुचिरापल्ली के लिए नियमित उड़ानें शुरू करने की घोषणा की है। हालांकि बहरीन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात को जाने वाली उसकी सभी उड़ानें आज आधी रात तक रद्द रहेंगी।एयर इंडिया ने अमेरिका, कनाडा, यूरोप और ब्रिटेन को जाने वाली अपनी सभी उड़ानें आज से नियमित रूप से चलाने की घोषणा की है। उसने बताया है कि आज आधी रात तक पश्चिम एशिया को जाने वाली उसकी सभी उड़ानें रद्द है।
उल्लेखनीय है कि ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य अभियान के बाद पश्चिम एशिया में स्थिति बिगड़ गई है। ईरान भी अमेरिकी सैनिक ठिकानों वाले पश्चिम एशिया के कई देशों पर हमले कर रहा है। इस कारण कई देशों ने अपने हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया है।पश्चिम एशिया के संकट के कारण सोमवार को भारत से जाने वाली 357 उड़ानें रद्द रहीं। दिल्ली हवाई अड्डे से प्राप्त जानकारी के अनुसार आज दिल्ली से जाने वाली और दिल्ली को आने वाली 80 उड़नें इसी कारण से रद्द हैं।
इनमें से 36 उड़ानें दिल्ली से पश्चिम एशिया को जाने वाली और 44 उड़ानें वहां से दिल्ली आने वाली हैं।इस बीच सोमवार शाम से दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से भी सीमित संख्या में उड़ानों का परिचालन शुरू हुआ है जिसमें दिल्ली और मुंबई समेत पांच भारतीय शहरों की उड़ानें शामिल हैं।(वार्ता)
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