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आपूर्ति से ज्यादा मांग के कारण सब्जियों के दाम में इजाफा

दिल्ली । हाल के समय में आपूर्ति की तुलना में ज्यादा मांग के कारण कई बार सब्जियों के दामों में इजाफा हुआ है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के मुताबिक खाद्य श्रेणी में सबसे ज्यादा उतार-चढ़ाव सब्जियों के दामों में हुआ है। ग्राहकों और किसानों के लिए सब्जियों के दाम बढ़ना खराब है। यह नीति निर्माताओं को भी अल्पावधि के लिए विचलित करते हैं और उन्हें सब्जियों के दाम स्थिर करने के लिए कदम उठाने पड़ते हैं। अध्ययन में यह जानकारी मिली कि आपूर्ति से कहीं अधिक मांग सब्जियों की रही।

जनसंख्या बढ़ने व जनसांख्यिकीय संक्रमण, आय बढ़ने और खान पान का तरीका बदलने से सब्जियों की मांग में बुनियादी बदलाव आया और इनकी मांग तेजी से बढ़ी। हालांकि सब्जियों के उत्पादन के साथ साथ प्रति व्यक्ति उत्पादन भी बढ़ा है लेकिन सब्जियां बढ़ती मांग से तालमेल स्थापित नहीं कर पाईं। रिपोर्ट के अनुसार मौसम की गड़बड़ी व कीटों के हमले, भंडारण व यातायात के कारण फसल बाद होने वाले नुकसान के कारण बाजार में सब्जियों की उपलब्धता भी और कम हो जाती है।

खाद्य सूचकांक में सब्जियों की हिस्सेदारी 15.5 प्रतिशत

अध्ययन के अनुसार, ‘ सब्जियां उगाने वाले प्रतिकूल जोखिम – इनाम डायनॉमिक्स और मूल्यों में अनिश्चितता होने के कारण खासे परेशान रहते हैं।’ खाद्य सूचकांक में सब्जियों की हिस्सेदारी 15.5 प्रतिशत है। खाद्य सूचकांक में अनाज व दूध की सबसे ज्यादा हिस्सेदारी है और उसके बाद सब्जियों की हिस्सेदारी है। सब्जियों के दामों में खासा उतार-चढ़ाव होता है। हालांकि भारत में सब्जियों के दामों में उतार-चढ़ाव होना आम है।

अध्ययन के अनुसार, ‘पिछली बार वित्त वर्ष 2020 में सब्जियों के दामों में उतार – चढ़ाव अधिक (सात महीनों में दो अंकों में रहा) था। इस साल सब्जियों के दामों में सालाना आधार पर 21.3 प्रतिशत का इजाफा हुआ था। इससे खाद्य मुद्रास्फीति में 6.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। इसके बाद फिर मार्च से सितंबर 2022 के दौरान दो अंकों यानि औसतन 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।’क्रिसिल के उत्पादन के स्तर पर किए गए अध्ययन के मुताबिक चीन के बाद दूसरे नंबर पर सब्जियों का सबसे ज्यादा उत्पादन करने वाला भारत है।(वीएनएस)

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