काशी में मध्यदेशीय वैश्य समाज का भव्य वैवाहिक परिचय सम्मेलन, सैकड़ों परिवार हुए शामिल
वाराणसी में आयोजित मध्यदेशीय वैश्य वैवाहिक परिचय सम्मेलन में सैकड़ों परिवार शामिल हुए। मंच से युवक-युवतियों का परिचय कराया गया और “शहनाई” पत्रिका का लोकार्पण हुआ। राष्ट्रीय संरक्षक राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता ने सादगीपूर्ण विवाह और सामाजिक एकता पर बल देते हुए आधुनिक दिखावे से बचने की अपील की।
- “शहनाई” पत्रिका का लोकार्पण, मंच से हुआ युवक-युवतियों का परिचय, सादगीपूर्ण विवाह का दिया संदेश
वाराणसी। आध्यात्मिक नगरी काशी की पावन धरती पर बाबा गणिनाथ भक्त मण्डल द्वारा आयोजित मध्यदेशीय वैश्य वैवाहिक परिचय सम्मेलन – 2026 समाज की एकता, संस्कार और पारिवारिक मूल्यों का भव्य एवं प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया। इस गरिमामय आयोजन में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए सैकड़ों परिवारों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
सम्मेलन के दौरान विवाह योग्य युवक-युवतियों का मंच से परिचय कराया गया, जिससे उपस्थित परिवारों को आपसी संवाद, परिचय और योग्य रिश्तों पर विचार करने का सुनहरा अवसर प्राप्त हुआ। कार्यक्रम के बीच ही समाज की बहुप्रतीक्षित वैवाहिक पत्रिका “शहनाई” का भी भव्य लोकार्पण किया गया, जिसने आयोजन को और अधिक विशेष बना दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ समाज के राष्ट्रीय संरक्षक राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता एवं वरिष्ठजनों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। मंच से जैसे ही युवक-युवतियों का परिचय प्रारंभ हुआ, पूरा परिसर आत्मीयता, अपनत्व और उम्मीदों से भर उठा। परिवार आपस में मिलते-जुलते, बातचीत करते और नए रिश्तों की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार करते दिखाई दिए।
कार्यक्रम का संचालन पूर्व राष्ट्रीय युवा अध्यक्ष राजेश कुमार गुप्ता ने प्रभावी एवं संतुलित शैली में किया, वहीं अतिथियों एवं स्वजातीय बंधुओं का स्वागत जिलाध्यक्ष डॉ. आलोक कुमार गुप्ता ने आत्मीय शब्दों में किया। उन्होंने समाज की एकता और ऐसे आयोजनों की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।

इस अवसर पर अपने उद्बोधन में राष्ट्रीय संरक्षक राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता ने समाज को गहन संदेश देते हुए कहा कि सामाजिक कार्यक्रमों में सपरिवार सहभागिता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने पुराने समय को याद करते हुए कहा कि पहले बड़े-बुजुर्ग अपने पूरे परिवार के साथ ऐसे आयोजनों में आते थे और वहीं से रिश्तों की शुरुआत होती थी।
उन्होंने वर्तमान समय में विवाह समारोहों में बढ़ती फिजूलखर्ची और दिखावे पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विवाह एक पवित्र धार्मिक संस्कार है, न कि कोई प्रदर्शन या इवेंट। उन्होंने समाज से आग्रह किया कि विवाह को सादगी, मर्यादा और परंपराओं के अनुरूप सम्पन्न किया जाए।

उन्होंने प्री-वेडिंग फोटोशूट जैसी प्रवृत्तियों पर भी प्रश्न उठाते हुए कहा कि ऐसी परंपराएँ हमारे मूल संस्कारों से मेल नहीं खातीं और समाज को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
अपने संबोधन में उन्होंने आधुनिक तकनीक और मोबाइल के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि कई बार परिवार स्वयं बच्चों के मोबाइल नंबर साझा कर उन्हें सीधे संवाद के लिए प्रेरित करते हैं, जिसके नकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे तकनीक के विरोधी नहीं हैं, बल्कि उसका सदुपयोग होना चाहिए।
उन्होंने समाज के सभी परिवारों से आग्रह किया कि विवाह जैसे महत्वपूर्ण निर्णय में संस्कार, मर्यादा और पारिवारिक मूल्यों को सर्वोपरि रखें।

सम्मेलन के दौरान पूरे वातावरण में भाईचारा, अपनत्व और सामाजिक एकजुटता का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। यह आयोजन केवल परिचय का मंच नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने, संवाद बढ़ाने और रिश्तों को सशक्त बनाने का माध्यम सिद्ध हुआ।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी उपस्थित परिवारों, सहयोगियों एवं सहभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज के सहयोग से ही ऐसे आयोजन सफल होते हैं और भविष्य में भी यह प्रयास निरंतर जारी रहेगा।

“शहनाई” पत्रिका का लोकार्पण – एक नई दिशा
इस अवसर पर प्रकाशित वैवाहिक पत्रिका “शहनाई” में 800 से अधिक योग्य युवक-युवतियों के बायोडाटा संकलित किए गए हैं। यह पत्रिका समाज के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक के रूप में सामने आई है, जो रिश्तों की तलाश को सरल, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाती है।

समारोह में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे
रंजीत गुप्ता, राजेश गुप्ता, पीयूष गुप्ता, विष्णु गुप्ता (जैतपुरा), रमेश गुप्ता (मुकीमगंज), रमेश गुप्ता (कोयला बाजार), गोपाल गुप्ता (मुकीमगंज), गोपाल गुप्ता (नखासा), लोकेश साह, सुभाष गुप्ता (आयुष्मान सिल्क), हेमंत गुप्ता (आयुष्मान सिल्क), आशुतोष गुप्ता, विशाल गुप्ता, सतीश गुप्ता (जैतपुरा), निखिल गुप्ता, विनय गुप्ता, राकेश गुप्ता (एडवोकेट), कृपा शंकर गुप्ता, अभिषेक गुप्ता (सारनाथ), मनोज गुप्ता, प्रकाश रंजन , मदन गुप्ता, राजेश गुप्ता (भक्ति नगर), राजेश गुप्ता (चेतगंज), संजीत गुप्ता, नवल मद्धेशिया, शुभम मद्धेशिया, रोहित गुप्ता, अभिषेक गुप्ता (मुकीमगंज), दीपक गुप्ता (एडवोकेट), दीपक गुप्ता (मुकीमगंज), शैलेंद्र गुप्ता, डॉ. एन.के. गुप्ता, डॉ. अजय कुमार गुप्ता एवं जय प्रकाश साहू।
मातृशक्ति का विशेष सहयोग सराहनीय रहा
शीला कांदु, अंजू गुप्ता, अलका गुप्ता, रीता गुप्ता, मीरा गुप्ता, रेनू गुप्ता, संगीता गुप्ता, लक्ष्मी गुप्ता, श्यामा गुप्ता, सोनी गुप्ता, पूनम गुप्ता, अल्का गुप्ता, दीपा गुप्ता, कुसुम गुप्ता, शिल्पी गुप्ता, दीपमाला गुप्ता, मुन्नी गुप्ता, अर्चना गुप्ता, कंचन गुप्ता, शशिकला गुप्ता, बिना गुप्ता, चिंतामणि गुप्ता, लालमणि गुप्ता, गीता गुप्ता एवं अन्नपूर्णा गुप्ता सहित अनेक मातृशक्ति की गरिमामयी उपस्थिति रही।
काशी की इस पावन भूमि पर आयोजित यह सम्मेलन एक स्पष्ट संदेश देकर गया-जब समाज एकजुट होकर आगे बढ़ता है, तो रिश्ते भी मजबूत होते हैं और भविष्य भी उज्ज्वल बनता है। यह आयोजन वास्तव में समाज की भावी पीढ़ी के लिए संस्कार, सादगी और मजबूत पारिवारिक मूल्यों का जीवंत उदाहरण बन गया।
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