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ऊंची आर्थिक विकास दर से रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं: मुर्मु

नयी दिल्ली : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शनिवार को कहा कि हाल के वर्षों में आर्थिक विकास की दर लगातार ऊंची रही है, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं, किसानों और मजदूरों के हाथों में अधिक पैसा आया है तथा बड़ी संख्या में लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया है।राष्ट्रपति ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि साहसिक और दूरदर्शी आर्थिक सुधारों के बल पर आने वाले वर्षों में प्रगति की यह रफ्तार बनी रहेगी। समावेशी विकास प्रगति की आधारशिला है, जिससे विकास का लाभ व्यापक स्तर पर अधिक से अधिक देशवासियों तक पहुंचता है।

श्रीमती मुर्मु ने कहा कि सरकार ने वित्त के क्षेत्र में जिस तरह से प्रौद्योगिकी का उपयोग किया है, वह एक मिसाल है। डिजिटल भुगतान के विभिन्न विकल्पों के साथ-साथ प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण की प्रणाली ने समावेशन को बढ़ावा दिया है, जिससे बड़ी संख्या में लोगों को औपचारिक तंत्र में शामिल किया जा सका है। इसके कारण तंत्र में अभूतपूर्व पारदर्शिता भी आई है। इस प्रक्रिया में, कुछ वर्षों के दौरान ही एक ऐसा मजबूत डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित कर लिया है जो विश्व की श्रेष्ठतम संरचनाओं में से एक है।उन्होंने कहा कि इंसॉल्वेंसी एंड बैंकक्रापसी संहिता जैसे साहसिक उपायों के परिणामस्वरूप बैंकिंग व्यवस्था अब अच्छी स्थिति में आ गई है। इससे वाणिज्यिक बैंकों की गैर निष्पादित परिसंपत्तियों में काफी कमी आई है।

उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में सड़कों और रेल मार्गों, बंदरगाहों और लॉजिस्टिक हब सहित फिजिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास पर बल दिया गया है। इससे एक ऐसा मजबूत आधार विकसित हो गया है जो आने वाले दशकों में विकास को संबल प्रदान करेगा।उन्होंने कहा,“संविधान लागू होने के बाद के ये 75 वर्ष हमारे युवा गणतंत्र की सर्वांगीण प्रगति के साक्षी हैं। स्वाधीनता के समय और उसके बाद भी देश के बड़े हिस्से में घोर गरीबी और भुखमरी की स्थिति बनी हुई थी। लेकिन, हमारा आत्म-विश्वास कभी डिगा नहीं। हमने ऐसी परिस्थितियों के निर्माण का संकल्प लिया जिनमें सभी को विकास करने का अवसर मिल सके। हमारे किसान भाई-बहनों ने कड़ी मेहनत की और हमारे देश को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाया। हमारे मजदूर भाई-बहनों ने अथक परिश्रमकरके हमारे इन्फ्रास्ट्रक्चर और विनिर्माण क्षेत्र का कायाकल्प कर दिया। उनके शानदार प्रदर्शन के बल पर आज भारतीय अर्थ-व्यवस्था विश्व के आर्थिक परिदृश्य को प्रभावित कर रही है। आज का भारत, अंतर- राष्ट्रीय मंचों पर नेतृत्व की स्थिति हासिल कर रहा है।

”उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा वित्तीय समावेशन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है, इसलिए प्रधानमंत्री जन धन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, मुद्रा योजना, स्टैंड-अप इंडिया और अटल पेंशन योजना जैसी वित्तीय समर्थन योजनाओं का विस्तार किया गया है, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक विभिन्न प्रकार की वित्तीय सहायता पहुंचाई जा सके।राष्ट्रपति ने कहा कि यह भी एक बहुत महत्वपूर्ण बदलाव है कि सरकार ने जन-कल्याण को नई परिभाषा दी है, जिसके अनुसार आवास और पेयजल जैसी बुनियादी जरूरतों को अधिकार माना गया है। वंचित वर्गों के लिए, विशेष रूप से अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों तथा अन्य पिछड़े वर्गों की सहायता के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं।

अनुसूचित जातियों के युवाओं के लिए प्री- मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्तियां, राष्ट्रीय फ़ेलोशिप, विदेशी छात्रवृत्तियां, छात्रावास और कोचिंग सुविधाएं दी जा रही हैं। प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना द्वारा रोजगार और आमदनी के अवसर उत्पन्न करके अनुसूचित जातियों के लोगों की गरीबी को तेजी से कम किया जा रहा है। अनुसूचित-जनजाति-समुदायों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास के लिए विशेष योजनाएं बनाई गई हैं, जिनमें धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान और प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान -पीएम-जनमन – शामिल हैं। विमुक्त, घुमंतू और अर्ध घुमंतू समुदायों के लिए ‘विकास एवं कल्याण बोर्ड’ का गठन किया गया है। (वार्ता)

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