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झारखंड में हेमंत मंत्रिमंडल का विस्तार, 11 नये मंत्री बने

हेमंत सोरेन सरकार ने जीता विश्वास मत, 76 में से 45 मत मिले, विपक्ष ने किया बहिष्कार

रांची : झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार का विस्तार करते हुए आज 11 नए काबीना मंत्री को शामिल किया गया।राज्यपाल सी पी राधाकृष्णन ने आज राज भवन के बिरसा मंडप में आयोजित एक सादे समारोह में झारखंड मुक्ति मोर्चा के चंपाई सोरेन, दीपक बरुआ, हफीजुल हसन अंसारी, मिथिलेश कुमार ठाकुर, बेबी देवी, वैद्यनाथ राम, कांग्रेस कोटे से डॉ रामेश्वर उरांव, बन्ना गुप्ता, इरफान अंसारी ,दीपिका पांडे सिंह और राष्ट्रीय जनता दल के सत्यानंद भोक्ता को काबीना मंत्री केज्ञपद और गोपनीयता की शपथ दिलाई ।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, सांसद सरफराज अहमद, महुआ मांझी, सुखदेव भगत ,पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय, कांग्रेस के झारखंड प्रभारी गुलाम अहमद मीर समेत राज्य सरकार के वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौजूद थे।झारखंड में मुख्यमंत्री समेत 12 मंत्री बनाए जाने का संवैधानिक प्रावधान है और इस बार मुख्यमंत्री समेत 12 मंत्री बनाए गए है। पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन को भी इस बार काबीना मंत्री बनाया गया है। झारखंड के इतिहास में यह पहली घटना है जब किसी पूर्व मुख्यमंत्री को मंत्री बनाया गया है । वैसे देश के अन्य राज्यों में इस तरह की बातें हो चुकी है। (वार्ता)

हेमंत सोरेन सरकार ने जीता विश्वास मत, 76 में से 45 मत मिले, विपक्ष ने किया बहिष्कार

झारखंड में हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार ने सोमवार को विधानसभा के एकदिवसीय विशेष सत्र में हंगामे के बीच विश्वास मत हासिल कर लिया। मौजूदा विधानसभा में मौजूद 76 सदस्यों में से 45 ने सरकार के पक्ष में मतदान किया। विधानसभा के मौजूदा स्ट्रेंथ के हिसाब से बहुमत के लिए न्यूनतम 39 मतों की जरूरत थी।भाजपा और आजसू के विधायकों ने वोटिंग के दौरान सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए सदन का बहिष्कार किया। सीएम हेमंत सोरेन ने सुबह 11 बजकर 10 मिनट पर विश्वास प्रस्ताव पेश किया। इस पर वाद-विवाद के बाद अपराह्न 12 बजकर 20 मिनट पर वोटिंग कराई गई।

हेमंत सोरेन ने विश्वास मत पर बहस का जवाब देते हुए कहा कि मेरे सदन में फिर से सीएम के रूप में आने से विपक्ष के पेट में दर्द हो रहा है। ये लोग जिस तरह का आचरण सदन में कर रहे हैं, उससे उनकी हताशा सामने आई है। चुनाव के बाद इनके आधे से ज्यादा विधायक दुबारा सदन में नहीं आएंगे।प्रस्ताव पर बहस के दौरान नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बाउरी ने सीएम हेमंत सोरेन और उनकी सरकार पर तीखे हमले किए। उन्होंने कहा कि यह दो महीने की सरकार घोटालों के साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से बनी है। नेता प्रतिपक्ष ने इसे ठगबंधन सरकार करार देते हुए कहा कि इसने राज्य की जनता, युवाओं, किसानों, छात्रों, आदिवासियों, दलितों को धोखा दिया है।

अमर कुमार बाउरी ने कहा कि 2019 में हेमंत सोरेन ने सरकार बनाने के पहले युवाओं को प्रतिवर्ष पांच लाख लोगों को नौकरी देने का वादा किया था, लेकिन कुछ हजार नौकरियां भी नहीं दे पाईं।यह चौथा मौका है, जब हेमंत सोरेन बतौर सीएम झारखंड विधानसभा में विश्वास मत परीक्षण में सफल हुए हैं। सबसे पहली बार 2013 में सीएम बनने के बाद वह फ्लोर टेस्ट में सफल हुए थे। दूसरी बार वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में झामुमो-कांग्रेस-राजद गठबंधन की जीत के बाद सीएम बने थे और विधानसभा में विश्वास मत जीता था। तीसरी बार उन्होंने पत्थर खदान लीज विवाद में सरकार को राज्यपाल द्वारा बर्खास्त किए जाने की आशंका को देखते हुए 5 सितंबर, 2022 को एक दिन का विशेष सत्र बुलाकर विश्वास मत साबित किया था।

ईडी ने हेमंत सोरेन को जमीन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में इसी साल 31 जनवरी को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उन्होंने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उनके मंत्रिमंडल में शामिल रहे चंपई सोरेन ने 2 फरवरी को सीएम की कुर्सी संभाली थी। 28 जून को हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद हेमंत सोरेन जेल से बाहर आए और उसके छठे दिन ही चंपई सोरेन ने सीएम पद से इस्तीफा दिया। अगले दिन यानि 4 जुलाई को हेमंत सोरेन ने सीएम पद की शपथ ली।(वीएनएस ) ।

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