
चांदी की पालकी पर बाबा संग गौरा की निकली सवारी तो अबीर गुलाल से नहा उठी काशी
हरहर महादेव के जयघोष से गूंजा इलाका, टेढ़ी नीम से विश्वनाथ दरबार तक भक्तो का रेला
वाराणसी। बाबा विश्वनाथ मां गौरा संग आज जब काशी भ्रमण पर निकले तो धरती पर मानो स्वर्ग उतर आया। चारों तरफ हर हर महादेव, बम बम भोले के जयघोष गूंज रहे थे। देवगण आसमान से मानो नीचे उतर आए तो पशु पक्षी भी काशीवासियों संग शिव परिवार के दर्शन को आतुर हो उठे। इस अद्भुत नजारे के बीच फिजा में अबीर गुलाल संग गुलाब की पंखुड़ियों की चहुंओर पुष्प वर्षा हो रही थी। शाम को मनोहारी मौसम के बीच बाबा की पालकी यात्रा का नजारा देखने के लिए काशी विश्वनाथ मंदिर के रेड जोन में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा । काशी में रंगभरी एकादशी का पर्व पूरे उत्साह और उमंग के साथ आज मनाया गया। इसी के साथ काशी में महापर्व होली का शुभारंभ भी हो गया।
काशीपुराधिपति बाबा श्रीकाशी विश्वनाथ आज अपनी अर्धांगिनी मां गौरा का गौना कराके ससुराल से निकले तो काशी की गलियां कई कुंतल अबीर गुलाल व रंगों से सराबोर हो गयीं। इस अद्भुत घड़ी में चांदी की पालकी पर सवार देवाधिदेव महादेव और मां पार्वती ने काशीवासियों संग जमकर होली खेली तो उनके भक्त गदगद हो उठे। कॉरिडोर निर्माण के बीच आज एक अद्भुत नजारा भी दिखा। रंगभरी एकादशी के 357 वर्ष के इतिहास में इस साल यह पहला संयोग था जब महंत के आवास से निकली माता गौरा की पालकी विश्वनाथ धाम के मंदिर पहुंची तो बाबा भोले ने गौरा संग सीधे अविरल बह रही मां गंगा से भी रूबरू हुए। बाबा विश्वनाथ की नगरी में रंगभरी एकदशी के इस महा रस्म के साथ काशी में रंग और गुलाल से पूरा महौल होलियाना हो गया। मथुरा और ब्रज की होली मशहूरजरूर है लेकिन काशी की होली का अंदाज निराला है।
रंगभरी एकादशी के दिन साल में एक बार बाबा अपने परिवार के साथ निकले तो मानो देवगण भी धरती पर उतर आये। इस दौरान देवी देवताओं संग काशी वासी भी बाबा विश्वनाथ संग होली खेलते नजर आते हैं। आज दोपहर बाद शाम को तय समय पर महंत डॉ कुलपति तिवारी ने टेढ़ी नीम स्थित आवास पर बाबा विश्वनाथ की पंचबदन और माता गौरा की प्रतिमा की आरती उतारी तो पूरा माहौल शिवमय हो गया। बाद में एक चांदी की पालकी पर सवार बाबा विश्वनाथ, माता गौरा के साथ शहर भ्रमण पर निकले तो पूरा इलाका खास डमरुओं की नाद से गूँज उठा। स्पेशल गुलाब की पंखुड़ियों से तैयार 151 किलो गुलाल से बाबा विश्वनाथ ने काशीवासियों संग होली खेली।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार रंगभरी एकादशी के दिन ही भगवान शिव ,माता पार्वती से विवाह के उपरान्त पहली बार काशी नगरी आये थे। इस अवसर पर प्राचीन परम्परा नुसार भगवान शिव व उनके परिवार की प्रतिमायें काशी विश्वनाथ मंदिर में लायी जाती हैं, और बाबा श्री काशी विश्वनाथ मंगल वाद्ययंत्रो की ध्वनि के बीच काशी क्षेत्र के भ्रमण कर भक्त, श्रद्धालूओं का हाल चाल लेते व आशीर्वाद देने सपरिवार निकलते है। आज ही काशी के तमाम घाट व मंदिरों में विशेष अनुष्ठान भी हुए तो देव विग्रहों को अबीर गुलाल चढ़ाए गये। इसी क्रम में आज शीतला घाट के समीप राम घटाटे मंदिर में हर वर्ष की तरह रात्रि पर्यंत शास्त्रीय संगीत के कार्यक्रम भी चलेंगे। यहाँ बिहार मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों संग पूर्वान्चल से लोक कलाकार बिना शुल्क लिए हर वर्ष स्वरांजलि शिव को अर्पित करते हैं।



