बड़ी उपलब्धि : जल्द काशी के घरों को रौशन करेगा कचरा
जी-20 सम्मेलन के पहले वाराणसी को मिली एक नई उपलब्धि.प्लांट से लगभग 50 लोगों को परोक्ष व अपरोक्ष रूप से भी बहुत से लोगों को मिलेगा रोजगार
- डबल इंजन सरकार की कचरे से कोयला बनाने की योजना ने पास किया डबल परीक्षण
- जल्द इस प्लांट से बनने वाले कोयले से घरों को मिलने लगेगी बिजली
- काशी के घरों से निकलने वाले कूड़े का निस्तारण अब समस्या नहीं
वाराणसी । जी-20 सम्मेलन के पहले वाराणसी को एक नई उपलब्धि मिली है। लगातार 72 घंटे के परीक्षण में हरित कोयला योजना पास हो गया है। ये अपनी तरह का कचरे से कोयला बनाने वाला विश्व का पहला प्लांट होगा। 200 करोड़ के इस प्रोजेक्ट को वाराणसी हरित कोयला परियोजना के नाम से एनटीपीसी लगा रहा है। योगी सरकार ने इस परियोजना के लिए निःशुल्क ज़मीन उपलब्ध कराई है। नवंबर 2023 में शुरू होने वाला प्लांट, 200 टन प्रतिदिन कोयला उत्पादन करेगा। अत्याधुनिक प्लांट प्रदूषण व दुर्गंध फैलाए बिना कोयला बनाएगा। ये परियोजना रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध कराएगा।
प्लांट ने पास किया डबल परीक्षण
डबल इंजन की सरकार की कचरे से कोयला बनाने के प्लांट ने डबल परीक्षण पास कर लिया है। काशी के घरों से निकलने वाले कूड़े का निस्तारण अब समस्या नहीं रह गया है, बल्कि इस कचरे से अब बिजली बनाई जाएगी। नगर निगम के इलेक्ट्रिकल व मैकेनिकल विभाग के अधिशाषी अभियंता अजय कुमार राम ने बताया कि 4 फ़रबरी से 7 फरवरी तक इस प्लांट का ट्रायल रन हुआ है। परीक्षण में 200 टन कूड़े से 72 घंटे में 70 टन कोयले बनाने में सफ़लता मिली है। तकनीक के सफल परीक्षण के बाद प्लांट से निकले चारकोल को लैब में परीक्षण के लिए भेजा जा रहा है। लैब टेस्ट की रिपोर्ट आने के बाद जल्दी ही प्लांट प्रारम्भ होगा।
प्लांट से नहीं फैलेगी दुर्गंध, ना निकलेगी कोई विषैली गैस
अधिशाषी अभियंता ने बताया कि वाराणसी के रमना में 16 एकड़ में प्लांट का निर्माण हुआ है, जिसकी कीमत लगभग 200 करोड़ है। आधुनिक तरीके से बने प्लांट से कूड़ा की दुर्गन्ध नहीं आएगी व किसी भी प्रकार की विषैली गैस नहीं निकलेगी। वाराणसी म्यूनिस्पल कॉर्पोरेशन, एनटीपीसी विद्युत व्यापार निगम लिमिटेड को सॉलिड वेस्ट उपलब्ध कराएगा, जिससे कोयला बनेगा। प्रतिदिन करीब 600 टन सॉलिड वेस्ट से 200 टन कोयला का उत्पादन होगा। इस प्रोजेक्ट में कुल 3 यूनिट होगी। इसमे एक यूनिट स्टैंडबाई में रहेगा।
इस प्लांट के शुरू होने से परोक्ष रूप से लगभग 50 लोगों को रोजगार, जबकि अपरोक्ष रूप से भी बहुत से लोगों को रोजगार के साधन उपलब्ध होंगे। अक्टूबर में प्लांट के पहले परीक्षण में लगभग 6 टन कचरे से 3 टन कोयला बना था। प्लांट को डिज़ाइन करने और इसे बनाने वाली कंपनी मैकाबर बीके नोएडा के अधिकारी ने बताया कि प्लांट के दूसरे परीक्षण में 50 कर्मचारी दिन रात लगे थे। अब जल्दी ही इस प्लांट से बनने वाले कोयले से घरों में बिजली आएगी।



