Varanasi

अंधेरे से उजाले की ओर: लोहारपुरवा बस्ती में एक शिविर, जिसने 15 जिंदगियों को लौटा दी नजर

वाराणसी के लोहारपुरवा सोनकर बस्ती में रोटरी क्लब ब्लड डोनर्स वाराणसी एवं बाबा गणिनाथ भक्त मण्डल वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में निःशुल्क नेत्र जांच शिविर आयोजित हुआ। 65 मरीजों की जांच में 15 को आर. जे. शंकरा नेत्र अस्पताल में ऑपरेशन हेतु भर्ती किया गया। शिविर ने जरूरतमंदों को नई रोशनी और उम्मीद दी।

  • रोटरी क्लब ब्लड डोनर्स वाराणसी और बाबा गणिनाथ भक्त मण्डल की पहल से 15 मरीजों को मिला नई दृष्टि का भरोसा

वाराणसी। सेवा, संवेदना और समर्पण की भावना को साकार करते हुए रोटरी क्लब ब्लड डोनर्स वाराणसी तथा बाबा गणिनाथ भक्त मण्डल वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में कोटवा स्थित लोहारपुरवा सोनकर बस्ती में निःशुल्क मोतियाबिंद जांच एवं ऑपरेशन शिविर का सफल आयोजन किया गया। यह शिविर उन जरूरतमंद परिवारों के लिए आशा की किरण बनकर सामने आया, जिनके लिए आंखों का इलाज अब तक केवल एक सपना था।

शिविर का शुभारंभ क्लब अध्यक्ष रोटेरियन राजेश कुमार गुप्ता एवं अध्यक्ष डॉ. आलोक कुमार गुप्ता ने संयुक्त रूप से किया। उद्घाटन अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि “नेत्र ज्योति केवल देखने की शक्ति नहीं, बल्कि जीवन को आत्मनिर्भर और सम्मानपूर्ण बनाने का माध्यम है। समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना ही वास्तविक सेवा है।”

कार्यक्रम संयोजक विशाल गुप्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि शिविर में कुल 65 मरीजों की निःशुल्क नेत्र जांच की गई। विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम द्वारा परीक्षण के उपरांत 15 मरीजों में मोतियाबिंद की पुष्टि हुई, जिन्हें आज ही आर. जे. शंकरा नेत्र अस्पताल में ऑपरेशन हेतु भर्ती कराया गया। मरीजों और उनके परिजनों के चेहरे पर इलाज की निश्चितता से जो संतोष और विश्वास दिखाई दिया, वही इस शिविर की सबसे बड़ी उपलब्धि रही।

आयोजकों ने बताया कि शिविर में जांच से लेकर ऑपरेशन तक की समस्त प्रक्रिया को पूरी तरह निःशुल्क रखा गया, ताकि आर्थिक अभाव किसी के इलाज में बाधा न बने। शिविर स्थल पर स्वयंसेवकों ने अनुशासित एवं संवेदनशील व्यवस्था संभाली, जिससे मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

इस जनकल्याणकारी पहल में समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय सहयोग देने वालों में अभिमन्यु वर्मा, विजय सिंह, आशुतोष गुप्ता, संगीता गुप्ता, अन्नपूर्णा गुप्ता, रंजीत गुप्ता, गुलाब मिश्रा, रघु मौर्या, लक्ष्मण राजभर एवं आशीष घोष का योगदान विशेष रूप से सराहनीय रहा। इन सभी ने तन, मन और समय से सेवा कर यह संदेश दिया कि संगठित प्रयास से समाज में बड़ा परिवर्तन संभव है।

आयोजकों ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसे निःशुल्क स्वास्थ्य एवं नेत्र शिविरों का आयोजन निरंतर किया जाएगा, ताकि समाज के वंचित और जरूरतमंद वर्ग को समय पर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल सके। यह शिविर न केवल चिकित्सा सेवा का उदाहरण बना, बल्कि मानवीय करुणा और सामाजिक जिम्मेदारी की जीवंत मिसाल भी प्रस्तुत कर गया।

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