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फिर आपराधिक मामले में फंसे पूर्व बसपा सांसद धनंजय सिंह, गैर जमानती वारंट जारी

लखनऊ में मऊ के पूर्व ब्लाक प्रमुख अजीत सिंह की हत्या की साजिश रचने,शूटरों की सहायता करने तथा उन्हें पुलिस से बचाने का आरोप

जौनपुर। पूर्व बसपा सांसद धनंजय सिंह फिर एक आपराधिक मामले में फंसे हैं। उनके खिलाफ लखनऊ की सीजेएम कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी कर दिया है। धनंजय सिंह पर लखनऊ में मऊ के पूर्व ब्लाक प्रमुख अजीत सिंह की गोली मार कर हत्या करने के मामले में हत्याकांड की साजिश रचने का आरोप है। अजीत सिंह की विगत 6 जनवरी को लखनऊ के विभूतिखंड इलाके में गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। अजीत बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के करीबी थे। हत्यारों ने अजीत को 22 गोलियां मारी थीं। पुलिस की जांच में दावा किया गया था कि पूर्व सांसद ने शूटरों की मदद की थी।गैंगवार में घायल शूटर का इलाज कराने वाले सुल्तानपुर के डॉ. ए.के. सिंह ने पुलिस को बताया था कि धनंजय सिंह ने ही उन्हें फोन करके इलाज के लिए कहा था। उक्त चिकित्सक का पुलिस की पूछताछ के दौरान कहना था कि ‘उन्हें यह नहीं पता था कि घायल व्यक्ति कोई अपराधी है और उसे गोली लगी है।’ डॉक्टर से मिली जानकारियों के आधार पर पुलिस ने निष्कर्ष निकाला कि धनंजय सिंह ने न सिर्फ शूटरों को सहायता उपलब्ध कराई बल्कि उन्हें पुलिस से बचाने का काम भी किया।

फाईल फोटो

गौरतलब है कि लखनऊ में विभूतिखंड के कठौता चौराहे पर विगत 6 जनवरी की रात करीब सवा 8 बजे अपराधियों ने मऊ के मुहम्मदाबाद गोहना ब्लाक के पूर्व ज्येष्ठ प्रमुख अजीत सिंह की ताबड़तोड़ गोलियां मारकर हत्या कर दी गई थी। अजीत को दिसंबर में ही मऊ से जिला बदर किया गया था, जिसके बाद से वह यहां गोमतीनगर विस्तार के एक अपार्टमेंट में रह रहा था। वह अपने साथी मोहर सिंह और एक महिला मित्र के साथ बुलेटप्रूफ एसयूवी से खाने-पीने का सामान लेने निकला था, तभी बदमाशों ने उसे घेरकर अंधाधुंध फायरिंग की और भाग गए। अपराधियों की गोली से मोहर सिंह और एक राहगीर आदर्श भी घायल हुए थे। वारदात के दौरान अजीत सिंह ने भी अपनी पिस्टल से फायरिंग की थी, जिसमें एक शूटर के पेट पर गोली लगी थी। मोहर सिंह ने आजमगढ़ जेल में बंद विधायक सर्वेश सिंह उर्फ सीपू सिंह की हत्या के आरोपी ध्रुव सिंह उर्फ कुंटू सिंह, अखंड प्रताप सिंह और कन्हैया विश्वकर्मा उर्फ गिरधारी समेत 6 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया था। अजीत सिंह विधायक हत्याकांड का प्रत्यक्षदर्शी था, जिसकी जल्द गवाही होनी थी। ध्रुव सिंह उर्फ कुंटू व बाकी आरोपी उसे गवाही न देने के लिए धमका रहे थे।

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पुलिस ने आजमगढ़ से शूटरों के साथ लखनऊ आने वाले प्रिंस और रेहान को गिरफ्तार करके जेल भेजा था जबकि वारदात के मुख्य शूटर कन्हैया विश्वकर्मा उर्फ गिरधारी ने दिल्ली पुलिस से सेटिंग कर खुद को अवैध 9 एम एम पिस्टल के साथ गिरफ्तार करा लिया था। लेकिन अभी पिछले रविवार को ही कन्हैया विश्वकर्मा उर्फ गिरधारी पुलिस एनकाउंटर में मार दिया गया था। खास बात यह भी है कि मुख्तार अंसारी के करीबी रहे तीन गुर्गों की राजधानी में गैंगवार के दौरान हत्या हो चुकी है। इसमें सबसे पहले मुन्ना बजरंगी के साले पुष्पजीत सिंह की हत्या विकासनगर में की गई थी। इसके बाद एक दिसंबर 2018 में मुन्ना के करीबी तारिक की हत्या गोमतीनगर के ग्वारी फ्लाईओवर पर कर दी गई थी। इसके बाद विगत 6 जनवरी को अजीत सिंह की हत्या गैंगवार में हुई। पुष्पजीत और तारिक मुन्ना बजरंगी के जरिए मुख्तार अंसारी से जुड़े थे। वहीं, अजीत सीधे मुख्तार के संपर्क में था। मऊ में अजीत सिंह का गिरोह मुख्तार अंसारी के सहयोगी के रूप में दर्ज है।

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