नई दिल्ली । भारत में अपने पैर पूरी तरह पसार चुकी कोरोना महामारी की दूसरी लहर के चलते स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। अस्पतालों में मेडिकल ऑक्सीजन, दवाओं, डॉक्टरों और बेड की कमी के कारण बड़ी संख्या में कोरोना मरीजों की जान जा रही है। देशभर के श्मशान घाट और कब्रिस्तान शवों से भरे पड़े हैं। कोरोना की वजह से भारत में आए संकट को लेकर विदेशों में भी चर्चा की जा रही है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने देश के श्मशानों में जलते शवों, कब्रिस्तान में लगी कतारों, अस्पतालों के बाहर बदहवास लोगों के चेहरों को दिखाते हुए भारत की वर्तमान स्थिति को लेकर रिपोर्टिंग की थी। हालांकि, भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्ट्स को एकतरफा करार दिया है।
वर्चुअल बैठक में शामिल हुए विदेश मंत्री
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बीते गुरुवार ( 27 अप्रैल) को दुनियाभर में तैनात भारतीय राजदूतों और उच्चायुक्तों के साथ एक वर्चुअल बैठक में भाग लिया था। बैठक में उन्होंने कहा कि भारत को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में एकतरफा रिपोर्टिंग चल रही है। कोरोना संकट से निपटने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार को `अयोग्य` करार देने के अंतरराष्ट्रीय मीडिया के नैरेटिव का जरूर जवाब दिया जाना चाहिए।
दो बड़े मुद्दों पर हुई चर्चा
रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक में मौजूद अधिकारियों ने बताया कि यह मीटिंग दो बड़े मुद्दों को लेकर हुई। इसमें कोरोना से निपटने में सहायक जरूरी सामानों की खरीद को लेकर चर्चा की गई। इन सामानों को भारत कैसे भेजा जाए, इसे लेकर राजनयिकों ने चर्चा की। दूसरा सबसे बड़ा मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भारत की कोरोना संकट से जुड़ी खबरों को काउंटर करना था।
बैठक में हिस्सा लेने वाले अधिकारियों ने बताया कि एस जयशंकर के संदेश का मतलब `निगेटिव` खबरों को दबाना नहीं था बल्कि उनका जोर स्टोरी में सरकारी पक्ष को भी लेने पर था। राजदूतों और उच्चायुक्तों के अलावा इस बैठक में राज्य मंत्री वी मुरलीधरन, विदेश सचिव हर्ष श्रृंगला और कोविड-19 संकट से निपटने वाले अधिकारियों ने भी घंटे भर चली इस बैठक में हिस्सा लिया।



