Varanasi

कुटुंब ग्राम में सपनों की उड़ान: बच्चों के चेहरों पर मुस्कान, मन में भविष्य की रोशनी

वाराणसी के कुटुंब ग्राम, चिउरापुर में कुटुम्ब फाउंडेशन के सहयोग से बच्चों के लिए एक प्रेरणादायक रचनात्मक कार्यक्रम आयोजित हुआ। ‘उड़ान’ परियोजना के अंतर्गत बच्चों ने नृत्य, चित्रकला, संवाद और संगीत के माध्यम से अपने सपनों और भावनाओं को अभिव्यक्त किया। कार्यक्रम ने बच्चों में आत्मविश्वास, कल्पनाशीलता और सकारात्मक सोच को प्रोत्साहित किया। कंबल व भोजन वितरण के साथ आयोजन भावनात्मक रूप से सार्थक बन गया।

‘उड़ान’ पहल के तहत वाराणसी में रचनात्मक, संवादात्मक और भावनात्मक कार्यक्रम का आयोजन

वाराणसी : जब किसी बस्ती के आँगन में बच्चों की हँसी, सपनों के रंग और संगीत की धुनें एक साथ गूंजें, तो वह केवल कार्यक्रम नहीं रह जाता- वह भविष्य की नींव बन जाता है। ऐसा ही एक भावनात्मक और प्रेरणादायक दृश्य वाराणसी के कुटुंब ग्राम, चिउरापुर (बाबतपुर) में देखने को मिला, जहाँ सामाजिक संस्था कुटुम्ब फाउंडेशन के सहयोग से बच्चों के लिए एक विशेष रचनात्मक एवं संवादात्मक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

यह आयोजन जयपुर की छात्रा एवं सामाजिक पहलकर्ता रैना कपूर द्वारा संचालित परियोजना उड़ान के अंतर्गत संपन्न हुआ- एक ऐसी पहल, जो बच्चों को उड़ने के लिए पंख नहीं, बल्कि आत्मविश्वास देती है।

कार्यक्रम की शुरुआत बच्चों द्वारा प्रस्तुत एक समूह नृत्य से हुई। फिल्म ब्रह्मास्त्र के गीत ‘केसरिया’ पर थिरकते कदमों ने न केवल माहौल को उत्साह से भर दिया, बल्कि यह संकेत भी दिया कि इन बच्चों के भीतर प्रतिभा की कोई कमी नहीं—बस ज़रूरत है सही मंच और स्नेहिल मार्गदर्शन की।

इसके बाद बच्चों के साथ एक गहन संवादात्मक गतिविधि आयोजित की गई। उनसे एक सरल लेकिन जीवन बदल देने वाला प्रश्न पूछा गया- “आप अगले 10 वर्षों में खुद को कैसे देखते हैं?”

इस प्रश्न ने बच्चों की कल्पनाओं के द्वार खोल दिए। किसी ने डॉक्टर बनते हुए खुद को काग़ज़ पर उतारा, तो किसी ने शिक्षक, कलाकार या समाजसेवी के रूप में अपने सपनों को रंगों में ढाला। यह सत्र बच्चों के लिए केवल चित्रकारी नहीं, बल्कि अपने भीतर झांकने और अपने सपनों को पहचानने का अवसर बन गया।

कार्यक्रम के अगले चरण में रैना कपूर ने बच्चों के साथ एक आत्मीय संगीत सत्र आयोजित किया। बच्चों के साथ मिलकर गाए गए गीतों ने यह एहसास कराया कि संगीत केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि भावनाओं को जोड़ने और मन को सुकून देने का सशक्त माध्यम भी है। ताल और सुर के बीच बच्चों की झिझक टूटती चली गई और मुस्कानें और गहरी होती चली गईं।

इसके पश्चात शिवानी कपूर ने रैना कपूर के साथ मिलकर बच्चों के साथ भविष्य और आत्म-प्रेरणा पर आधारित संवादात्मक सत्र लिया। कहानी-कथन के माध्यम से बच्चों को यह समझाया गया कि परिस्थितियाँ कैसी भी हों, अगर विश्वास और मेहनत साथ हों तो हर रास्ता रोशन किया जा सकता है। यह सत्र बच्चों के दिलों में उम्मीद का दीप जलाने जैसा रहा।

कार्यक्रम के समापन पर बच्चों के चेहरे फिर खिल उठे, जब उन्हें कंबल और समोसे वितरित किए गए। कंबल वितरण खत्री हितकारिणी सभा के अध्यक्ष दीपक बहल के सौजन्य से किया गया-एक ऐसा सहयोग, जिसने सर्दी के मौसम में बच्चों को केवल ऊष्मा ही नहीं, अपनापन भी दिया।

इस अवसर पर कुटुम्ब फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. आशीष ने पहल की सराहना करते हुए कहा कि “कला, संवाद और संवेदनशीलता के माध्यम से बच्चों से जुड़ना समाज में स्थायी और सकारात्मक बदलाव लाने का सबसे प्रभावी रास्ता है। जब हम बच्चों की बात सुनते हैं, तो हम वास्तव में भविष्य की दिशा तय करते हैं।”

‘उड़ान’ परियोजना निरंतर इस विश्वास के साथ आगे बढ़ रही है कि हर बच्चा विशेष है, हर सपना मूल्यवान है। मंच, अभिव्यक्ति और आत्मविश्वास के जरिए बच्चों को सशक्त बनाने की यह पहल न केवल उनके व्यक्तित्व को निखार रही है, बल्कि समाज को भी यह याद दिला रही है कि सच्चा विकास वहीं से शुरू होता है-जहाँ बच्चों के सपनों को सम्मान मिलता है।

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