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पश्चिम बंगाल में फर्जी वोटरों पर कसा शिकंजा: चुनाव आयोग अब एआई से करेगा पहचान

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय चुनाव आयोग एआई-आधारित फेस रिकग्निशन सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रहा है। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान यह तकनीक उन फर्जी मतदाताओं की पहचान में मदद करेगी जिनके प्रमाणपत्रों में एक ही तस्वीर का बार-बार उपयोग हुआ है। अधिकारी बताते हैं कि एन्यूमरेशन फॉर्म के वितरण और डिजिटाइजेशन का कार्य 25-26 नवंबर तक पूरा हो जाएगा, जिसके बाद ड्राफ्ट रोल प्रकाशित होगा। विपक्ष ने प्रवासी मजदूरों के नामांकन में गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं, जबकि आयोग का मानना है कि एआई पारदर्शिता बढ़ाने में प्रभावी साबित होगा।

विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया में मतदाता सूची की पारदर्शिता बढ़ाने के लिए फेस रिकग्निशन तकनीक का उपयोग

कोलकाता : केंद्रीय चुनाव आयोग (ईसीआई) पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान फर्जी मतदाताओं की पहचान करने के लिए एआई (आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस) आधारित सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करेगा। एआई प्रणाली मतदाता डाटाबेस में तस्वीरों का विश्लेषण करके फर्जी मतदाताओं की पहचान करने में मदद करेगी।पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईओ) कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सॉफ्टवेयर फर्जी फोटो वाले मतदाता का पता लगाने के लिए ‘चेहरे की पहचान ‘ फीचर का इस्तेमाल करेगा।

अधिकारी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर यूनीवार्ता को बताया, “एआई-आधारित सॉफ्टवेयर फेस रिकग्निशन फीचर के जरिए फर्जी मतदाताओं की पहचान करेगा।”अधिकारियों के अनुसार बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया जिसमें एन्यूमरेशन फॉर्म (ईएफ) बांटना, इकट्ठा करना और डिजिटाइजेशन का काम 25-26 नवंबर तक पूरा होने की उम्मीद है। इसके बाद ड्राफ्ट रोल का प्रकाशन होगा। सीईओ कार्यालय के अधिकारियों ने कहा कि एआई प्रणाली उन मामलों का पता लगाने में मदद करेगी जहां एक ही फोटो का इस्तेमाल कई मतदाताओं का प्रमाणपत्र बनाने के लिए किया गया है।

विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया है कि प्रवासी मजदूरों के नामांकन के दौरान ऐसा फर्जीवाड़ा आम बात है और उनकी तस्वीरों का इस्तेमाल मरे हुए या नकली वोटरों को रजिस्टर करने के लिए किया जाता है। जबकि नेशनल पोल पैनल का मानना है कि एआई इस समस्या को रोकने में मदद कर सकता है।अधिकारियों ने बल दिया कि केवल एआई पूरी पारदर्शिता पक्का नहीं कर सकता। बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) डोर-टू-डोर चेकिंग के लिए जिम्मेदार हैं और उन्हें हर मतदाता का विवरण और तस्वीर सत्यापित करनी होगी।

उल्लेखनीय है कि 4 नवंबर को शुरू हुई एसआईआर प्रक्रिया से पता चला है कि बंगाल में लगभग दो करोड़ मतदाताओं को अभी भी 2002 की निर्वाचक नामावली से अपना लिंक जोड़ना है। केंद्रीय चुनाव आयोग इस बड़े ग्रुप के लिए सुनवाई और सत्यापन करेगा। अब तक लगभग 2.4 करोड़ मतदाताओं ने अपना विवरण 2002 की निर्वाचक नामावली से मैच कर ली हैं और अधिकारियों को उम्मीद है कि अगर 2002 के बाद की सूची में कम से कम एक माता-पिता का नाम आता है, तो और 2.5 करोड़ मतदाता ऐसा कर पाएंगे। इन मतदाताओं को आगे सत्यापन की जरूरत नहीं होगी।

गौरतलब है कि केंद्रीय चुनाव आयोग के प्रतिनिधियों का एक दल बंगाल में चल रही एसआईआर प्रक्रिया की समीक्षा करने के लिए मंगलवार को कोलकाता पहुंचा। बंगाल अगले साल अप्रैल-मई में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहा है। चुनाव की तारीखों की घोषणा फरवरी में होने की उम्मीद है।

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