
भोपाल : मध्यप्रदेश और पड़ोसी राज्य उत्तरप्रदेश के विकास के लिहाज से महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना के संदर्भ में आज मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि इस परियोजना के शीघ्र भूमिपूजन कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ यादव ने यहां अपने निवास पर पत्रकारों से चर्चा के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि लगभग 45 हजार करोड़ रुपयों की लागत वाली केंद्र सरकार की इस परियोजना के क्रियान्वयन के लिए उत्तरप्रदेश सरकार के साथ ही केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय और मध्यप्रदेश के बीच त्रिपक्षीय सहमति ज्ञापन पर तीन वर्ष से अधिक समय पहले हस्ताक्षर हो चुके हैं। यह परियोजना बुंदेलखंड अंचल के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है और इसे अगले एक दशक के अंदर पूर्ण किया जाना प्रस्तावित है।
डॉ यादव ने कहा कि इस परियोजना के संबंध में प्रयास किए जा रहे हैं कि इसका भूमिपूजन शीघ्र हो जाए, ताकि आगे का काम भी और तेज गति से हो सके। परियोजना के पहले और दूसरे चरण से मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड अंचल के दस जिलों छतरपुर, पन्ना, दमोह, टीकमगढ़, निवाड़ी, शिवपुरी, दतिया, रायसेन, सागर और विदिशा जिले के कुल 1900 गांवों में आठ लाख हेक्टेयर क्षेत्र में वार्षिक सिंचाई सुविधा प्राप्त हो सकेगी। इसके साथ ही 41 लाख की आबादी को पेयजल की सुविधा मिलेगी।उन्होंने कहा कि इसके साथ ही पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी परियोजना के संदर्भ में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और तत्कालीन केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव से भी चर्चा हुयी है। इस योजना को लेकर समझौता ज्ञापन प्रस्ताव पर दस्तखत हो गए हैं और अब अगले चरण में संबंधित राज्यों तथा केंद्र सरकार के बीच चर्चा होना है।
इस योजना के क्रियान्वयन के लिए 35 हजार करोड़ रुपए की राशि राजस्थान को और इतनी ही राशि मध्यप्रदेश को केंद्र सरकार से मिलेगी।मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास की भी नयी संभावनाएं हैं। इस दिशा में हम निरंतर काम कर रहे हैं। भारतीय गैस प्राधिकरण (गेल) द्वारा मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के आष्टा में देश की सबसे बड़ी “एथेन क्रैकर परियोजना” को स्वीकृति प्रदान की गयी है, जिसकी लागत लगभग 60 हजार करोड़ रुपए है। इस परियोजना से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलने के साथ ही राज्य का औद्योगिक विकास होगा। इसके लिए राज्य सरकार परियोजना की मांग के अनुरूप 900 हेक्टेयर सरकार अविकसित भूमि देने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। परियोजना में 70 प्रतिशत की टाउनशिप भी प्रस्तावित है। इस परियोजना का भूमिपूजन आगामी फरवरी माह तक और वाणिज्यिक उत्पादन वित्त वर्ष 2030-31 तक प्रारंभ होने की संभावना है। (वार्ता)



