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मास्क का उपयोग कर सांस संबंधी कई बीमारियों से भी बच सकते हैं -डॉ. रणदीप गुलेरिया

डीएसटी स्वर्ण जयंती चर्चा श्रृंखला के एक हिस्से के रूप में गणमान्य व्यक्तियों ने ‘ महामारी के दूसरे पक्ष‘ पर विचार-विमर्श किया , 21 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने नए मामलों की तुलना में ज्यादा रिकवरी रिपोर्ट की .

डीएसटी के 50 वर्ष पूरे होने पर डीएसटी स्वर्ण जयंती चर्चा श्रृंखला के एक हिस्से के रूप में आयोजित ‘ महामारी के दूसरे पक्ष‘ पर एक ऑनलाइन पैनल चर्चा में गणमान्य व्यक्तियों ने कोविड -19 महामारी द्वारा सामने लाई गई चुनौतियों एवं अवसरों पर विचार-विमर्श किया। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के सचिव प्रोफेसर आशुतोष शर्मा ने बताया कि -इस विषय वस्तु के दो अलग अलग पक्ष हैं। एक यह है कि इस महामारी से हमें जो बड़े सबक सीखने को मिले हैं और उन्हें कैसे विज्ञान, प्रौद्योगिकीऔर नवोन्मेषण के अभ्यास में अनूदित करना है और दूसरा है चुनौतियां एवं नए अवसर। महामारी का दूसरा पक्ष उन अवसरों की ओर संदर्भित कर सकता है जिनका हम साथ मिल कर अन्वेषण करने की इच्छा रखते हैं और हमें इन अवसरों का लाभ उठाते रहना है। ऑनलाइन पैनल चर्चा का आयोजन हाल ही में संयुक्त रूप से भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद और विज्ञान प्रसार द्वारा किया गया था।

श्री शर्मा ने कहा कि ‘ पिछले चार महीनों में कोविड-19 महामारी से मिले प्रमुख सबकों में एक यह रहा है कि जहां महामारी के आरंभिक दिनों में एन-95 मास्क से लेकर पीपीई, वेंटिलेटर तथा अन्य संबंधित वस्तुओं का आयात किया गया, तीन महीनों के भीतर हम अपना खुद का विश्व स्तरीय वेंटिलेटर का निर्माण करने में सक्षम हो गए। इसके पीछे वजह एक स्पष्ट प्रायेाजन एवं विजन रही है। शिक्षा जगत से लेकर उद्योग तक हितधारकों की एक बड़ी श्रृंखला के हिस्से पर स्वामित्व और सरकार से सहायता तथा लचीलेपन ने इसे संभव बनाया, अन्यथा इसे हासिल करने में वर्षों लग सकते थे। ‘

प्रोफेसर आशुतोष शर्मा ने उल्लेख किया कि मुख्य रूप से पिछले पांच वर्षों के दौरान नवोन्मेषण परितंत्र के प्रत्येक पहलू पर ध्यान देने के द्वारा डीएसटी, जो अपना 50वां संस्थापना वर्ष मना रहा है, ने पिछले 50 वर्षों की तुलना में अधिक अवसरों, अधिक इनक्यूबेटरों तथा अधिक स्टार्ट अप्स का सृजन किया है। प्रो. शर्मा ने यह भी उल्लेख किया कि डीएसटी सरकार का ऐसा एकमात्र संगठन है जिसने संकीर्ण तरीके से किसी एक सेक्टर या लैब के समूहों पर फोकस नहीं किया है और उसके पास किसानों, छोटे शहरों में रहने वाली महिलाओं से लेकर शीर्ष वैज्ञानिकों, स्कूली छात्रों से लेकर पीएचडी छात्रों तक एक बहुत व्यापक हितधारक आधार है तथा यह एटम से लेकर एस्ट्रोफिजिक्स तक तथा उनके बीच सभी कुछ के प्रत्येक संभावित क्षेत्र को कवर करता है। ‘

वित मंत्रालय में प्रधान आर्थिक सलाहकार  संजीव सान्याल ने कहा कि कोविड के बाद की दुनिया में पुनर्निर्माण की बात करते समय, हमें दिमाग में रखना होगा कि हम कोविड-पूर्व दुनिया में नहीं लौट रहे हैं। उन्होंने बताया कि ‘ कोविड के झटके के परिणामस्वरूप कई चीजें बदल जाएंगी। भू राजनीति, आपूर्ति श्रृंखला, प्रौद्योगिकी और उपभोक्ता व्यवहारमें बदलाव आएंगे तथा हमें नए तरीकों, नई नीतियों के बारे में सोचना होगा, अपने वैज्ञानिकों को उनकी प्रौद्योगिकियों को बाजार में ले जाने के लिए प्रोत्साहित करना होगा, हमारे प्रौद्योगिकविदों को अतिरिक्त उत्पादों का नेतृत्व करने के लिए जोखिम लेने वाला बनाना होगा। ‘

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को अधिक लचीला बनाने तथा यह सुनिश्चित करने कि कोविड महामारी से एक सबक के रूप में आने वाले वर्षों में किसी भी रोग के बड़े प्रकोप और महामारी की चुनौती का सामना कर सकते हैं, की वकालत की। उन्होंने बचाव संबंधी स्वास्थ्य देखभाल पर फोकस करने पर बल दिया और कहा कि मास्क का उपयोग करने एवं हाथ की सफाई रखने के द्वारा हम न केवल कोविड को कम कर सकते हैं बल्कि सांस संबंधी कई बीमारियों से भी बच सकते हैं।

नास्कॉम की अध्यक्ष सुश्री देबजानी घोष ने उल्लेख किया कि आईटी उद्योग के लिए 100 वर्षों में आने वाला एक अवसर है कि वह एक बार अपने आपको पूरी तरह परिवर्तित कर ले। उन्होंने कहा कि कोविड के बाद यह एक हाइपर-डिजिटल और संपर्क रहित विश्व होने वाला है और ऐसी दुनिया में चार मूलभूत अंग होंगे जो किसी उद्योग की सफलता को परिभाषित करेंगे। ये होंगे भरोसा, प्रतिभा, नवोन्मेषण और दक्षता और इन सबके लिए हमें नवोन्मेषण पर फोकस करने की आवश्यकता है क्योंकि नवोन्मेषण भारत के भविष्य को परिभाषित करेगा। ‘

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