Varanasi

नदियों की अविरलता और निर्मलता के भाव का समावेश जन-जन में होना आवश्यक : दिवाकर द्विवेदी

विश्व नदी दिवस पर गंगा समग्र काशी जिला के कार्यकर्ताओं ने रामेश्वर में मां वरुणा के घाट की सफाई, पूजन और आरती कर नदी संरक्षण का संदेश दिया। सह प्रांत संयोजक दिवाकर द्विवेदी ने कहा कि नदियों की अविरलता और निर्मलता तभी संभव है जब समाज इसके प्रति संवेदनशील बने।

  • विश्व नदी दिवस पर गंगा समग्र काशी जिला ने किया मां वरुणा घाट की सफाई, पूजन और आरती
  • दिवाकर द्विवेदी ने कहा – जल स्रोतों की सुरक्षा तभी संभव जब समाज नदियों को अपने जीवन का हिस्सा माने
  • सामाजिक चेतना से ही नदियों की अविरलता और निर्मलता को पुनः प्राप्त किया जा सकता है

वाराणसी । अनियोजित नगरीय विकास, औद्योगिकरण और विकृत आस्था का सर्वाधिक दुष्प्रभाव नदियों की निर्मलता और अविरलता पर पड़ा है। इसलिए जब तक नदियों और जल स्रोतों की पवित्रता का भाव जन-जन में स्थाई रूप से नहीं समाविष्ट होगा, तब तक जल संकट से मुक्ति संभव नहीं है। यह विचार विश्व नदी दिवस के अवसर पर मां वरुणा के तट पर आयोजित कार्यक्रम में गंगा समग्र के सह प्रांत संयोजक दिवाकर द्विवेदी ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि “विश्व की संपूर्ण सभ्यता नदियों के किनारे विकसित हुई है। आज नदियों के प्रदूषण ने मानव जीवन को संकट में डाल दिया है। पेयजल की कमी और जलजनित बीमारियाँ अब वैश्विक समस्या बन चुकी हैं।”

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गंगा भाग संयोजक चंद्र प्रकाश ने कहा कि गंगा समग्र द्वारा 15 आयामों के माध्यम से नदियों की अविरलता और निर्मलता के लिए व्यापक सामाजिक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक कार्यकर्ता को अपने दैनिक जीवन के साथ इस कार्य को जोड़ना होगा। कार्यक्रम के दौरान कार्यकर्ताओं ने मां वरुणा घाट की सफाई, पूजन और आरती कर नदी संरक्षण का संकल्प लिया। पूजन कार्य पंडित चंदन पांडेय ने विधि-विधान से कराया।

इस अवसर पर गंगा समग्र के जिला संयोजक धर्मेंद्र पांडेय, प्रांत कोषाध्यक्ष रणदीप सिंह, राज नारायण पटेल, अमरीश उपाध्याय, भगत राम यादव, जयप्रकाश दुबे, अशोक सिंह, आशीष राजभर, वंशराज यादव, विनोद मिश्रा, सत्येंद्र उपाध्याय, अनीश सिंह, धनंजय त्रिपाठी, आदित्य पांडेय, गिरिजेश चौबे, जय हिंद पाल, राम आसरे सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

जानिए : विश्व नदी दिवस क्यों मनाया जाता है

विश्व नदी दिवस (World River Day) हर साल सितंबर के चौथे रविवार को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों में नदियों के संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और उनकी अविरलता–निर्मलता को बनाए रखने के प्रति जागरूकता फैलाना है। इस दिवस की शुरुआत 2005 में कनाडा के पर्यावरणविद् मार्क एंजेलो (Mark Angelo) के प्रयासों से हुई थी। उन्होंने विश्व भर की सरकारों और संस्थाओं से आह्वान किया कि नदियाँ केवल जल का स्रोत नहीं बल्कि सभ्यता, संस्कृति और जीवन की आधारशिला हैं।

भारत में यह दिवस गंगा, यमुना, नर्मदा, गोदावरी, ब्रह्मपुत्र, सरस्वती, वरुणा जैसी नदियों के संरक्षण से जुड़ी चेतना को जगाने का अवसर माना जाता है। नदियाँ केवल जलधारा नहीं हैं — वे कृषि, पेयजल, ऊर्जा, जैवविविधता और धार्मिक आस्था से गहराई से जुड़ी हैं। लेकिन बढ़ते प्रदूषण, प्लास्टिक कचरा, अवैज्ञानिक निर्माण और औद्योगिक अपशिष्ट इनके अस्तित्व पर गंभीर संकट बन चुके हैं।

विश्व नदी दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि – “यदि नदियाँ बचेंगी, तभी जीवन बचेगा।

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