
जौनपुर। हिंदू धर्म में सबसे पुण्यदायी और शुभ माने जानी वाली कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी बुधवार को पूर्ण श्रद्धा भाव से मनाई गई। सुबह स्नान-ध्यान और घरों एवं मंदिरों में पूजन के आयोजन हुए। ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नहाने के बाद शंख और घंटानाद सहित मंत्र बोलते हुए भगवान विष्णु को जगा कर उनकी पूजा की गई। तमाम लोगों ने एकादशी का व्रत भी रखा। मान्यता है कि धर्म-कर्म में प्रवृति कराने वाले भगवान श्री विष्णु कार्तिक शुक्ल एकादशी को योग निद्रा से जागते हैं। इसी कारण शास्त्रों में इस एकादशी का फल अमोघ पुण्यफलदाई बताया गया है। भगवान के जागने से सृष्टि में तमाम सकारात्मक शक्तियों का संचार होने लगता है। 
देवोत्थान एकादशी के अगले दिन 26 नवंबर से चातुर्मास खत्म हो जाएगा। इससे सभी शुभ काम शुरू होंगे। इस साल अश्विन का अधिक मास आने के कारण चातुर्मास पांच महीने का था। इस एकादशी से मौसम सुहाना हो जाता है। वातावरण हर तरह से प्रकृति और इंसानों के लिए अनुकूल हो जाता है। चातुर्मास खत्म होने के बाद मौसम में नमी कम हो जाती है और सूर्य की भरपूर रोशनी धरती पर आती है। ये मौसम हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस के लिए प्रतिकूल होता है। इसलिए इस समय हरी सब्जियां भी इनके संक्रमण से मुक्त हो जाती हैं। सूर्य की रोशनी और अनुकूल वातावरण से पाचन शक्ति भी बेहतर हो जाती है।
यही वजह है कि चातुर्मास के बाद हरी सब्जियों को खाने में शामिल कर लिया जाता है। देवोत्थान एकादशी पर भगवान श्री विष्णु के जागने के बाद शादी- विवाह जैसे सभी मांगलिक कार्य आरम्भ हो जाते हैं। ज्योतिषाचार्य पंडित शिव प्रसाद द्विवेदी के अनुसार इस बार एकादशी पर सिद्धि, महालक्ष्मी और रवियोग इन 3 शुभ योगों से देव प्रबोधिनी एकादशी पर की जानी वाली पूजा का अक्षय फल मिलेगा। कई सालों बाद एकादशी पर ऐसा संयोग बना है। एकादशी तिथि बुधवार को सूर्योदय से शुरू होकर अगले दिन सूर्योदय तक रहेगी। इसी दिन किसान गन्ने की फसल की कटाई शुरू कर देते हैं। कटाई से पहले गन्ने की विधिवत पूजा की जाती है और इसे विष्णु भगवान को चढ़ाया जाता है। बाजारों में गन्ना, सिंघाड़ा, कंद मूल आदि मौसमी फलों की दुकानों पर लोग दिन भर खरीदारी करते रहे।



