
कोलकाता । जलपाईगुड़ी जिले के माल बाजार में माल नदी में बुधवार की रात विसर्जन दौरान अचानक जलस्तर बढ़ने की घटना में मरने वालों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है। हादसे में गंभीर 11 लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। सभी मृतकों की शिनाख्त भी हो गई है।गुरुवार सुबह मरने वालों के नाम की भी घोषणा प्रशासन ने कर दी है। जिन लोगों की मौत हो चुकी है उनकी पहचान तपन अधिकारी (72), उर्मी साहा (13), झूमूर साहा (42), आठ साल के अंश पंडित, विभा देवी (28), शुभाशीष राहा (53), शोभननदीप अधिकारी (20) और सुष्मिता पोद्दार (22) के तौर पर हुई है।
जिलाधिकारी मौमिता गोदारा बसु ने बताया कि पहाड़ से अचानक पानी आ जाने से नदी का जलस्तर बढ़ गया, जिससे यह दुर्घटना हुई है। बुधवार रात तक सात लोगों के शव बरामद हुए थे। इसके बाद एक और व्यक्ति का शव देर रात नदी से निकाला गया है। इसके अलावा 11 लोग अभी भी गंभीर हालत में माल बाजार सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती हैं।
नदी के बीच बने अस्थाई जेटी और टापू पर फंसे लोगों को धीरे-धीरे निकाला गया है लेकिन अभी भी दो दर्जन से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। देर रात राहत और बचाव कार्य के लिए प्रशासन ने तीन क्रेन नदी में उतारी थीं, जिस पर चढ़कर लोगों को बाहर निकाला गया, लेकिन रात एक बजे के करीब भारी बारिश शुरू हो गई, जिसकी वजह से जलस्तर और बढ़ गया है। गुरुवार को भी सुबह भारी बारिश हो रही है, जिसके कारण बचाव कार्य रोक दिया गया है।
स्थानीय लोगों ने बताया है कि प्रतिमा विसर्जन के लिए 10 से अधिक ट्रकों में सवार होकर बड़ी संख्या में नदी तक पहुंचे थे। यह लाेग प्रतिमा विसर्जन के लिए नदी में थे, तभी अचानक जलस्तर बढ़ने की वजह से कई लोग नदी के पानी में डूब गए हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की मदद की घोषणा की है।
जलपाईगुड़ी हादसा के बाद सड़क पर खड़ीं प्रतिमाएं कर रहीं विसर्जन का इंतजार
जलपाईगुड़ी के माल नदी में हादसे के बाद बुधवार रात को एहतियातन प्रतिमाओं के विसर्जन को रोक दिया गया था। मालबाजार की सड़कों पर मां दुर्गा की प्रतिमाएं विसर्जन के इंतजार में खड़ीं मिलीं। बाजार के अधिकांश दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद रखी हैं। इलाके में मातम भरा सन्नाटा पसरा है।
गुरुवार सुबह की दुर्गा प्रतिमाएं कतार में खड़ी नजर आ रही हैं। यह प्रतिमाएं हादसे की वजह से विसर्जित नहीं की जा सकी थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार वहां 70 मूर्तियों को विसर्जन के लिए लाया गया था। दुर्घटना होने तक उनमें से 25-30 मूर्तियों ही विसर्जित हो सकी थीं। हादसे के बाद लोग बाकी बची प्रतिमाओं को सड़कों पर छोड़ कर चले गये। एक स्थानीय निवासी ने हादसे को अविश्वसनीय करार देते हुए कहा कि मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि आपदा प्रबंधन टीम की मौजूदगी के बावजूद कैसे इतनी बड़ी घटना घट गई। पूरा मालबाजार इस बात को नहीं समझ नहीं पा रहा है।
दरअसल, बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव के कारण पिछले 2-3 दिन से दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार जिलों में भारी बारिश का पूर्वानुमान था। निम्न दबाव के प्रभाव में समुद्र से दक्षिण की हवा सीधे पहाड़ों पर पहुंच रही थीं, जिससे बरसात के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन रही थीं। जलपाईगुड़ी, कालिमपांग में दशमी के दिनी भी भारी बारिश की चेतावनी दी गई थी। ऐसे में सवाल यह है कि प्रशासन ने पूर्वानुमानों को दरकिनार कर इतने लोगों की भीड़ को नदी तक पहुंचने की अनुमति कैसे दी गई।उल्लेखनीय है कि मालबाजार में बुधवार शाम को प्रतिमा विसर्जन के दौरान माल नदी में अचानक पानी बढ़ जाने से अब तक आठ लोगों की मौत हो गई है। तकरीबन 50 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों का दावा, आपदा से निबटने के लिए उपलब्ध नहीं थे पर्याप्त साधन
दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान जलपाईगुड़ी जिले के मालबाजार में हुए हादसे के बाद प्रशासन के सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल उठने शुरू हो गये हैं। मौके पर बचाव कार्य में शामिल सिविल डिफेंस के एक कर्मचारी ने गुरुवार सुबह बताया कि वहां पुलिस तो थी लेकिन आपदा से निपटने के लिए पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं थे, अन्यथा इस तरह लोगों की जान नहीं जाती।
उन्होंने बताया कि जब मूर्तियों का विसर्जन किया जा रहा था तब एक तरफ भीड़ बढ़ती जा रही थी और दूसरी तरफ नदी में पानी। तभी हमने सभी लोगों को सतर्क किया था। इसके कुछ ही देर बाद अचानक पानी बढ़ गया। लेकिन हमारे पास रस्सी के अलावा कुछ नहीं था। नाव भी नहीं थी। इसलिए इतनी बड़ी दुर्घटना हो गई।
नाम नहीं छापने की शर्त पर उक्त सुरक्षाकर्मी ने दावा किया कि विसर्जन के लिये घाट के प्रभारी बनाये गये एनडीआरएफ अधिकारी पल्लब विकास मजूमदार अपनी ड्यूटी छोड़ कर रिश्तेदार के घर चले गए थे। पल्लब विकास मजूमदार से जब इस बारे में पूछा गया तो उनका कहना था, मैं विसर्जन के शुरुआत से ही निगरानी कर रहा था। इस बीच एक बार अपने रिश्तेदार के घर गया था क्योंकि उनकी तबीयत बहुत खराब थी।” मजूमदार ने भी हादसे में हुई जानमाल की हानि के लिए बचाव के पर्याप्त साधनों की कमी को ही जिम्मेदार ठहराया।
दरअसल, बुधवार रात दशमी को प्रतिमा विसर्जन के दौरान माल नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने और तेज बहाव के कारण कई लोग बह गए थे। इस घटना में अब तक आठ लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 11 लोग अस्पताल में उपचाराधीन हैं।इस बीच, भारी बारिश के कारण गुरुवार सुबह से बचाव कार्य शुरू नहीं हो सका है। ऐसे में मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।(हि.स.)



