Varanasi

स्वच्छता की सारथी बनीं काशी की बेटियां, 82 महिलाएं सम्मानित

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर वाराणसी नगर निगम ने स्वच्छ भारत मिशन (नगरीय) के तहत “नारी लीड्स स्वच्छता” अभियान में उत्कृष्ट कार्य करने वाली 82 महिलाओं को सम्मानित किया। इन महिलाओं ने होम कंपोस्टिंग के जरिए गीले कचरे से खाद बनाकर स्वच्छता अभियान को मजबूत किया और अन्य लोगों को भी पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित किया।

  • नारी लीड्स स्वच्छता अभियान के तहत होम कंपोस्टिंग और कचरा प्रबंधन में उत्कृष्ट योगदान पर मिला सम्मान

वाराणसी। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में स्वच्छ भारत मिशन (नगरीय) के अंतर्गत नगर निगम सभागार में शुक्रवार को विशेष सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। “नारी लीड्स स्वच्छता” (8 से 14 मार्च) अभियान के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में स्वच्छता और होम कंपोस्टिंग के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाली 82 महिलाओं को सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर नगर निगम की ओर से महिला सफाई निरीक्षकों, महिला सफाई कर्मचारियों तथा बड़ी संख्या में गृहणियों को सम्मानित किया गया। इन महिलाओं ने अपने घरों और कार्यस्थलों पर गीले कचरे से खाद बनाने की होम कंपोस्टिंग तकनीक को अपनाकर न केवल स्वच्छता अभियान को मजबूत किया, बल्कि आसपास के लोगों को भी इसके लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम में अपर नगर आयुक्त सविता यादव ने सम्मानित महिलाओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि स्वच्छता अभियान को सफल बनाने में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जब एक महिला जागरूक होती है तो उसका प्रभाव पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है। इसी कारण महिलाओं की सक्रिय भागीदारी स्वच्छ शहर के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाती है।

उन्होंने बताया कि शहर में कचरे की समस्या को कम करने और डंपिंग यार्ड पर पड़ने वाले दबाव को घटाने के लिए जीरो वेस्ट मॉडल को अपनाना समय की आवश्यकता है। इस दिशा में होम कंपोस्टिंग एक प्रभावी और व्यवहारिक उपाय साबित हो रही है। यदि घरों में ही गीले कचरे से खाद तैयार की जाए, तो बड़ी मात्रा में कचरा डंपिंग साइट तक पहुंचने से रोका जा सकता है।

कार्यक्रम के दौरान महिलाओं को होम कंपोस्टिंग के सरल और व्यावहारिक तरीके भी बताए गए। अपर नगर आयुक्त ने कहा कि इसके लिए घर में उपलब्ध पुराने गमले, बाल्टी या ड्रम का उपयोग किया जा सकता है। सबसे पहले पात्र में हवा के लिए छोटे-छोटे छेद किए जाते हैं। इसके बाद नीचे सूखी पत्तियां या टहनियां (ब्राउन्स) रखी जाती हैं और ऊपर रसोई से निकलने वाला गीला कचरा (ग्रीन्स) डाला जाता है। कचरे को हल्का नम रखते हुए सप्ताह में एक बार पलटने से करीब दो से तीन महीनों में उत्तम जैविक खाद तैयार हो जाती है, जिसका उपयोग पौधों और बागवानी में किया जा सकता है।

नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि होम कंपोस्टिंग से न केवल कचरे का सही प्रबंधन होता है, बल्कि इससे पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ शहर के लक्ष्य को भी मजबूती मिलती है। इस पहल के माध्यम से लोगों को अपने घरों में ही कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए प्रेरित किया जा रहा है। कार्यक्रम का संचालन सरिता तिवारी ने किया, जबकि डॉक्यूमेंट मैनेजर प्रीति सिंह ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। समारोह में बड़ी संख्या में महिलाएं और नगर निगम के अधिकारी उपस्थित रहे।

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