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कोरोना ने ले ली रोटी बैंक के संस्थापक किशोर की जान,गरीबों को रोटी कौन देगा ?

वाराणसी। कोरोना का विकट भयावह रूप अब पुण्य कार्य करने वालों को भी नहीं छोड़ रहा। मूल रूप से सासाराम बिहार के रहने वाले किशोर कांत तिवारी रामनगर में रोटी बैंक का किचन बनाकर गरीब, असहाय और मजदूरों को खाना खिलाने का कार्य रोज करते थे। किशोर कांत अपने माता पिता को साथ में लेकर मित्र रोशन पटेल के साथ सामनेघाट में किराए के मकान में रहते थे। रोटी बैंक चलाने के लिए बीएचयू के प्रोफेसर और वर्तमान में झारखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर पीके मिश्रा मदद करते थे। जिन्होंने किचन और संसाधन की व्यवस्था रामनगर स्थित काशी कथा आश्रम में कराई थी।

किशोर कांत तिवारी पिछले 10 दिनों से बुखार से पीड़ित थे। उन्होंने अपने फेसबुक पर टाइफाइड का जिक्र किया था। पिछले 5 दिनों से हालत खराब होने पर दो निजी अस्पताल में इलाज कराए। दो दिन पहले कोरोना की रिपोर्ट पॉजिटिव आई जिसके बाद उनकी हालत और खराब हो गई थी। गुरुवार को किशोर कांत ने अंतिम सांस ली। उनकी मौत से तमाम लोगों को मायूसी हुई है। उनका कहना था कि अब गरीबों को आखिर भोजन कौन देगा ? किशोर कांत रोटी बैंक वाराणसी के संस्थापक थे उनके मित्र रोशन पटेल उनका सहयोग करते थे। किशोर कांत ने छित्तूपुर में आधा विस्वा जमीन लेकर रोटी बैंक के लिए कार्य शुरू कराया था, जो अधूरा ही रह गया। रोटी बैंक प्रतिदिन सामनेघाट ट्रामा सेंटर, बीएचयू, लंका, अस्सी, गोदौलिया क्षेत्र में वैन से खाना बांटते थे। कोरोना से मौत के बाद किशोर कांत की हरिश्चंद्र घाट पर अंत्येष्ठी की जाएगी।

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