
गणतंत्र दिवस पर लाल किले पर हमले की साजिश नाकाम: दिल्ली विस्फोट के पीछे “डॉक्टर आतंकी मॉड्यूल” का पर्दाफाश
दिल्ली के लाल किले के बाहर हुए विस्फोट की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। एनआईए की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी डॉक्टर मुज़म्मिल और डॉक्टर उमर ने गणतंत्र दिवस पर हमले की साजिश रची थी और जनवरी में लाल किले की रेकी भी की थी। इस आतंकी मॉड्यूल के पाकिस्तान से जुड़े होने के सबूत मिले हैं। विस्फोट में 13 लोगों की मौत हुई और 20 से अधिक घायल हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अस्पताल जाकर घायलों से मुलाकात की और कहा कि “दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।” जांच में अब तक 15 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और कई डॉक्टरों से पूछताछ जारी है।
- एनआईए ने संभाली जांच, पाकिस्तान से तार जुड़ने के संकेत; डॉक्टर मुज़म्मिल और डॉक्टर उमर ने की थी लाल किले की रेकी।
नयी दिल्ली : दिल्ली विस्फोट के आरोपी डॉक्टर मुज़म्मिल और डॉक्टर उमर ने एक बड़ी आतंकी साजिश के तहत लाल किले की रेकी की थी और इस मॉड्यूल की साजिश गणतंत्र दिवस के अवसर पर 26 जनवरी को लाल किले को निशाना बनाने की थी। शीर्ष सूत्र ने यह भी खुलासा किया है कि यह मॉड्यूल दिवाली के दौरान भी भीड़भाड़ वाली जगह पर हमले की भी साजिश रच रहा था।
सूत्र ने कहा, “हमने खुलासा किया है कि उसने कथित आत्मघाती हमलावर डॉक्टर मुज़म्मिल ने डॉक्टर उमर के साथ मिलकर जनवरी के पहले हफ्ते में लाल किले की रेकी की थी। यह महत्वपूर्ण जानकारी डॉक्टर मुज़म्मिल के फोन के डंप डेटा से प्राप्त की गई थी।”यह खुलासा तब हुआ जब सुरक्षा एजेंसियों को “डॉक्टर आतंकी मॉड्यूल” मामले में महत्वपूर्ण सफलता मिली। 10 नवंबर को शाम 6:52 बजे लाल किले के बाहर हुए विस्फोट के सिलसिले में 15 लोगों को गिरफ्तार किया गया और तीन को हिरासत में लिया गया। सभी गिरफ्तारियां जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा की गईं और अब तक कुल 56 डॉक्टरों से पूछताछ की जा चुकी है।
जांच का पता जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर के नौगाम पुलिस स्टेशन क्षेत्र में सुरक्षा बलों को धमकी देने वाले एक आपत्तिजनक पोस्टर से चलता है। इस संबंध में 19 अक्टूबर को मामला दर्ज किया गया था।10 नवंबर को लाल किले के बाहर हुए विस्फोट के बाद उत्तरी दिल्ली के कोतवाली पुलिस स्टेशन में एक प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस प्राथमिकी में धमाके को बम विस्फोट का नतीजा बताया गया है।जांच विवरण से पता चलता है कि डॉ. उमर उस चलती आई-20 कार में सवार था जिसमें विस्फोट हुआ था।
डॉ. उमर इस मामले में जम्मू-कश्मीर पुलिस के लिए वांछित है।डॉ. उमर ने लाल किला मेट्रो स्टेशन की पार्किंग में लगभग तीन घंटे बिताए, इस दौरान वह लगातार किसी के संपर्क में था। सीसीटीवी विश्लेषण से पता चलता है कि कार दोपहर 3:19 बजे पार्क की गई थी और तीन घंटे बाद शाम 6:48 बजे पार्किंग क्षेत्र से बाहर निकली, उस समय जब क्षेत्र में विशेष भीड़भाड़ थी।दिल्ली विस्फोट की जांच अब एनआईए कर रहा है। जम्मू-कश्मीर पुलिस भी मामले की जांच कर रही है।
मंत्रिमंडल ने दिल्ली विस्फोट की कड़ी निंदा की, आतंकवाद को बर्दाश्त न करने की प्रतिबद्धता दोहराई
केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने दिल्ली कार विस्फोट को जघन्य आतंकवादी घटना बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है और सभी तरह के आतंकवाद को कतई बर्दाश्त न करने की नीति के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस घटना में मारे गये लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गयी और उनकी स्मृति में दो मिनट का मौन रखा। बैठक में विस्फोट की कड़ी निंदा करते हुए एक प्रस्ताव भी पारित किया गया। मंत्रिमंडल ने इसे कायरतापूर्ण और घृणित कृत्य बताते हुए निर्दोष लोगों की मौत की कठोर शब्दों में निंदा की।
सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में बताया ,” मंत्रिमंडल ने लाल किले के पास कार विस्फोट की आतंकवादी घटना में मारे गए लोगों के प्रति गहरा शोक व्यक्त किया है। मंत्रिमंडल ने मृतक लोगों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखा।”प्रस्ताव में कहा गया है कि कार विस्फोट के माध्यम से देश विरोधी ताकताें द्वारा जघन्य आतंकवादी घटना को अंजाम दिया गया। इस विस्फोट में कई लोगों की मौत हो गई और अनेक लोग घायल हुए।
मंत्रिमंडल ने सभी तरह के आतंकवाद को कतई बर्दाश्त न करने की देश की नीति के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया। प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि इस घटना की जांच अत्यंत तत्परता और पेशेवर ढंग से करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि अपराधियों, उनके सहयोगियों और प्रायोजकों की पहचान कर उन्हें शीघ्र न्याय के कटघरे में लाया जा सके। सरकार लगातार सर्वोच्च स्तर पर स्थिति की निगरानी कर रही है।मंत्रिमंडल ने सरकार की सभी भारतीयों के जीवन और कल्याण की रक्षा करने की प्रतिबद्धता को भी दोहराया और कहा कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा के प्रति उसके संकल्प के अनुरूप है।
मंत्रिमंडल ने सभी घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करने के साथ-साथ घायलों का उपचार करने वाले चिकित्सा कर्मियों और पीड़ितों की सहायता और देखभाल में योगदान देने वाले आपातकालीन सेवाओं के कर्मियों के त्वरित प्रयासों की भी सराहना की।प्रस्ताव में कहा गया है कि मंत्रिमंडल ने दुनिया भर की कई सरकारों से प्राप्त एकजुटता और समर्थन के बयानों के लिए भी अपना आभार प्रकट किया।मंत्रिमंडल ने अधिकारियों, सुरक्षा एजेंसियों और नागरिकों द्वारा साहस और करुणा के साथ की गई समयबद्ध और समन्वित प्रतिक्रिया की सराहना की और कहा कि विपति की इस घड़ी में उनका समर्पण और कर्तव्य भावना अत्यंत सराहनीय है।
दिल्ली कार विस्फोट की जांच के लिए एनआईए की विशेष टीम का गठन, विस्फोट के तार पाकिस्तान से जुड़े
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा दिल्ली कार विस्फोट जांच की जिम्मेदारी संभालने के एक दिन बाद बुधवार को एक विशेष टीम का गठन किया गया। इस टीम में 10 अधिकारी शामिल हैं जिसका नेतृत्व अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) विजय साखरे करेंगे। इसका उद्देश्य जांच का दायरा बढ़ाना है। इस टीम में एक महानिरीक्षक (आईजी), दो उप महानिरीक्षक (डीआईजी), तीन पुलिस अधीक्षक (एसपी) और एक पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) शामिल हैं।एनआईए की जांच में दिल्ली पुलिस के अधिकारी भी सहायता कर रहे हैं।
शीर्ष सूत्रों ने वार्ता से कहा कि दिल्ली कार विस्फोट के तार पाकिस्तान से जुड़े होने के सबूत मिले हैं। डॉ. मुज़म्मिल और अन्य संदिग्धों से पूछताछ में प्राप्त जानकारी के आधार पर विस्फोट के साथ पाकिस्तान का संबंध जोड़ा गया है।सूत्र ने कहा, “इन संपर्कों का संबंध मौदुद्दीन औरंगज़ेब आलम से हो सकता है जिसे अम्मार अल्वी के नाम से भी जाना जाता है। खुफिया सूत्रों के अनुसार, मौदुद्दीन हमले का कथित संचालक था। निशाने पर पांच राज्यों के प्रमुख शहर थे। हमलों के लिए पुराने वाहनों का उपयोग योजना के अनुसार किया गया ताकि पहचान छुपायी जा सके।”इस बीच, पुलिस ने प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा कि लाल किले के बाहर हुए विस्फोट में आठ वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए।इसके अलावा, ई-रिक्शा, ऑटो, टैक्सी और बसों सहित 22 अन्य वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गए।
सूत्रों के अनुसार, विस्फोटक एक आई20 कार की पिछली सीट पर रखा गया था।एक सूत्र ने कहा, “डॉ. उमर मोहम्मद लाल किला पार्किंग क्षेत्र में भी गया था क्योंकि पहले वहां विस्फोट करने की योजना थी। लेकिन सोमवार होने के कारण लाल किला बंद था और वहां भीड़-भाड़ नहीं थी इसलिए वह पार्किंग क्षेत्र से चला गया।”सूत्रों के अनुसार, अपने साथियों की गिरफ्तारी और सारे विस्फोटक जब्त होने से डॉ. उमर घबरा गया था। उसे अपनी गिरफ्तारी का डर था और इसी घबराहट में उसने कार के अंदर ही विस्फोट कर दिया।
भूटान से लौटते ही दिल्ली विस्फोट के घायलों से मिलने अस्पताल पहुंचे मोदी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भूटान यात्रा से लौटते ही बुधवार को यहां लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल जाकर दिल्ली विस्फोट में घायल हुए लोगों से मिलकर उनका हाल-चाल जाना। श्री मोदी विस्फोट के एक दिन बाद मंगलवार को भूटान की दो दिन की यात्रा पर गए थे और आज दोपहर वहां से लौटते ही वह हवाई अड्डे से सीधे अस्पताल पहुंचे और घायलों से मिले। डाक्टरों और अधिकारियों ने उन्हें उपचार से संबंधित जानकारी से अवगत कराया।प्रधानमंत्री ने विस्फोट में घायल लोगों से बातचीत कर उनकी तबियत के बारे में पूछा और डॉक्टरों से उनके उपचार के बारे में जानकारी ली।
श्री मोदी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा ,” एलएनजेपी अस्पताल जाकर दिल्ली विस्फोट में घायल हुए लोगों से मिला। उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। इस षड़यंत्र के लिए जिम्मेदार लोगों को न्याय के कठघरे में लाया जाएगा। “मंगलवार शाम लाल किले के निकट हुए कार विस्फोट में 13 लोगों की मौत हो गयी थी और 20 से अधिक घायल हैं।श्री मोदी ने भूटान की राजधानी थिम्पू में भी एक कार्यक्रम में कहा था कि इस षड़यंत्र में शामिल लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।इस बीच गृह मंत्रालय ने विस्फोट की जांच का काम मंगलवार को राष्ट्रीय जांच एजेन्सी को सौंप दिया था। गृह मंत्री अमित शाह ने जांच एजेन्सियों के प्रमुखों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की थी। वह विस्फोट के तुरंत बाद घायलों से मिलने अस्पताल गये थे और उन्होंने घटनास्थल पर जाकर स्थिति का जायजा भी लिया था।
दिल्ली विस्फोट मामले में अल-फलाह यूनिवर्सिटी का कोई संबंध नहीं: प्रो आनंद
दिल्ली विस्फोट और हरियाणा के फरीदाबाद में मिले विस्फोटकों के बीच जुड़ाव सामने आने के बाद अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने बयान जारी करके स्पष्ट किया है कि संस्थान का इन घटनाओं से कोई लेना-देना नहीं है और केवल दो डॉक्टरों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है।कुलपति प्रो. (डॉ.) भूपिंदर कौर आनंद ने बताया कि डॉक्टर मुजम्मिल और डॉक्टर शाहीन सईद को जांच एजेंसियों ने पूछताछ के लिए बुलाया है। उन्होंने कहा, “ये दोनों हमारे यहां कार्यरत थे, लेकिन यूनिवर्सिटी का इनकी व्यक्तिगत गतिविधियों से कोई संबंध नहीं है। हमारे सभी काम कानूनी नियमों के तहत होते हैं।
”यह बयान उस समय आया है, जब दिल्ली विस्फोट और फरीदाबाद में मिले करीब 2900 किलो विस्फोटक के मामले में एक समान कड़ी अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़ने की बात सामने आ रहीं थी। बताया जा रहा है कि यूनिवर्सिटी से जुड़ा एक डॉक्टर, मोहम्मद उमर नबी, अपनी कार में विस्फोट के दौरान मारा गया।प्रो. आनंद ने कहा कि यूनिवर्सिटी में किसी भी प्रकार का विस्फोटक या रासायनिक पदार्थ नहीं रखा जाता। उन्होंने कहा, “ हमारी प्रयोगशालाएं केवल एमबीबीएस छात्रों की शिक्षा और ट्रेनिंग के लिए हैं। हाल की घटनाओं से हमें गहरा दुख है और हम इनकी कड़ी निंदा करते हैं। ”उन्होंने यह भी बताया कि अल-फलाह समूह 1997 से शिक्षा क्षेत्र में सक्रिय है। 2014 में इसे यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला और यह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से मान्यता प्राप्त है। 2019 में यहां मेडिकल कॉलेज शुरू हुआ और 2023 में कुछ विषयों में पीजी कोर्स (एमडी/ एमएस) भी शुरू किये गये।
फरीदाबाद पुलिस ने बीते दिनों करीब 60 लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था, जिनमें यूनिवर्सिटी से जुड़े सात लोग भी शामिल थे। सभी को पूछताछ के बाद रिहा कर दिया गया।इस बीच, यूनिवर्सिटी परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गयी है। अब परिसर में प्रवेश केवल पहचान सत्यापन के बाद ही दिया जा रहा है। मेडिकल ब्लॉक में जाने वाले हर व्यक्ति की जांच की जा रही है।प्रो. आनंद ने कहा कि कुछ समाचार वेबसाइटों द्वारा फैलायी जा रही झूठी खबरें संस्थान की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हैं। उन्होंने मीडिया से अपील की कि वह केवल सत्यापित जानकारी ही प्रसारित करे।जांच एजेंसियां दिल्ली विस्फोट और फरीदाबाद में मिले विस्फोटकों के नेटवर्क को जोड़ने में लगी हुई हैं। (वार्ता)
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