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नागरिकता संशोधन कानून – साझा संस्कृति मंच और जॉइंट ऐक्शन कमेटी बीएचयू ने रखा अपना पक्ष

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नागरिकता संशोधन कानून – साझा संस्कृति मंच और जॉइंट ऐक्शन कमेटी बीएचयू ने रखा अपना पक्ष

वाराणसी जनवरी । नागरिकता संसोधन कानून 2019 और NRC के खिलाफ आंदोलन, गिरफ्तारी, जेल यात्रा पर साझा संस्कृति मंच और जॉइंट ऐक्शन कमेटी बीएचयू ने मीडिया के सामने प्रेस वार्ता करके अपनी बात रखी। ज्ञातव्य है कि नागरिकता संशोधन कानून 2019′ CAA’ और नागरिकता रजिस्टर’ NRC’ के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करते हुए बेनियाबाग वाराणसी क्षेत्र से विपक्ष की कई राजनैतिक धारा समूहों के साथ साथ शहर के प्रबुद्ध सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता एवं जॉइंट ऐक्शन कमेटी (JAC) बीएचयू के छात्र सदस्यों की गिरफ्तारी हुई थी. 19 दिसंबर का कार्यक्रम एक बेहद गंभीर लोकतान्त्रिक शांतिपूर्ण तरिके से सोचा और क्रियान्वित किया गया था। बेनियाबाग स्थान चुनने मात्र के पीछे हमारा तर्क है की बेनियाबाग में विक्टोरिया की मूर्ति को तोड़ने का काम बनारस की जनता ने किया था। लोकबंधु राजनारायण की मूर्ति वहां लगी हुई है जो की हमे याद दिलाती है की कैसे आपातकाल के समय इंदिरा गाँधी जैसी सत्ता को भी इस सरजमीं से उपजे क्रन्तिकारी नेता ने धूल चटा दी थी। बेनियाबाग पार्क बनारस के लिए संघर्ष का प्रतीक है। बेनियाबाग में महात्मा गाँधी का अस्थिकलश रखा गया था। उस जगह पर ऐतिहासिक गाँधी चौरा भी है जहाँ शहर के गांधीवादियो का जमावड़ा आऐ दिन होता रहता है। उसी पार्क में अनगिनत बार हमलोगो ने साफ़- सफाई की है और वृक्षारोपण का भी काम किया है। बेनियाबाग को आयोजन उद्गम स्थल के रूप में चुनने पर जिला और पुलिस प्रशासन ने बारम्बार मना किया और उसे एक साम्प्रदायिक चेहरा बना दिया, जो कि सर्वथा अस्वीकार्य बात है। और शहर में यदि कहीं कोई समुदाय विशेष रह रहा है तो केवल इस वजह से वहां कोई कार्यक्रम आयोजन नहीं होगा, क्या यह संविधान सम्मत निर्णय है?

पुलिस ने 19 दिसंबर को बेनियाबाग आने वाले सारे रास्तो पर बैरिकेडिंग कर रखी थी। दुकाने लाठी के जोर पर बंद करा रखी थी। मार्च शुरू होते ही हमलोगों ने नारे लगाना शुरू किए कि, “हम देश बचाने निकले है। आओ हमारे साथ चलो।।” “थामे गांधी का हाथ चलो, आओ हमारे साथ चलो।” “हिन्दू ने पुकारा है मुसलमान हमारा है” आदि। इन नारो की तस्दीक आप मिडिया के साथी के वीडियो देख कर करें और बतलाए कि ये नारे देश विरोधी कैसे हो गए। पुलिस कह रही कि देश विरोधी नारे लगे, तोड़फोड़ हुई, उपद्रव और दंगे कराए गए। लेकिन सवाल है की पुलिस की इस बेबुनियाद कहानी के समर्थन में बेनियाबाग आस पास एक भी आम नागरिक नहीं खड़ा हुआ। सिर्फ पुलिस के ही लोग आरोप लगाने वाले और यही लोग गवाह भी है। यहाँ तक कि हमारे परिजनों- शुभचिंतकों को हैरान परेशान करने के लिए 5 लाख तक की जमानत राशी की मांग की गयी.
आंदोलनकारियों में आम छात्रों से लेकर 80 वर्ष के बुर्जुग भी रहे। दर्जन भर से ज्यादा वरिष्ठ नागरिक जो की इस बेहद ठंड भरे समय में कंबल की कमी में जेल में ठिठुरते रहे। गिरफ्तारी के बाद कोई सूचना नहीं दी गयी । अगले 48 घंटो तक अपने किसी वकील से तो दूर किसी स्वजन से भी बात करने नहीं दिया गया। अख़बार बंद रखा गया जिससे हम सूचना से वंचित रखे जाए। दो दशक से जिले की दलित मॉनीटरिंग सेल के सदस्य डॉ अनूप श्रमिक को भी बंद रखा गया। अयोध्या प्रकरण में आदेश आने के समय जो लोग शहर में अमन के लिए पर्चे बाँट रहे थे और शांति प्रेम भाईचारे के गीत गा रहे थे उन्हें दंगाई, बलवाई और देशद्रोही लिखा और बोला गया। जिले के तमाम पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी जो संविधान के पन्ने रटते पढ़ते ही सेवा कार्य में आए होंगे उन्हें लोकतंत्र, असहमति व संवाद आदि मूल्यों में जैसे कोई आस्था ही शेष नहीं बची दिखी। किसी के नवजात दूध पीते बच्चे के लिए गुहार हो या किसी छात्र के परीक्षा छूटने की बात। किसी वृद्ध के दवा और स्वास्थ्य की बात हो या किसी गरीब साइकिल बनाने वाले मिस्त्री का दर्द, प्रशासन ने सबको एक ही लाठी से हाँक लगाई की सब दंगाई है सब बलवाई है। सांप्रदायिक ऐंगल से पुरे हालत को पेण्ट करने की प्रशासन की चाल हर मोड़ पर फेल हुई। चाहे वो हमारा पर्चा रहा हो या प्ले कार्ड या नारे, सभी में समावेशिता और बहुलतावाद की बात की गयी। गिरफ्तार लोगो का धार्मिक विचार से वर्गीकरण किया जाए तो हमारे बीच केवल 14 साथी ही अल्पसंख्यक समुदाय से रहे। जो की यह सिद्ध करता है की NRC और CAA प्रकरण में केवल मुसलमानो का नुकसान नहीं होना है।
आर्थिक मोर्चे पर पूर्णतया असफल बीजेपी सरकार नोटबंदी और जीएसटी जैसे दकियानूसी बेमतलब तरीको से देश की अर्थव्यवस्था को जमीन पर गिरा चुकी है। पूरा देश लाइनों में खड़ा रहा केवल इस आशा में कि प्रधानमंत्री के इस फैसले से कालाधन बाहर आएगा और जाली नोटों का कारोबार खत्म होगा, आतंकवाद रुकेगा लेकिन बताइये पुलवामा कैसे हुआ? कश्मीर से लेकर तमाम देश भर में अपराध और नक्सलवाद के रास्ते हिंसा क्यों बढ़ रही है? इसके पीछे इस सरकार की आर्थिक नीतियों की विफलता है। बीजेपी सरकार रोजगार देने में विफल है। इसलिए वो हमे दूसरे मुद्दो में भटकाए रखना चाहती है। बेमतलब की टीवी बहसों में हिंदू- मुस्लमान, भारत- पाकिस्तान करके पूरा दिन बीत जाता है। अकेले असोम में NRC में सोलह सौ करोड़ रूपये सरकारी कोष से खर्च हुए। जनता के पॉकेट से हुआ खर्च आठ सौ करोड़ रु है। इसके बाद जो आंकड़े है हमारे सामने उसमे उन्नीस लाख लोग अपनी नागरिकता को सिद्ध नहीं कर पाए है। सोचिए क्या उन्नीस लाख लोगो को हम बंगाल की खाड़ी में फेंक देंगे क्या। आसपास के किसी देश से हमारी ऐसी कोई वार्ता नहीं हुई है की हम संदिग्ध नागरिको का क्या करेंगे? और अगर आप देखे कि इस उन्नीस लाख लोगो में कितने प्रतिशत हिन्दू है और कितने मुसलमान तो आपको समझ में आ जाएगा की वोट लेने के लिए दिए गए लोकलुभावन और साम्प्रदयिक भाषण कैसे समाज के एक बड़े हिस्से को न केवल प्रभावित कर रहे है बल्कि उनकी पूरी पहचान ही संदिग्ध कर दे रहे है। नोटबंदी की सफलता असफलता का कोई आंकड़ा आया है आपके पास? यही सब बेमतलब के कामो में फंसा कर ये सरकार आपको रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य के बुनियादी मसायल से दूर करना चाहती है। अगर ये सरअंजाम नहीं बंद हुए तो आने वाले समय में हम सब एक बार फिर से लाइनों में खड़े होने को मजबूर होने वाले है।

हम अपनी बात को जनता तक आगे भी ले कर जाते रहेंगे. प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार किये नागरिकों के लिए कानूनी मदद का भी हम प्रस्ताव करते हैं. 56 साथियो के संघर्ष के साथ-साथ, जो सामाजिक राजनैतिक और नागरिक समाज के लोग बाहर से संघर्ष की आवाज़ बने उन सभी को मीडिया के माध्यम से हम धन्यवाद देना चाहते हैं। कानूनी प्रक्रिया में मदद के लिए दिन रात मेहनत करने वाले एड0 अनिल सिंह पूर्व सरकारी वकील, प्रेम प्रकाश यादव, एड. अशोक सहगल, एड. राजेश यादव, एड. सुरेंद्र चरण, एड. श्रीनाथ त्रिपाठी, एड. हरिशंकर सिंह, एड. गुरिंदर सिंह जी सहित बार काउंसिल बनारस के सहयोग के प्रति भी हम आभार प्रकट करते हैं। मुफ़्ती ए शहर बातिन साहब के प्रति भी आभार प्रकट करते है। कांग्रेस महासचिव श्रीमती प्रियंका गांधी जी, सपा के नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी जी, स्वराज इण्डिया और वामधारा के सभी घटक समूहों के राज्य स्तर के पदाधिकारीयो की टीम के साथ-साथ बनारस जिले के पूर्व सांसद श्री राजेश मिश्रा जी, पूर्व विधायक व मंत्री श्री अजय राय जी, पूर्व विधायक और मंत्री श्री सुरेंद्र पटेल जी, पूर्व विधायक हाजी समद अंसारी जी ,पूर्व एमएलसी श्री अरविंद सिंह जी और जिला और महानगर अध्यक्ष कांग्रेस राघवेंद्र चौबे और राजेश्वर पटेल जी, यूथ कांग्रेस के जिला प्रमुख श्री विश्वनाथ कुंवर जी, सपा के जिला व महानगर अध्यक्ष डॉ. श्री पीयूष यादव, श्री राजकुमार जायसवाल, श्रीमती शालिनी यादव जी, बीएचयू, काशी विद्यापीठ और हरिश्चंद्र कॉलेज के छात्र और शिक्षक, देश भर के अम्बेडकरवादी, समाजवादी, गांधीवादी मानवाधिकार सामाजिक कार्यकर्ताओं का हम हार्दिक आभार प्रकट करते हैं। पत्रकार वार्ता में प्रमुख रूप से रामदुलार जी, डॉ. अनूप श्रमिक, रवि शेखर, डॉ. इन्दू पाण्डेय, मनीष कुमार, फादर आनंद आदि प्रमुख रूप मौजूद रहे।

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