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गोरक्षा व गो-आश्रय आत्मनिर्भरता में योगदान देने वाली विभूतियां होंगी सम्मानित: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गो-आश्रय स्थलों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ‘भूसा बैंक’, सीसीटीवी निगरानी और प्राकृतिक खेती से जुड़ाव पर जोर दिया। प्रदेश में 7,527 गो-आश्रय स्थलों में 12.39 लाख गोवंश संरक्षित हैं। सरकार तकनीक, पारदर्शिता और जनसहभागिता से गो-संरक्षण को मजबूत कर रही है।

  • 2-2 के समूह में पूरे प्रदेश में भ्रमण कर निरीक्षण करें गोसेवा आयोग के पदाधिकारी, विभागीय मंत्री और अधिकारी भी फील्ड में उतरें: मुख्यमंत्री

लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गो-रक्षा एवं गो-आश्रय स्थलों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उत्कृष्ट कार्य करने वाली विभूतियों को सम्मानित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि गोसेवा भारतीय सांस्कृतिक परंपरा का अभिन्न अंग है और इस क्षेत्र में समर्पित लोगों का सार्वजनिक सम्मान किया जाना चाहिए।

शनिवार को गोसेवा आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री ने निराश्रित गो-आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा करते हुए प्रत्येक गोशाला में ‘भूसा बैंक’ की स्थापना पर विशेष जोर दिया। उन्होंने स्थानीय किसानों के साथ समन्वय स्थापित कर हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों को गो-आश्रय स्थलों से जोड़ने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने सभी गो-आश्रय स्थलों में सीसीटीवी कैमरों की स्थापना एवं सतत मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए और इसके लिए सीएसआर फंड के प्रभावी उपयोग की संभावनाओं पर बल दिया। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता और तकनीक आधारित निगरानी से व्यवस्थाएं और सुदृढ़ होंगी।

मुख्यमंत्री ने गोसेवा आयोग के पदाधिकारियों एवं पशुधन विभाग के अधिकारियों को नियमित रूप से गो-आश्रय स्थलों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए। आयोग के पदाधिकारियों को 2-2 के समूह में मंडलवार भ्रमण कर ‘भूसा बैंक’ की स्थापना और गोचर भूमि के विस्तार कार्य को गति देने को कहा गया है। प्रत्येक भ्रमण की रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध कराई जाएगी। आयोग के भ्रमण में वरिष्ठ विभागीय अधिकारी भी होंगे। साथ ही, विभागीय मंत्री के नेतृत्व में राज्यव्यापी निरीक्षण और मुख्यालय स्तर से निदेशक द्वारा मासिक औचक निरीक्षण भी सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने कहा कि गो-संरक्षण केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, प्राकृतिक खेती और सतत विकास का मजबूत आधार है। इस दृष्टि से गो-आश्रय स्थलों के संचालन में पारदर्शिता, तकनीक और जनसहभागिता को प्राथमिकता दी जाए। डीबीटी प्रणाली के माध्यम से समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने और प्रत्येक गो-आश्रय स्थल पर गोवंश की दैनिक संख्या का अनिवार्य रजिस्टर संचालित करने के निर्देश भी दिए गए।

बैठक में अवगत कराया गया कि प्रदेश में वर्तमान में 7,527 गो-आश्रय स्थलों में 12.39 लाख से अधिक गोवंश संरक्षित हैं। इनमें 6,433 अस्थायी स्थलों में 9.89 लाख, 518 वृहद गो-संरक्षण केंद्रों में 1.58 लाख, 323 कान्हा गो-आश्रयों में 77,925 तथा 253 कांजी हाउस में 13,576 गोवंश संरक्षित हैं। मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत 1.14 लाख लाभार्थियों को 1.83 लाख गोवंश सुपुर्द किए गए हैं, जिनके सत्यापन एवं समुचित भरण-पोषण के निर्देश दिए गए हैं।

भूसा एवं साइलेज की उपलब्धता के संबंध में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए टेंडर प्रक्रिया समयबद्ध रूप से पूरी की जा रही है। निगरानी व्यवस्था के तहत 74 जनपदों में 5,446 गो-आश्रय स्थलों पर 7,592 सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए जा चुके हैं। 52 जनपदों में कमांड एंड कंट्रोल रूम स्थापित हैं, जबकि शेष में प्रक्रिया प्रगति पर है।

गोचर भूमि के प्रभावी उपयोग के लिए 61,118 हेक्टेयर से अधिक भूमि उपलब्ध है, जिसमें से 10,641.99 हेक्टेयर को गो-आश्रय स्थलों से जोड़ा गया है तथा 7,364.03 हेक्टेयर में हरे चारे का विकास किया जा चुका है।

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 97 गोबर गैस संयंत्र संचालित हैं, जो स्वच्छ ऊर्जा एवं आय सृजन का प्रभावी माध्यम बन रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इनके विस्तार पर जोर दिया। साथ ही, विभिन्न जनपदों में स्वयं सहायता समूहों एवं एनजीओ द्वारा गो-पेंट, वर्मी कम्पोस्ट, गो-दीप सहित अन्य उत्पादों के निर्माण को आत्मनिर्भरता का सफल मॉडल बताया। मुजफ्फरनगर का गो-अभयारण्य इस दिशा में एक उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में उभर रहा है।

वृहद गो-संरक्षण केंद्रों की प्रगति की समीक्षा में बताया गया कि 630 स्वीकृत केंद्रों में से 518 पूर्ण हो चुके हैं, जबकि शेष निर्माणाधीन हैं। पशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में खुरपका-मुंहपका, गलाघोटू एवं लंपी स्किन डिजीज के विरुद्ध व्यापक टीकाकरण अभियान संचालित किए जा रहे हैं और पशुपालकों को निरंतर प्रशिक्षित किया जा रहा है।

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