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भ्रामक विज्ञापन पर सीसीपीए की सख्ती: विजन आईएएस पर 11 लाख रुपये का जुर्माना

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के उल्लंघन में भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित करने पर विजन आईएएस पर 11 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। जांच में पाया गया कि यूपीएससी सीएसई 2022 और 2023 के परिणामों से जुड़े दावों में महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई गई, जिससे छात्रों और अभिभावकों को कोर्स की वास्तविक भूमिका को लेकर भ्रमित किया गया। प्राधिकरण ने पारदर्शिता और सत्य प्रकटीकरण पर जोर दिया है।

  • यूपीएससी सीएसई परिणामों को लेकर भ्रामक दावों और चयनात्मक खुलासों पर कार्रवाई 

नई दिल्ली। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (Central Consumer Protection Authority/सीसीपीए) ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के उल्लंघन के मामले में विजन आईएएस (Vision IAS/अजयविजन एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड) पर 11 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (Union Public Service Commission/सीएसई) 2022 और 2023 के परिणामों को लेकर संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित भ्रामक विज्ञापनों के संबंध में की गई है।

सीसीपीए के अनुसार, संस्थान ने “सीएसई 2023 में शीर्ष 10 में 7 और शीर्ष 100 में 79 चयन” तथा “सीएसई 2022 में शीर्ष 50 में 39 चयन” जैसे दावे किए थे। इन विज्ञापनों में सफल उम्मीदवारों के नाम, तस्वीरें और रैंक प्रमुखता से प्रदर्शित की गई थीं। जांच में पाया गया कि संस्थान ने यूपीएससी सीएसई 2020 के टॉपर शुभम कुमार द्वारा चुने गए जीएस फाउंडेशन बैच (क्लासरूम कोर्स) का उल्लेख तो किया, लेकिन अन्य सफल उम्मीदवारों द्वारा लिए गए पाठ्यक्रमों की जानकारी जानबूझकर छिपाई गई।

प्राधिकरण ने कहा कि इस चयनात्मक खुलासे से यह भ्रामक धारणा बनी कि वेबसाइट पर प्रदर्शित सभी उम्मीदवार जीएस फाउंडेशन बैच के छात्र थे, जबकि वास्तविकता में ऐसा नहीं था। इसी विज्ञापन में संस्थान ने अपने महंगे “फाउंडेशन कोर्स” का भी प्रमुखता से प्रचार किया, जिससे छात्रों को बढ़ा-चढ़ाकर और असत्यापित दावों के आधार पर दाखिले के लिए प्रेरित किया गया।

विस्तृत जांच में यह भी सामने आया कि संस्थान ने यूपीएससी सीएसई 2022 और 2023 में 119 से अधिक सफल उम्मीदवारों का दावा किया था, जबकि इनमें से केवल तीन उम्मीदवारों ने फाउंडेशन कोर्स में नामांकन लिया था। शेष 116 उम्मीदवारों ने प्रारंभिक व मुख्य परीक्षा के लिए टेस्ट सीरीज, एकल अभ्यास परीक्षण और मॉक इंटरव्यू जैसी सेवाएं ली थीं। महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने के कारण अभ्यर्थियों और अभिभावकों को यह विश्वास हो गया कि संस्थान सभी चरणों में सफलता के लिए जिम्मेदार था, जो अधिनियम की धारा 2(28) के तहत भ्रामक विज्ञापन की श्रेणी में आता है।

सीसीपीए ने यह भी कहा कि संस्थान की वेबसाइट पर सफल उम्मीदवारों के नाम और तस्वीरों के साथ किए गए बड़े दावे छात्रों की उचित अनुमति या सहमति के बिना प्रदर्शित किए गए, जिससे संभावित उम्मीदवारों को गुमराह किया गया। प्राधिकरण ने रेखांकित किया कि वेबसाइट वैश्विक स्तर पर सुलभ होती है और लंबे समय तक उपलब्ध रहती है, जिससे इसका प्रभाव प्रिंट मीडिया की तुलना में कहीं अधिक व्यापक होता है।

प्राधिकरण ने यह भी संज्ञान लिया कि विजन आईएएस के खिलाफ पूर्व में भी भ्रामक विज्ञापनों को लेकर कार्रवाई की जा चुकी है। इसके बावजूद, बाद के विज्ञापनों में भी ऐसे ही दावे जारी रखे गए, जिसे नियामक अनुपालन में लापरवाही माना गया। उल्लंघन की पुनरावृत्ति को देखते हुए इसे ‘बाद का उल्लंघन’ मानते हुए अधिक जुर्माना लगाया गया।

सीसीपीए ने बताया कि अब तक भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापार प्रथाओं के लिए विभिन्न कोचिंग संस्थानों को 57 नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इनमें से 28 संस्थानों पर कुल 1,09,60,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है और ऐसे दावों को बंद करने के निर्देश दिए गए हैं। प्राधिकरण ने सभी कोचिंग संस्थानों से अपील की है कि वे अपने विज्ञापनों में सत्य और पारदर्शी जानकारी का प्रकटीकरण सुनिश्चित करें, ताकि छात्र और अभिभावक निष्पक्ष एवं सूचित शैक्षणिक निर्णय ले सकें। (Press Information Bureau)

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