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मां सरस्वती का दुग्धाभिषेक कर पीएम ने ‘निर्मल-अविरल जलधारा’ के संकल्प को किया साकार

सरस्वती कूप में शहद व पुष्प भी किए अर्पित, पीएम मोदी ने सरस्वती कूप कॉरिडोर का लोकार्पण कर जनसामान्य के लिए दर्शन को बनाया सुलभ.सरस्वती कूप कॉरिडोर का किया अवलोकन, श्रद्धालुओं को सुलभ दर्शन उपलब्ध कराने के लिए हो रहे प्रयासों की ली जानकारी.

  • प्रधानमंत्री मोदी ने सरस्वती कूप स्थित मां सरस्वती की प्रतिमा का किया पूजन-अर्चन और दुग्धाभिषेक

महाकुम्भनगर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को तीर्थराज प्रयागराज में संगम तट पर पूजन-अर्चन तथा अक्षय वट, बड़े हनुमान मंदिर व सरस्वती कूप में दर्शन-पूजन के साथ ही इनसे जुड़े कॉरिडोर्स का निरीक्षण व लोकार्पण किया। प्रधानमंत्री मोदी ने सरस्वती कूप आकर यहां स्थापित मां सरस्वती की प्रतिमा का जल व गो-दुग्ध से विधिवत अभिषेक किया। उन्होंने दीप अर्पित करते हुए माता सरस्वती की प्रतिमा को शहद व पुष्प अर्पित किए।प्रधानमंत्री मोदी की प्रेरणा और योगी सरकार के कुशल क्रियान्वयन के जरिए पूर्ण हुए सरस्वती कॉरिडोर का भी अवलोकन कर इसे जनमानस के लिए लोकार्पित किया।

स्वच्छता के प्रतिमानों के अनुरूप पवित्र जलधारा में स्नान कर सकेंगे श्रद्धालु

यह सर्व विदित है कि तीर्थराज प्रयागराज में गंगा-यमुना व सरस्वती नदियों का पावन संगम होता है। इस संगम में धवल वर्णा गंगा तथा श्यामल-नील वर्णा यमुना का संगम तो स्पष्ट दिखता है, लेकिन सरस्वती अदृश्य रूप से इस त्रिवेणी संगम को पूर्ण करती हैं। सरस्वती नदी का स्वरूप सरस्वती कूप में विद्यमान है, जिसकी पूजा-आराधना सनातन संस्कृति का अभिन्न अंग है। तीनों ही मोक्षदायनी नदियों के पवित्र जल को स्वच्छता के प्रतिमानों के अनुरूप अविरल और महाकुम्भ में आने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए सुलभ बनाने की अवधारणा को प्रधानमंत्री मोदी साकार कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि मुगलकालीन किले के अंदर स्थित सरस्वती कूप का दर्शन काफी वर्षों से कुम्भ श्रद्धालुओं के लिए सुलभ नहीं था। वर्ष 2019 में योगी सरकार द्वारा आयोजित कुम्भ में पहली बार सरस्वती कूप का दर्शन श्रद्धालुओं के लिए सुलभ हो पाया। अब प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सरस्वती कूप का लोकार्पण किया गया, जिसके जरिए आम जनता अब नवनिर्मित कॉरिडोर से होकर कूप के दर्शन कर सकेंगे।

स्वच्छता एवं ज्ञान का संगम स्थल है सरस्वती कूप

सरस्वती कूप को लेकर मान्यता है कि इसका दर्शन स्वच्छता के साथ ही जीवन में ज्ञान के बोध को विकसित करता है। अक्षयवट की तरह ही इस कूप को भी मुगलकाल में बने किले के माध्यम से अधिग्रहित कर लिया गया और अंग्रेजी शासनकाल में ऑर्डिनेंस डिपो की स्थापना के कारण इस कूप का दर्शन आम जनमानस के लिए निषिद्ध हो गया था। वर्ष 2019 में प्रयागराज में आयोजित कुम्भ में इसे आम जनता के लिए खोला गया और अब कॉरिडोर के जरिए महाकुम्भ- 2025 में आने वाले करोड़ों श्रद्धालु इस पवित्र कूप के दर्शन-पूजन का लाभ उठा सकेंगे।

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