बिहार विधानसभा चुनाव 2025: दूसरे चरण में 67% मतदान, एनडीए को बढ़त के संकेत
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे और अंतिम चरण में राज्य की 122 सीटों पर लगभग 67.14 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी केंद्रों तक मतदाताओं ने उत्साह से हिस्सा लिया। महिलाओं और युवाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही। अरवल में एक अधिकारी की मृत्यु जैसी घटनाओं के बावजूद मतदान शांतिपूर्ण रहा। एग्जिट पोल्स में एनडीए को 133 से 167 सीटों तक बढ़त दिखाई गई है, जबकि महागठबंधन ने सर्वेक्षणों को भ्रामक बताते हुए वास्तविक नतीजों में अपनी जीत का दावा किया है। अब निगाहें 14 नवंबर की मतगणना पर हैं।
- जनता ने दिखाया लोकतंत्र पर भरोसा, महिलाओं और युवाओं में उत्साह; एग्जिट पोल में एनडीए को स्पष्ट बढ़त, महागठबंधन ने नतीजों पर जताया भरोसा
पटना । बिहार में आज लोकतंत्र का सबसे बड़ा पर्व उत्साह, उम्मीद और चुनौतियों के बीच सम्पन्न हुआ। विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे और अंतिम चरण में राज्य की 122 सीटों पर मतदान हुआ। दिन भर हल्की ठंड और सुहाने मौसम के बीच मतदाताओं ने बड़ी संख्या में घरों से बाहर निकलकर वोटिंग में हिस्सा लिया। दोपहर एक बजे तक जहां औसतन 47.62 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था, वहीं शाम पांच बजे तक कुल मतदान प्रतिशत बढ़कर 67.14 प्रतिशत तक पहुंच गया। राज्य निर्वाचन आयोग ने बताया कि इस चरण में 45,399 मतदान केंद्रों पर वोट डाले गए और कहीं-कहीं को छोड़कर मतदान शांतिपूर्ण रहा।
मतदान प्रतिशत और जिलेवार स्थिति
राज्य निर्वाचन कार्यालय के अनुसार दोपहर एक बजे तक कुल 47.62 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। किशनगंज जिले में सबसे अधिक 51.86 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जबकि नवादा जिले में यह प्रतिशत सबसे कम 43.45 रहा। इसके अतिरिक्त पश्चिम चंपारण में 48.91, पूर्वी चंपारण में 48.01, शिवहर में 48.23, सीतामढ़ी में 45.28, मधुबनी में 43.39, सुपौल में 48.22, अररिया में 46.87, पूर्णिया में 49.63, कटिहार में 48.50, भागलपुर में 45.09, बांका में 50.07, कैमूर में 49.89, रोहतास में 45.19, अरवल में 47.11, जहानाबाद में 46.07, औरंगाबाद में 49.45, गया में 50.95 और जमुई में 50.91 प्रतिशत मतदान हुआ। शाम तक अधिकांश जिलों में मतदाताओं की कतारें बढ़ीं और अंतिम आंकड़ा करीब 67 प्रतिशत तक पहुंच गया।
लोकतंत्र के प्रति उत्साह का दिन
सुबह सात बजे से ही कई जिलों में लंबी कतारें देखने को मिलीं। ग्रामीण इलाकों में महिलाएं समूह बनाकर मतदान केंद्रों तक पहुंचीं। कई जगह युवा मतदाता पहली बार वोट डालने को लेकर उत्साहित दिखे। मतदान केंद्रों के बाहर ‘सेल्फी प्वाइंट’ बनाए गए थे, जहां मतदाता अपनी उंगली पर लगी स्याही दिखाकर फोटो खिंचवाते नज़र आए।
कटिहार जिले के दलन गांव में आनंद कुमार सिंह नामक मतदाता ने लोकतंत्र के प्रति अपने प्रेम की अनोखी मिसाल पेश की। वे भैंस पर सवार होकर सिरसा स्थित मतदान केंद्र पहुंचे। लोगों ने जब यह दृश्य देखा तो हर कोई मुस्कुरा उठा। आनंद ने मीडिया से कहा कि भैंस उनकी धरोहर है और लोकतंत्र उनका गर्व। जब लोग बाइक या कार से वोट देने जाते हैं तो उन्होंने अपने सबसे भरोसेमंद साथी के साथ पहुंचने का फैसला किया।
सुपौल जिले के पिपरा विधानसभा क्षेत्र में केंद्र संख्या 131 पर एक मरीज ऑक्सीजन सिलेंडर लगाकर ई-रिक्शा से वोट डालने पहुंचा। यह दृश्य देखकर हर कोई प्रभावित हुआ। वहां मौजूद अधिकारियों ने भी कहा कि यह लोकतंत्र के प्रति सच्ची निष्ठा का उदाहरण है।
कई जिलों में किन्नर समाज के सदस्यों ने भी मतदान में उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। रोहतास जिले में बड़ी संख्या में किन्नर समुदाय के लोग मतदान केंद्रों पर पहुंचे और कहा कि वे भी बिहार के भविष्य के निर्माण में बराबर की हिस्सेदारी चाहते हैं।
दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं भी रहीं
मतदान के दौरान कुछ घटनाएं दुखद भी रहीं। अरवल जिले के बूथ संख्या 189 के पीठासीन अधिकारी अरविंद कुमार को ड्यूटी के दौरान हार्ट अटैक आया। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। निर्वाचन आयोग ने उनके परिवार को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। कटिहार में दो जगह ईवीएम में तकनीकी गड़बड़ी की सूचना मिली, जिसे तुरंत ठीक कर मतदान फिर से शुरू कराया गया। अन्य जिलों से किसी बड़ी हिंसा या अशांति की खबर नहीं मिली।
नेताओं के दावे और बयान
दिनभर मतदान के बीच राजनीतिक दलों के दावे-प्रतिदावे भी जारी रहे। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि मतदाताओं में जबरदस्त उत्साह है और महिलाएं बड़ी संख्या में मतदान कर रही हैं। उन्होंने दावा किया कि रुझानों से साफ है कि एनडीए को इस बार अपेक्षा से कहीं अधिक सीटें मिलेंगी।
वहीं बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष और कुटुम्बा विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार राजेश राम ने मतदान के बाद कहा कि पिछले बीस वर्षों की सरकार से जनता अब ऊब चुकी है और बदलाव चाहती है। उन्होंने कहा कि अब महागठबंधन की नई सरकार बनने जा रही है। जनसुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने रोहतास जिले के अपने पैतृक गांव कोनार में मतदान किया। मतदान के बाद उन्होंने कहा कि अब बिहार को शिक्षा, रोजगार और ईमानदार राजनीति की जरूरत है। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे जाति-धर्म से ऊपर उठकर ऐसे उम्मीदवारों को चुनें जो बिहार को नई दिशा दे सकें।
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जोड़ी पर जनता का भरोसा कायम है। उन्होंने कहा कि “महिला सुरक्षा, रोजगार और विकास” के मुद्दे पर जनता ने एनडीए को एक बार फिर मौका देने का मन बना लिया है।
दूसरी ओर राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने दावा किया कि इस बार बिहार के युवा और किसान परिवर्तन के लिए वोट कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता महागठबंधन के पक्ष में मतदान कर रही है और इस बार बिहार में नई सुबह आएगी।
मतदान में युवाओं और महिलाओं की भूमिका
चुनाव आयोग के अधिकारियों ने बताया कि इस बार मतदान में युवाओं और महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही। 18 से 25 वर्ष आयु वर्ग के मतदाताओं में उत्साह पहले चरण की तुलना में ज्यादा रहा। कई कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में मतदान से पहले “युवा मतदाता जागरूकता अभियान” चलाए गए थे, जिसका असर मैदान में साफ दिखा।
महिलाओं की कतारें कई जगह पुरुषों से लंबी नजर आईं। पूर्णिया, सुपौल, गया, औरंगाबाद और बांका जैसे जिलों में महिला मतदाताओं की उपस्थिति ने चुनाव अधिकारियों को भी प्रभावित किया। ग्रामीण इलाकों में स्वयं सहायता समूहों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने भी महिलाओं को मतदान के लिए प्रेरित किया।
सुरक्षा व्यवस्था
दूसरे चरण के मतदान में कुल 70 हजार से अधिक पुलिस और अर्धसैनिक बल के जवानों की तैनाती की गई थी। प्रत्येक बूथ पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। राज्य निर्वाचन आयोग ने 122 संवेदनशील और 217 अति-संवेदनशील बूथों की पहचान की थी। वहां पर विशेष निगरानी रखी गई। इस बार पहली बार कई जिलों में “वेबकास्टिंग” की व्यवस्था भी की गई ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता तुरंत नियंत्रण कक्ष से देखी जा सके।
एग्जिट पोल: एनडीए को बढ़त, महागठबंधन पीछे
मतदान समाप्त होने के बाद देश-भर की कई एजेंसियों ने अपने एग्जिट पोल जारी किए। अधिकांश एग्जिट पोल्स में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को स्पष्ट बढ़त दिखाई गई है।
टाइम्स नाउ-एबीपी सर्वे के अनुसार एनडीए को 133 से 155 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है, जबकि महागठबंधन को 70 से 95 सीटें मिलने का अनुमान है। जनसुराज पार्टी को दो से चार सीटों के बीच सीमित सफलता मिलने की भविष्यवाणी की गई है। इंडिया टुडे-एक्सिस सर्वे में एनडीए को 140 सीटों तक, जबकि महागठबंधन को 80 सीटों तक सीमित बताया गया है। वहीं इंडिया टीवी-सर्वे ने एनडीए को 167 सीटों तक का अनुमान दिया है।
महागठबंधन के नेताओं ने एग्जिट पोल्स को खारिज करते हुए कहा है कि वास्तविक परिणाम इसके विपरीत होंगे। आरजेडी प्रवक्ता शक्ति यादव ने कहा कि एग्जिट पोल्स हमेशा की तरह भ्रामक साबित होंगे और 14 नवंबर को जब परिणाम आएंगे, तब जनता का असली फैसला सामने होगा। वहीं भाजपा प्रवक्ता निखिल आनंद ने कहा कि जनता ने इस बार “काम और नेतृत्व” पर वोट दिया है, न कि वादों पर। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार ने जो विकास कार्य किए हैं, उनका असर पूरे बिहार में दिख रहा है।
मतदाताओं का मूड
पोलिंग बूथों पर पहुंचे मतदाताओं से बात करने पर यह साफ दिखा कि इस बार जनता मुद्दों पर सोच-विचार कर वोट डाल रही है। गया के एक शिक्षक संजय कुमार ने कहा कि अब बिहार में रोजगार की समस्या सबसे बड़ी है, इसलिए वे ऐसे उम्मीदवार को वोट देना चाहते हैं जो इस दिशा में कुछ ठोस कदम उठाए। कटिहार की एक महिला किसान ममता देवी ने कहा कि उन्हें महिला सुरक्षा और सड़कों की हालत की चिंता है, इसलिए उन्होंने उस पार्टी को वोट दिया जो इन मुद्दों पर बेहतर काम करती दिखी। युवाओं का कहना था कि अब केवल भाषणों से काम नहीं चलेगा, रोजगार चाहिए।
मतदान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल
मतदान खत्म होते ही राजनीतिक दलों के दफ्तरों में गतिविधियां तेज हो गईं। एनडीए और महागठबंधन दोनों के नेताओं ने अपने-अपने दावों को मजबूत करने में कोई कमी नहीं छोड़ी।
पटना स्थित जदयू कार्यालय में नेताओं ने शाम को बैठक कर बूथवार आंकड़ों की समीक्षा की। वहीं आरजेडी दफ्तर में तेजस्वी यादव ने अपने प्रत्याशियों से संपर्क कर मतदान प्रतिशत और रुझानों का फीडबैक लिया। कांग्रेस कार्यालय में भी वरिष्ठ नेताओं ने स्थिति का जायजा लिया। जनसुराज पार्टी के प्रशांत किशोर ने भी कहा कि उनकी पार्टी ने कुछ सीटों पर अच्छा प्रदर्शन किया है और आने वाले समय में वे राज्य की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस
राज्य निर्वाचन अधिकारी ने शाम को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि दूसरे चरण में कुल 67.14 प्रतिशत मतदान हुआ है। उन्होंने कहा कि मतदान शांतिपूर्ण और पारदर्शी रहा। जहां-जहां से मशीन खराब होने की सूचना मिली थी, वहां तुरंत कार्रवाई की गई। उन्होंने यह भी कहा कि इस बार दिव्यांग मतदाताओं की भागीदारी 18 प्रतिशत अधिक रही, जो एक सकारात्मक संकेत है।
चुनावी मुद्दे
बिहार चुनाव 2025 में इस बार जिन मुद्दों ने मतदाताओं को सबसे अधिक प्रभावित किया, उनमें शिक्षा, बेरोजगारी, पलायन, महिला सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं, और भ्रष्टाचार शामिल रहे। ग्रामीण इलाकों में किसान समस्याओं और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर चर्चा ज्यादा रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में युवाओं ने रोजगार और उद्योगों को लेकर नाराजगी जताई। कई मतदाताओं ने कहा कि वे अब ऐसी सरकार चाहते हैं जो नीतियों में निरंतरता के साथ नई सोच भी लाए।
अंतिम चरण का महत्व
इस चरण की वोटिंग बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि इसमें मगध, सीमांचल, चंपारण और अंग क्षेत्र की सीटें शामिल थीं। इन क्षेत्रों में पिछली बार के चुनाव में एनडीए और महागठबंधन के बीच कांटे की टक्कर रही थी। इस बार मुकाबला त्रिकोणीय भी रहा, क्योंकि प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी ने कई सीटों पर सीधे उम्मीदवार उतारे।
राजनीतिक विश्लेषण
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार की राजनीति में इस बार पारंपरिक जातीय समीकरणों के साथ विकास का मुद्दा भी समानांतर रूप से प्रभावी रहा। एग्जिट पोल्स चाहे एनडीए को बढ़त दिखा रहे हों, परन्तु कई सीटों पर मुकाबला बेहद करीबी बताया जा रहा है। वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद झा ने कहा कि इस बार युवा मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। उन्होंने बताया कि लगभग 1.3 करोड़ युवा मतदाताओं ने इस बार वोट डाला है, जो किसी भी दल के लिए बड़ा फैक्टर साबित हो सकते हैं।
अब निगाहें 14 नवंबर पर
अब पूरा बिहार 14 नवंबर की सुबह का इंतजार कर रहा है, जब मतगणना शुरू होगी और परिणाम स्पष्ट होंगे। सभी दल अपने-अपने स्तर पर जीत का दावा कर रहे हैं। एनडीए को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर सत्ता में लौटेंगे, जबकि महागठबंधन को भरोसा है कि जनता ने बदलाव का वोट दिया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं कि यदि एग्जिट पोल्स के अनुसार परिणाम आए तो नीतीश कुमार की सरकार को एक बार फिर बहुमत मिलेगा। लेकिन यदि परिणाम उलट गए तो बिहार की राजनीति में बड़ा मोड़ आ सकता है।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का दूसरा चरण लोकतंत्र की जीवंत तस्वीर बनकर सामने आया। कहीं भैंस पर सवार मतदाता ने सबका ध्यान खींचा, तो कहीं ऑक्सीजन सिलेंडर पर वोट डालने पहुंचा मरीज सबके लिए प्रेरणा बन गया। महिलाएं, युवा, बुजुर्ग, दिव्यांग- सबने अपने हिस्से का कर्तव्य निभाया। राजनीतिक तौर पर यह चरण निर्णायक साबित होने वाला है। एग्जिट पोल्स में एनडीए की बढ़त जरूर दिखाई गई है, लेकिन बिहार की राजनीति के इतिहास में कई बार अंतिम परिणाम ने सर्वेक्षणों को गलत साबित किया है।
अब देखना यह है कि मतपेटियों में बंद जनता का फैसला 14 नवंबर को किसके पक्ष में खुलता है। फिलहाल इतना तय है कि बिहार ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यहां की जनता लोकतंत्र की असली ताकत है, जो अपने भविष्य के फैसले खुद लिखती है।
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