Politics

अखिलेश यादव पर योगी सरकार के मंत्रियों का चौतरफा हमला, कांग्रेस गठबंधन से PDA तक उठाए सवाल

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्रियों ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर कांग्रेस गठबंधन, आपातकाल, एक्सप्रेसवे निर्माण, पत्रकारों की सुरक्षा और पीडीए फॉर्मूले को लेकर सवाल उठाए। राज्यसभा चुनाव में सामाजिक प्रतिनिधित्व और विपक्षी एकता का मुद्दा भी चर्चा में रहा। संजय निषाद, दयाशंकर सिंह, ओम प्रकाश राजभर समेत कई नेताओं ने बुलडोजर कार्रवाई और एनकाउंटर पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की राजनीतिक सरगर्मी के बीच सत्ताधारी गठबंधन और समाजवादी पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज होता दिखाई दे रहा है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान, लोकतंत्र की रक्षा, पत्रकारों की सुरक्षा, एक्सप्रेसवे निर्माण, बुलडोजर कार्रवाई, एनकाउंटर और विपक्षी एकता को लेकर दिए गए बयानों पर उत्तर प्रदेश सरकार के कई मंत्रियों और भाजपा नेताओं ने अलग-अलग मोर्चों से पलटवार किया है।

कैबिनेट मंत्री संजय निषाद, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, चौधरी भूपेंद्र सिंह, ओम प्रकाश राजभर, अनिल राजभर, राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी और मंत्री नरेंद्र कश्यप ने अखिलेश यादव के बयानों को उनके पूर्ववर्ती राजनीतिक फैसलों और सपा सरकार के कार्यकाल से जोड़ते हुए सवाल उठाए। वहीं भाजपा के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने राज्यसभा चुनाव और सपा के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को लेकर अखिलेश यादव पर निशाना साधा। इन नेताओं के बयानों में कांग्रेस के साथ सपा के गठबंधन, आपातकाल के इतिहास, एक्सप्रेसवे निर्माण में कथित भ्रष्टाचार, शाहजहांपुर के पत्रकार की हत्या, सामाजिक प्रतिनिधित्व और विपक्षी दलों की एकजुटता जैसे मुद्दे प्रमुखता से सामने आए।

कांग्रेस के साथ गठबंधन पर दयाशंकर सिंह ने मुलायम सिंह यादव के विचारों की दिलाई याद

परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन को लेकर अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस कांग्रेस के विरोध में नेताजी मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी का गठन किया था, आज अखिलेश यादव उसी कांग्रेस के साथ चुनावी गठबंधन कर रहे हैं। उन्होंने इसे मुलायम सिंह यादव के विचारों और राजनीतिक विरासत का अपमान बताया। दयाशंकर सिंह ने कहा कि अखिलेश यादव को अपने पिता के सम्मान में कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं करना चाहिए था। उनके अनुसार यह गठबंधन राजनीतिक स्वार्थ पर आधारित है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस राजनीतिक विचारधारा के आधार पर समाजवादी पार्टी का गठन हुआ था, उससे अलग जाकर कांग्रेस के साथ गठबंधन करना कहां तक उचित है।

2027 के चुनाव को लेकर जनता फैसला कर चुकी है: संजय निषाद

कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने दावा किया कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर जनता अपना फैसला कर चुकी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में जिस तरह विकास कार्य हुए हैं, उससे जनता का रुझान स्पष्ट है। अब समाजवादी पार्टी के वादों पर जनता भरोसा नहीं करती। अखिलेश यादव के दोबारा मुख्यमंत्री बनने की संभावना से जुड़े सवाल पर संजय निषाद ने कहा कि जनता ही असली जज है और वही चुनाव में फैसला करेगी। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि कई बार जितना अधिक बोला जाता है, परिणाम उसके विपरीत होता है।

एक्सप्रेसवे निर्माण में भ्रष्टाचार के आरोप, सपा सरकार के कार्यकाल पर उठाए सवाल

एक्सप्रेसवे निर्माण का मुद्दा भी सत्ताधारी नेताओं के हमले का प्रमुख आधार रहा। दयाशंकर सिंह ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव के कार्यकाल में लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे का निर्माण हुआ, लेकिन उसमें बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया। उन्होंने कहा कि इसके विपरीत वर्तमान योगी सरकार के कार्यकाल में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में एक्सप्रेसवे और बेहतर सड़क नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है।

चौधरी भूपेंद्र सिंह ने भी इस मुद्दे पर अखिलेश यादव को घेरते हुए आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान सड़क और एक्सप्रेसवे निर्माण में अनियमितताएं हुई थीं। उन्होंने दावा किया कि लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे का रूट निजी और पारिवारिक हितों को ध्यान में रखकर बदला गया था तथा इससे जुड़े फैसलों में भारी भ्रष्टाचार हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि एक्सप्रेसवे निर्माण के नाम पर निजी और पारिवारिक तिजोरी भरने का काम किया गया।

कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने भी एक्सप्रेसवे को लेकर अखिलेश यादव पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार में बनाया गया एक्सप्रेसवे सैफई परिवार के लिए लाभ कमाने का माध्यम बन गया था। उन्होंने योगी सरकार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश को एक्सप्रेसवे प्रदेश के रूप में विकसित किया जा रहा है। उनके दावे के अनुसार देश के कुल एक्सप्रेसवे का 56 प्रतिशत उत्तर प्रदेश में है।

राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने भी गंगा, पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का उल्लेख करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं से प्रदेश का बुनियादी ढांचा मजबूत हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान एक्सप्रेसवे के रूट तय करने में निजी हितों को प्राथमिकता दी गई और परियोजनाओं से जुड़े निर्णयों में जमीन खरीद के माध्यम से कुछ लोगों को लाभ पहुंचाया गया।

पत्रकार की हत्या का मामला उठाकर पत्रकार सम्मान के दावे पर पलटवार

अखिलेश यादव की ओर से पत्रकारों के सम्मान और सुरक्षा की बात किए जाने पर भी मंत्रियों ने सपा सरकार के कार्यकाल की एक घटना का उल्लेख किया।

दयाशंकर सिंह ने शाहजहांपुर में सपा सरकार के दौरान एक पत्रकार को जिंदा जलाए जाने की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि आज अखिलेश यादव पत्रकारों के सम्मान की बात कर रहे हैं, जबकि उनके मुख्यमंत्री रहते पत्रकार के साथ गंभीर घटना हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव नजदीक आने पर पत्रकारों के सम्मान की बात करना राजनीतिक दिखावा है।

चौधरी भूपेंद्र सिंह ने भी शाहजहांपुर की घटना का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि एक मंत्री के खिलाफ खबर प्रकाशित करने के कारण पत्रकार को जिंदा जलाया गया था और बाद में अस्पताल में भी उसकी जान लेने की कोशिश हुई थी।

उन्होंने अखिलेश यादव के प्रेस वार्ताओं में पत्रकारों के सवालों के जवाब देने के तरीके पर भी सवाल उठाए। भूपेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि सवाल पसंद नहीं आने पर पत्रकार की जाति पूछी जाती है तथा सपा कार्यकर्ताओं की ओर से पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की घटनाएं हुई थीं।

अनिल राजभर ने भी आरोप लगाया कि सपा शासन के दौरान पत्रकारों को दबाव में रखने की घटनाएं सामने आई थीं। उन्होंने कहा कि पत्रकारों से उनका नाम, चैनल और जाति पूछकर दबाव बनाने के आरोप लगते रहे हैं।

दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि जब अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे, तब शाहजहांपुर में एक पत्रकार को जिंदा जलाए जाने की घटना हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि आज अखिलेश यादव प्रेस वार्ताओं में पत्रकारों के सवालों और उनकी पहचान को लेकर उन्हें अपमानित करते हैं। उनके अनुसार ऐसी परिस्थितियों में सपा की ओर से पत्रकार सम्मान की बात करना विरोधाभासी है।

लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान और आपातकाल के मुद्दे पर कांग्रेस से गठबंधन को लेकर सवाल

अखिलेश यादव की ओर से लोकतंत्र सेनानियों को 51 हजार रुपये सम्मान राशि देने के ऐलान और लोकतंत्र की रक्षा की बात पर चौधरी भूपेंद्र सिंह ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की बात करने वालों को पहले अपने राजनीतिक फैसलों पर विचार करना चाहिए।

भूपेंद्र सिंह ने आपातकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस ने देश में आपातकाल लगाकर लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित किया था। उन्होंने सवाल किया कि एक ओर अखिलेश यादव आपातकाल की आलोचना करते हैं और दूसरी ओर उसी कांग्रेस के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ते हैं। उनके अनुसार यह राजनीतिक विरोधाभास है।

ओम प्रकाश राजभर ने भी आपातकाल के इतिहास को लेकर अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने रायबरेली से राजनारायण के चुनाव संबंधी मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि अदालत के फैसले के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लागू किया था। राजभर ने दावा किया कि उस दौरान बड़ी संख्या में नेताओं, कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को जेल में बंद किया गया था।

उन्होंने सवाल उठाया कि जिस कांग्रेस के शासनकाल में आपातकाल लागू हुआ था, उसी के साथ राजनीतिक गठबंधन करके अखिलेश यादव लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान और पेंशन की बात कैसे कर सकते हैं।

अनिल राजभर ने भी कांग्रेस के साथ सपा की राजनीतिक नजदीकी पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस ने आपातकाल लगाकर लोकतंत्र का अपमान किया था। उन्होंने पूछा कि यदि समाजवादी पार्टी वास्तव में लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान को लेकर गंभीर है तो वह आपातकाल लगाने वाली कांग्रेस के साथ राजनीतिक रूप से क्यों खड़ी है। उन्होंने इसे सपा की कथित दोहरी राजनीतिक नीति बताया।

पीडीए फॉर्मूले पर ओम प्रकाश राजभर और दिनेश प्रताप सिंह के सवाल

समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को लेकर कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने तीखी टिप्पणी की। उन्होंने पीडीए का अर्थ अपने राजनीतिक अंदाज में ‘परिवार, दौलतमंद और अपराधी’ बताते हुए अखिलेश यादव की सामाजिक प्रतिनिधित्व संबंधी राजनीति पर सवाल उठाए। राजभर ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के लिए जिन कार्यकर्ताओं ने संघर्ष किया, लाठियां खाईं और संगठन को मजबूत किया, उन्हें उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी में धनाढ्य लोगों और प्रभावशाली परिवारों को प्राथमिकता दी जा रही है।

मुस्लिम समाज के प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाते हुए राजभर ने कहा कि सपा को मुस्लिम मतदाताओं का समर्थन मिलता है, लेकिन राज्यसभा भेजने के समय मुस्लिम समाज को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दिया जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम समाज को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सपा के पीडीए फॉर्मूले में ब्राह्मण और सामान्य वर्ग की हिस्सेदारी कहां है। राजभर ने डिंपल यादव के पूर्व में हुए निर्विरोध चुनाव का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उस समय विरोधी उम्मीदवारों पर दबाव बनाया गया और उन्हें कथित तौर पर अगवा कर नामांकन वापस कराया गया था।

राजभर ने इन आरोपों के आधार पर कहा कि अखिलेश यादव की राजनीति में पिछड़ों, दलितों, मुसलमानों और सामान्य वर्ग के वास्तविक प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल खड़े होते हैं।

राज्यसभा चुनाव को लेकर पीडीए प्रतिनिधित्व पर भाजपा का हमला

राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवारों के चयन को लेकर भाजपा के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने भी अखिलेश यादव को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि पीडीए से जुड़े वर्गों को उम्मीद थी कि राज्यसभा चुनाव में अति पिछड़े, दलित और मुस्लिम समाज को प्रतिनिधित्व मिलेगा, लेकिन सपा की ओर से दो नाम घोषित किए जाने के बाद इन वर्गों में निराशा का माहौल बना।दिनेश प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि राज्यसभा चुनाव को लेकर सपा के निर्णय से पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के लोगों में असंतोष पैदा हुआ है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को अब यह चिंता सता रही है कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को इन वर्गों का कितना समर्थन मिलेगा।

उन्होंने कहा कि अब पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के लोग केवल चुनावी गतिविधियों में भाग लेने या दरी बिछाने तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि राजनीतिक और संगठनात्मक निर्णयों में अपनी भागीदारी चाहते हैं। राज्यसभा चुनाव को सपा के लिए चुनौती बताते हुए दिनेश प्रताप सिंह ने दावा किया कि भाजपा अपनी आठों सीटों पर जीत हासिल करेगी और नौवीं सीट के लिए भी प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा एक बार फिर सरकार बनाएगी।

विपक्षी एकता के आह्वान पर संजय निषाद और दानिश आजाद का पलटवार

राज्यसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव की ओर से विपक्षी एकता का आह्वान किए जाने पर भी सत्ताधारी गठबंधन के नेताओं ने प्रतिक्रिया दी।

कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने विपक्षी दलों पर बयानबाजी और पोस्टरबाजी तक सीमित रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास इसके अलावा कोई ठोस राजनीतिक शक्ति दिखाई नहीं देती। उन्होंने कहा कि जनता विपक्षी दलों को पिछले 70 वर्षों से देखती आ रही है और उनके राजनीतिक कामकाज से परिचित है। संजय निषाद ने कहा कि सत्ता से बाहर रहने पर अखिलेश यादव को विपक्षी दलों के बीच एकता और मिलन की आवश्यकता महसूस होती है, लेकिन केवल बयान देने से राजनीतिक परिणाम नहीं बदलते। उन्होंने दावा किया कि आगामी चुनाव में एनडीए को ऐतिहासिक जीत मिलेगी।

राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने भी अखिलेश यादव के दावों पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी ने जनता के बीच बड़े-बड़े वादे किए, लेकिन उसके राजनीतिक दावों की वास्तविकता सामने आ रही है। उन्होंने सपा पर नकारात्मक और नफरत की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जनता ऐसे राजनीतिक रवैये को स्वीकार नहीं करेगी। दानिश आजाद ने वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर दावा किया कि समाजवादी पार्टी को अब तक की सबसे बड़ी हार का सामना करना पड़ेगा और वह दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाएगी। यह उनका राजनीतिक दावा है।

बुलडोजर कार्रवाई और एनकाउंटर पर अखिलेश के सवालों का नरेंद्र कश्यप ने दिया जवाब

उत्तर प्रदेश में बुलडोजर कार्रवाई और पुलिस एनकाउंटर को लेकर अखिलेश यादव की ओर से उठाए गए सवालों पर योगी सरकार के मंत्री नरेंद्र कश्यप ने पलटवार किया। नरेंद्र कश्यप ने कहा कि अपराधियों की हिमायत करने वाले लोगों को बुलडोजर कार्रवाई से परेशानी होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव अपराधियों के प्रति हमदर्दी दिखाते हैं और समाजवादी पार्टी ने अपनी पुरानी प्रवृत्ति नहीं छोड़ी है।

एनकाउंटर के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यदि कोई अपराधी पुलिस पर जानलेवा हमला करता है या पुलिसकर्मियों की हत्या करने का प्रयास करता है तो पुलिस मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकती। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में पुलिस जवाबी कार्रवाई करती है और कई बार अपराधी मारे जाते हैं। नरेंद्र कश्यप ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए सपा सरकार के कार्यकाल में दंगा, हत्या और परिवारवाद के मुद्दे भी उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव की राजनीति में अपराधियों के प्रति नरमी दिखाई देती है।

2027 के चुनाव को लेकर नेताओं के अलग-अलग दावे

समाजवादी पार्टी और भाजपा के बीच बढ़ती बयानबाजी में वर्ष 2027 का विधानसभा चुनाव प्रमुख राजनीतिक संदर्भ बनकर उभरा है। संजय निषाद ने दावा किया कि जनता पहले ही अपना फैसला कर चुकी है और भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को ऐतिहासिक जीत मिलेगी। दानिश आजाद अंसारी ने सपा की संभावित हार का दावा करते हुए कहा कि पार्टी दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाएगी। वहीं दिनेश प्रताप सिंह ने भाजपा की आठ राज्यसभा सीटों पर जीत और नौवीं सीट के लिए प्रयास करने के साथ वर्ष 2027 में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार बनने का दावा किया।

बापू का चरखा बना आत्मनिर्भरता का प्रतीक, सीएम योगी ने बताया विकसित भारत का रास्ता

Related Articles

Back to top button