

किसानों का हित योगी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। पांच साल पहले बतौर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जब देश के सबसे बड़े सूबे के सत्ता की कमान संभाली थी, उस समय किसान बदहाल थे। कर्ज से लदे किसानों के खुदकुशी की खबरें आए दिन मीडिया की सुर्खियां बनती थीं।
खुद में अभूतपूर्व और ऐतिहासिक था कर्जमाफी का फैसला
किसानों की बदहाली दूर करने को प्रतिबद्ध योगी सरकार की पहली कैबिनेट का फैसला 86 लाख लघु-सीमांत किसानों के 36 हजार करोड़ रुपए के कर्जमाफी का था। अपने संसाधनों के बूते इतना बड़ा फैसला और इसका सफल क्रियान्वयन खुद में ऐतिहासिक था। तब तो और भी जब पूर्व की बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के भ्रष्टाचार के कारण खजाना खाली हो। जिस प्रदेश की आबादी लगभग 25 करोड़ हो। इस आबादी का लगभग 75 फीसद हिस्सा गावों में रहता हो। जिसकी रोजी रोटी का मुख्य जरिया खेतीबाड़ी ही हो। खेतीबाड़ी करने वाले किसानों में 90 फीसद से अधिक लघु-सीमांत किसान हों, उसके लिए तो यह फैसला ऐतिहासिक था।
योगी सरकार-2 में भी किसानों का हित सर्वोपरि
फिलहाल गावों और किसानों की बेहतरी के यह सिलसिला योगी सरकार-2 में भी जारी रहेगा। चुनाव के पहले
यूपी नंबर-1 की प्रतिबद्धता के लिए जारी संकल्पपत्र में भी इस बात (समृद्ध कृषि) का जिक्र सबसे पहले किया गया है। इस क्रम में फसलों की ग्रेडिंग, भंडारण के लिए जरूरत के अनुसार कोल्ड चेन चेम्बर या गोदाम,प्रोसेसिंग सेंटर आदि जैसी सुविधाओं के विस्तार के लिए सरकार 25 हजार करोड़ रुपए की लागत से सरदार बल्लभ भाई पटेल एग्री-इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन शुरू करेगी। 6 मेगा फ़ूड का निर्माण, 400 नए एफपीओ, नई गन्ना मिलों की स्थापना, उनके नवीनीकरण, क्षमता विस्तार और लघु सीमांत किसानों को बोरवेल, ट्यूबेल एवं टैंक के लिए 5-5 हजार करोड़ रुपए देने की बात भी संकल्पपत्र में कही गई है। साथ किसानों को सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली, आलू, टमाटर, प्याज आदि को मंदी की मार से बचाने के लिए एक हजार करोड़ रुपए का भामा शाह कोष बनाने की बात भाजपा संकल्पपत्र में कर चुकी है।
विश्व बैंक भी सहयोग करने का इच्छुक
किसानों के प्रति सरकार की इस संजीदगी को देखते हुए अब तो कई युवा भी इस क्षेत्र में स्टार्टअप शुरू किए हैं या करने की योजना बना रहे हैं। यही नहीं अब तो वर्ल्ड बैंक जैसी नामचीन संस्थाएं भी खेतीबाड़ी की बेहतरी और किसानों के हित के लिए प्रदेश सरकार के साथ मिलकर काम करने को इछुक है। इस बाबत विश्व बैंक के अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल 29 मार्च को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके सरकारी आवास पर मिला था। इसमें बैंक की ओर से खेतीबाड़ी की बेहतरी और किसानों की आय बढ़ाने के बाबत प्रस्तुतिकरण भी दिया गया। साथ ही पांच वर्षों के लिए 35 हजार करोड़ रुपए की एक कार्ययोजना भी प्रस्तुत की। इस पूरे प्रस्तुतिकरण का लब्बोलुआब यह था कि किसानों को अपने कृषि जलवायु (एग्रो क्लाइमेट) क्षेत्र और बाजार की मांग के अनुसार खेती करनी होगी। खेती में क्लस्टर एप्रोच अपनाना होगा। जोर जैविक खेती और न्यूट्रिशनल फ़ूड पर देना होगा।जैसे-जैसे लोंगों की आय बढ़ेगी। लोग स्वास्थ्य के प्रति भी जागरूक होंगे। ऐसे में जैविक उत्पादों की मांग बढ़ेगी। मांग बढ़ेगी तो संबंधित उत्पादों के दाम भी वाजिब मिलेंगे। देखा जाए तो जैविक खेती भविष्य की खेती है।
ओडीओपी के फसल उत्पाद होंगे संभावना के नए क्षेत्र
खेती के जिन उत्पादों को प्रदेश और केंद्र सरकार ने ओडीओपी (एक जिला, एक उत्पाद) के रूप में चुना है वह संभावनाओं का क्षेत्र हो सकता है। इसे और कल्टीवेट करने की जरूरत है। बाजार एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। इसमें स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार की ओर भी फोकस करना होगा। उत्पाद की लोंगों तक पहुँच बढ़ाने के लिए ऑफलाइन और ऑनलाइन बिक्री पर समान रूप से जोर देना होगा। अगर युवा इस ओर आकर्षित होंगे तो ऑनलाइन बाजार तक पहुँच अपने आप बेहतर हो जाएगी। ऐसा होने पर स्थानीय स्तर पर पैकेजिंग और लॉजिस्टिक के क्षेत्र में भी रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। इन सबमें एफपीओ की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी।
योगी सरकार-1 में कर्जमाफी के साथ हुए अन्य महत्वपूर्ण कार्य
मालूम हो कि योगी सरकार-1 में किसानों की कर्जमाफी के फैसले के अलावा भी सरकार ने इस बाबत और भी कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। मसलन आलू किसानों को उस समय मंदी की मार से बचाने के लिए बाजार हस्तक्षेप योजना। किसानों को उनकी उपज का वाजिब दाम दिलाने के लिए एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर खरीद की पारदर्शी व्यवस्था, गन्ना मूल्य भुगतान की समयबद्ध व्यवस्था। लैब टू लैंड नारे को साकार करने के लिए 20 नए कृषि विज्ञान केंद्रों की स्थापना और दशकों से लंबित किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं (वाण सागर, अर्जुन सहायक नहर और सरयू नहर) को समयबद्ध ढंग से पूरा करना। एमसपी के दायरे में और फसलों को लाना एवं लागत के अनुसार मूल्य तय करने के लिए स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करना आदि।



