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योगी ने एक बार फिर बताया क्या होता है राजधर्म ?

निर्देश देने के साथ गोरखनाथ मंदिर के लाउडस्पीकर्स की आवाज कम करवाकर पेश की नजीर.दो साल पहले सड़क चौड़ीकरण के लिए तुड़वा दी थी अपने ही मंदिर की बाउंड्री और दुकानें.

  • गिरीश पांडेय

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर बताया कि शासक या मुखिया धर्म क्या होता है? उनके पद के अनुसार आप इसे राजधर्म भी कह सकते हैं। राजधर्म वह होता है जिसमें किसीके साथ जाति, मजहब , पंथ या किसी अन्य आधार पर भेदभाव की कोई गुंजाइश नहीं होती। जो राजा खुद अपने आचरण या व्यवहार में इसका अनुपालन करता है वही आदर्श राजा शासक कहलाता है। होताको अमल में लाता है, उसका यह कार्य औरों के लिए अनुकरणीय होता है। लोग उसकी मिसाल देते हैं।

योगी ने सांसद से लेकर मुख्यमंत्री तक के सफर में कई बार इसे साबित किया है। उनकी यही कार्यशैली उनको औरों से अलग करती है। हाल ही में उपासना स्थलों पर लगे लाउडस्पीकर्स के बाबत उन्होंने एक निर्देश दिया था। निर्देश था कि ऐसी जगहों पर लगे लाउड स्पीकर्स की आवाज उतनी ही रखें जो संबंधित परिसर के दायरे तक ही सीमित हो। इस निर्देश के साथ ही उन्होंने गोरखपुर स्थित अपने गोरखनाथ मंदिर पर लगे लाउडस्पीकर्स की आवाज मानक के अनुसार कम करवा दी। यह तो हालिया उदाहरण है। दरअसल उनके लिए “जो कहा,वह किया” नारे से अधिक प्रतिबद्धता है।

मसलन दो साल पहले मई 2020 में गोरखपुर से सोनौली के लिए बन रहे फोरलेन के लिए उन्होंने गोरखनाथ मंदिर की दीवार और उससे लगी मंदिर की स्वामित्व वाली ढेर सारी दुकानों को तुड़वाकर कर औरों के लिए एक नया मानक तय कर दिया। साथ ही एक बड़ा संदेश भी दिया। संदेश यह कि अगर विकास के लिए उनके मंदिर की दीवार ढहायी जा सकती है तो विकास कार्यों के लिए मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा, मजार या किसी भी धार्मिक स्थल की भी।

इसी तरह अगर वह अमृत महोत्सव के दौरान हर जिलों में 75-75 अमृत सरोवरों के निर्माण की बात करते हैं तो इसको आप मंदिर परिसर स्थित भीम सरोवर और उससे कुछ दूरी पर स्थित सिंधी कॉलोनी में बने मानसरोवर की खूबसूरती से जोड़कर देख सकते हैं। गोरखपुर के रामगढ़ ताल की खूबसूरती और इसके लिए योगी आदित्यनाथ द्वारा सड़क से लेकर संसद तक किया गया संघर्ष खुद में एक मिसाल है। आज जिस ताल को गोरखपुर का मरीन ड्राइव कहा जाता है उसके लिए उन्होंने लंबा संघर्ष किया।

विपक्ष में रहकर केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की एनएलसीपी (नेशनल लेक कंजरवेशन प्लान) से ताल के सुंदरीकरण की परियोजना को लाना आसान नहीं था। वह भी तब जब उत्तर प्रदेश की दो झीलों के सुंदरीकरण को ही इस योजना में शामिल किया गया था। उसके बाद भी रामगढ़ ताल को मौजूदा स्वरूप देने में वर्षो लग गये।योगी आदित्यनाथ यू ही नहीं कृषि क्षेत्र की बेहतरी, किसानों की खुशहाली और लैब टू लैंड की बात करते हैं। इस मकसद से जब वह सांसद थे तो निजी क्षेत्र में कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) की स्थापना के लिए उन्होंने पीपीगंज कस्बे के पास करीब 60 एकड़ मंदिर की जमीन दे दी।

स्वास्थ्य और शिक्षा उस गोरक्षपीठ का सबसे पसंदीदा क्षेत्र है, योगीजी जिसके पीठाधीश्वर हैं। इन दोनों क्षेत्रों में पीठ ने मिसाल पेश की है। मसलन गोरखपुर विश्वविद्यालय की स्थापना के समय पीठ ने महाराणा प्रताप महाविद्यालय की कुछ जमीन मय भवन उस समय विश्विद्यालय को दान कर दिया। इसी तरह जब वह सबके लिए सस्ता और आधुनिक इलाज की बात करते हैं तो गुरु श्री गोरक्षनाथ चिकित्सालय की नजीर भी सामने रखते हैं। यही नहीं वह चाहते हैं कि अन्य धार्मिक संस्थाएं भी शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे जनहित से जुड़े क्षेत्रों में आगे आए। सबका साथ,सबका विकास और सबके बरोसे के लिए यह जरूरी भी है। आज मंदिर परिसर में तमाम दुकानें अल्पसंख्यक वर्ग की हैं। गुरु गोरखनाथ चिकिसालय में किसी का इलाज जाति और मजहब पूछकर नहीं होता।

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