ओडीओपी-पूर्वांचल के लाखों किसानों के लिए काला सोना बनेगा कालानमक चावल
आधुनिक सुविधाओं से लैश सीएफसी की होगी महत्वपूर्ण भूमिका.सरयू नहर और जीआई से और बढ़ जाएगी संभावना.
- गिरीश पांडेय
स्वाद और सुंगध में बेजोड़। आयरन और जिंक की भरपूर मात्रा के कारण सेहत के लिए भी बेहतर। ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होने की वजह से सुगर के रोगियों के लिए भी मुफीद, भगवान बुद्ध का प्रसाद, “कालानमक” धान अब अपने नाम के उलट किसानों के लिए काला सोना बनेगा। इसमें सबसे बड़ी भूमिका योगी सरकार-1 में शुरू की गई फ्लैगशिप योजना ओडीओपी (एक जिला एक उत्पाद) की रही है। इसमें कालानमक के लिए जिन जिलों को जीआई जियोग्राफिकल इंडिकेशन मिला है और इन सभी जिलों को सिंचित करने वाली सरयू नहर और केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा कालानमक को पांच जिलों (सिद्धार्थनगर, बस्ती, संकबीरनगर, गोरखपुर, महराजगंज और देवरिया ) का ओडीओपी घोषित करने की भी उल्लेखनीय भूमिका होगी। बात सीएफसी की करें तो सिद्धार्थनगर में शिवांश सिद्धार्थनगर एग्रीकल्चर डेवलपमेन्ट प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के नाम से वहां का सीएफसी केंद्र बनकर तैयार है। शीघ्र ही इसका उद्घाटन भी होगा। जिस तरह कालानमक मुख्यमंत्री का पसंदीदा विषय है उसके मद्देनजर इस बात की संभावना है कि वह खुद इस केंद्र का उद्घाटन करेंगे।
क्या होगी सीएफसी की खूबियां
कृषि वैज्ञानिक आरसी चौधरी के मुताबिक अब तक चावल के लिए कालानमक धान की कुटाई परंपरागत पुरानी मशीनों से होता था। अधिक टूट निकलने से दाने एक रूप नहीं होते थे। भंडारण एवं पैकेजिंग एक बड़ी समस्या थी। सीएफसी में हर चीज की अलग व्यवस्था होगी। पहले धान को डस्टोनर मशीन से गुजारा जाएगा। इससे इसमें कंकड़-पत्थर अलग हो जाएंगे। धान से भूसी अलग करने और पॉलिशिंग की मशीनें अलग-अलग होंगी। असमान दानों के लिए शॉर्टेक्स मशीन होगी। उत्पादक की मांग के अनुसार पैकिंग की भी व्यवस्था होगी। धान के भंडारण के लिए सामान्य और तैयार चावल को लंबे समय तक इसकी खूबियों को बनाए रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था होगी। इस तरह से यहां से निकलने वाला चावल अपनी सभी खूबियों के साथ पूरी तरह शुद्ध होगा।
जीआई और सरयू नहर से होने वाले लाभ
कालानमक धान को पूर्वांचल के 11 जिलों ( गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज, बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर और गोंडा) के लिए जीआई) प्राप्त है। मसलन इन जिलों की एग्रो क्लाइमेट (कृषि जलवायु) एक जैसी है। लिहाजा इस पूरे क्षेत्र में पैदा होने वाले कालानमक की खूबियां समान होंगी। इनमें से बहराइच एवं सिद्धार्थनगर नीति आयोग के आकांक्षात्मक जिलों की सूची में शामिल हैं।कालानमक की इन संभावनाओं को सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना ने और बढ़ा दिया। अन्य फसलों की तुलना में धान की फसल को पानी की अधिक जरूरत होती है। संयोग से चार दशक बाद कुछ महीने पहले पूरी होने वाली सरयू नहर से सिंचित होने वाले जिले बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, गोंडा, सिद्धार्थनगर, बस्ती, संतकबीरनगर, गोरखपुर और महराजगंज वही हैं जिनको कालानमक के लिए जीआई मिली है। इससे इसकी संभावनाएं और बढ़ जाती हैं।
चार गुना बढ़ जाएगी बिक्री और आय : नवनीत सहगल

सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव नवनीत सहगल के मुताबिक सीएफसी बन जाने से कालानमक चावल के बिक्री और निर्यात में करीब चार गुना तक इजाफा होगा। शुद्धता की गारंटी मिलने पर देश-विदेश में इसकी मांग बढ़ेगी। मांग बढ़ने से किसानों को वाजिब दाम मिलेंगे। इससे उनकी आय बढ़ेगी। सरकार की यही मंशा भी है।



