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हीरा-मोती उगाने वाली यूपी की धरती रोजगार का जरिया भी बनेगी

गिरीश पांडेय

गिरीश पांडेय

सन 1967 में एक सुपर हिट फिल्म आई थी। नाम था “उपकार”। इस फ़िल्म में पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री के जय-जवान, जय किसान नारे को केंद्र में रखकर एक गीत था। गीत के बोल थे, मेरे देश की धरती सोना, उगले-उगले हीरे मोती। यह बात प्रकृति और परमात्मा की असीम अनुकंपा वाले उत्तर प्रदेश पर हूबहू लागू होती है। दुनिया की सबसे उर्वर भूमि में शुमार इंडो गंगेटिक बेल्ट का सबसे विस्तृत क्षेत्र, गंगा, यमुना, सरयू जैसी सदानीरा नदियां, भरपूर बारिश, 9 तरह की कृषि जलवायु क्षेत्र ( एग्रो क्लाइमेटिक जोन)। इसमें उगने वाली अलग-अलग फसलें इसका सबूत हैं।

उत्तर प्रदेश की इन्हीं खूबियों के आधार पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अक्सर कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में देश का अन्नागार बनने की क्षमता है। सिर्फ कहते ही नहीं हैं इस बाबत किसान हितैषी योजनाओं के जरिए हर संभव प्रयास भी किया जा रहा है। योगी सरकार-1 इस बाबत शुरू किया गया सिलसिला योगी सरकार-2 में भी जारी रहेगा। यही नहीं इस सरकार में खेतीबाड़ी को किसानों की खुशहाली का जरिया बनाने के साथ बड़े पैमाने पर स्थानीय स्तर पर रोजगार का माध्यम भी बनाया जाएगा।

प्रदेश एवं केंद्र सरकार द्वारा ओडीओपी (एक जिला एक उत्पाद) के रूप में चयनित फसलें एवं कृषि उत्पाद, प्रधानमंत्री कुसुम योजना, खांडसारी इकाइयों को लाइसेंस देने की प्रक्रिया का सरलीकरण, हर ब्लॉक में खुलने वाले एफपीओ, कृषि उत्पादों को संरक्षित करने के लिए जरूरत के अनुसार बनाए जाने वाले कोल्ड स्टोरेज/ भंडार गृह, इन उत्पादों की छंटाई, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, ट्रांसपोर्टेशन, ऑफलाइन और ऑनलाइन बाजार से लिंकेज करने जैसी योजनाएं आने वाले समय में स्थानीय स्तर पर रोजगार का बड़ा जरिया बनेंगी।

चुनाव के पहले जारी लोककल्याण संकल्प पत्र-2022 में भी भाजपा ने खेतीबाड़ी के जरिए बड़े पैमाने पर स्थानीय स्तर पर रोजगार देने के लिए प्रतिबद्धता जताई है। मसलन प्रधानमंत्री कुसुम परियोजना के जरिए किसानों को सोलर ऊर्जा के अधिकतम प्रयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा। किसानों को भारी अनुदान पर दिये जाने वाले सोलर पंप से सिंचन क्षमता बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे पैदा होने वाली अतिरिक्त बिजली को सरकार खरीद लेगी। अकेले इस योजना से डीजल द्वारा होने वाले प्रदूषण और इसको खरीदने में होने वाला संसाधन भी बचेगा। साथ ही बिजली की बिक्री से आय भी बढ़ेगी।

इसी तरह प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में बनने वाले 6 मेगा फ़ूड पार्क भी उस क्षेत्र की खेतीबाड़ी का कायाकल्प करने में मददगार साबित होंगें। इससे सर्वाधिक संभावनाओं वाले खाद्य प्रसंस्करण और इससे संबंधित ग्रेडिंग, पैंकिंग, ट्रांसपोर्टेशन और विपणन के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार मिलेगा। यही लाभ उन फसलों एवं उन उत्पादों के प्रोसेसिंग से भी होगा जिनको केंद्र और प्रदेश सरकार ने ओडीओपी में शामिल किया है।

मालूम हो कि मुजफ्फरनगर एवं अयोध्या का गुड़, प्रतापगढ़ का आंवला, कुशीनगर एवं कौशांबी का केला, सिद्धार्थनगर का कालानमक चावल, बलरामपुर एवं गोंडा का गुड़, औरैया का देशी घी, हाथरस का हींग आदि ऐसी फसलें या फसल उत्पाद हैं जिनको प्रदेश सरकार ने अपनी बेहद महत्वाकांक्षी योजना ओडीओपी में चयनित किया है। 25 हजार करोड़ रुपए से शुरू होने वाली सरदार वल्लभभाई पटेल एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत बनने वाली छंटाई एवं ग्रेडिंग की इकाइयां, कोल्ड चेन चेम्बर्स, गोदाम एवं प्रोसेसिंग सेंटर इसमें मददगार होंगे।

प्रदेश में 45 लाख से अधिक किसान गन्ने की खेती करते हैं। पांच साल पहले तक ये चीनी मिलों पर ही निर्भर थे। मिलों का बकाया एक बड़ी समस्या थी। समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से गन्ना मूल्य भुगतान की समस्या को काफी हद तक दूर करने बाद अब सरकार 5000 करोड़ रुपए की लागत से चीनी मिलों का आधुनिकीकरण करेगी। क्षेत्र की जरूरत अनुसार नई चीनी मिलें भी लगाएगी। इससे भी स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।

स्थानीय अवसर पर गन्ने से रोजगार का अवसर उपलब्ध कराने के लिए योगी सरकार-1 ने खांडसारी मिलों की स्थापना और लाइसेंसिंग की प्रक्रिया सरल कर एक बड़ी राहत दी। करीब ढाई दशक बाद किसी सरकार ने इस ओर ध्यान दिया। इसके बाद से प्रदेश में 260 से अधिक खांडसारी इकाइयां लग चुकी हैं। इनकी कुल पेराई क्षमता 260 टीडीएस (लगभग 9 मिलों के बराबर) है। इससे गन्ना किसानों को एक वैकल्पिक बाजार मिला। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार भी।

खेतीबाड़ी को समग्रता में देखें तो रोजगार उपलब्ध कराने में पशुपालन एवं मत्स्य पालन की बेहद अहम भूमिका होती है। एक दुधारू पशु तो पशुपालक के लिए बैंक जैसा होता है। इससे उसे रोज या हर महीने आय होती है। पशुपालन को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार 1 हजार करोड़ रुपए की लागत से नंद बाबा दुग्ध मिशन शुरू करेगी। इस मिशन के जरिए सरकार की योजना हर गांव में दुग्ध सहकारी समितियां गठित करना और पशुपालकों को गांव में ही उनके दूध का वाजिब दाम दिलाना है।

इसी तरह मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए भाजपा ने संकल्पपत्र में निषादराज बोट सब्सिडी योजना शुरू करने का वायदा किया है। इसके तहत मछली बीज के उत्पादन की इकाई लगाने के लिए सरकार 25 फीसदी तक अनुदान देगी। नाव के लिए भी मछुआरा समुदाय को 40 फीसदी तक अनुदान देय होगा। प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में 6 अत्याधुनिक मछली मंडियों की स्थापना के पीछे भी यही मकसद है।

खेती संबंधित क्षेत्र के कृषि जलवायु क्षेत्र और बाजार की मांग के अनुसार हो इसके लिए सरकार का जोर जैविक खेती पर है। हाल ही में विश्व बैंक ने भी इस संबंध में रुचि दिखाई है। वह अगले पांच साल में खेतीबाड़ी और किसानों की बेहतरी के लिए 35 हजार करोड़ खर्च करने को तैयार है। इस बाबत बैंक के प्रतिनिधि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और कृषि एवं एमएसएमई विभाग के शीर्ष अधिकारी से मिलकर अपनी कार्ययोजना भी प्रस्तुत कर चुके हैं।

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