
अभ्युदय पांडेय गोरखपुर से हैं। वह इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट कोलकाता के पासआउट हैं। कुछ दिनों तक उन्होंने हैदराबाद एक 5 स्टार होटल में नौकरी भी की। पर होटल की नौकरी उनको रास नहीं आई। इसी तरह महराजगंज (नौतनवां) के हेमन्त इलेक्ट्रिकल ट्रेड से इंजीनियरिंग ग्रेजुएट हैं। वह लार्सन एन्ड टुब्रो जैसी नामचीन कंपनी में काम कर चुके हैं। दोनों युवा हैं। दोनों की रुचि खेतीबाड़ी के क्षेत्र में कुछ नवाचार (इन्नोवेशन) करने की है। दोनों इसकी शुरुआत भी कर चुके हैं।
मसलन अभ्युदय ने तथागत के नाम से एक कंपनी पंजीकृत कराई है। उनका फोकस फिलहाल सिद्धार्थनगर के एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) कालनमक चावल और कुशीनगर में होने वाली हल्दी के ऑनलाइन कारोबार पर है। उनका प्रोडक्ट अमेजन और ओडीओपी मार्ट पर भी उपलब्ध है। भविष्य में उनकी योजना कालानमक धान की जैविक खेती का क्लस्टर बनाने की है ताकि उत्पाद की गुणवत्ता से वह पूरी तरह संतुष्ट रहें।
हेमन्त ने अपने काम की शुरुआत कुछ पहले से की थी। उनके पास खाने-पीने के करीब 100 उत्पादों की रेंज है। इसमें अलग-अलग तरह के आंटे, मसाले, चाय, गुड़ और जड़ी-बूटियां शामिल हैं। चूंकि हर फसल किसी खास एग्रो क्लाइमेटिक जोन में उगती है। लिहाजा उनके किसानों का नेटवर्क भी कई प्रदेशों में है। वह जैविक उत्पादों की एक फ़ूड चेन बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं। हेमन्त और अभ्युदय में एक और समानता है। दोनों खेतीबाड़ी की बेहतरी के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी और प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की नीतियों के मुरीद हैं।
ये दोनों अकेले नहीं हैं। जबसे डबल इंजन की सरकार का फोकस खेतीबाड़ी की बेहतरी की ओर हुआ है। तमाम युवा इस ओर आकर्षित हुए हैं। अभी कुछ रोज पहले एक संस्था ने नवाचार करने वाले चुनिंदा युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए प्रोगेसिव स्टार्टअप्स अवार्ड दिया था। अवार्ड पाने वालों में अभ्युदय भी शामिल थे। उनके अनुसार जिनको अवार्ड मिला उनमें आधे से अधिक कृषि क्षेत्र से ही संबंधित थे। यह इस बात का सबूत है कृषि क्षेत्र में सरकार का फोकस बढ़ने के साथ इस ओर युवाओं का भी क्रेज बढ़ा है।
मालूम हो कि प्रधानमंत्री अक्सर मन की बात में किसी इन्नोवेटिव किसान की चर्चा करते हैं। मुख्यमंत्री भी ऐसे किसानों की सराहना करते हैं। चाहे वह ड्रैगन फ़ूड की खेती करने वाले सुल्तानपुर के किसान हों या स्ट्राबेरी की खेती करने वाले झांसी के किसान। ऐसे किसानों को देख कर बाकी किसान खासकर युवा भी प्रेरित हों इसके लिए योगी सरकार झांसी में स्ट्राबेरी, मुजफ्फरनगर में गुड़, सिद्धार्थनगर में कालनमक महोत्सव का भी आयोजन कर चुकी है। कुछ और ऐसे ही महोत्सव पाइपलाइन में हैं।
कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर आर सी चौधरी के अनुसार
जैविक खेती और इसके उत्पाद संभावनाओं का क्षेत्र है। जैसे-जैसे लोंगों की आय बढ़ेगी वैसे ही सेहत के प्रति जागरूकता भी। इन दोनों की वजह से जैविक उत्पादों की मांग भी बढ़ेगी। मांग बढ़ने से भाव भी अच्छे मिलेंगे। ऐसे में इसको लेकर स्टार्टअप करने वाले युवाओं के लिए संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं।



