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योगी-2 : ज्ञान के साथ गौरवशाली इतिहास का भी बोध कराएगी शिक्षा

गिरीश पांडेय

गिरीश पांडेय

शिक्षा वैचारिक बुनियाद तैयार करती है। अगर यह शिक्षा अपने गौरवशाली इतिहास और संपन्न संस्कार का बोध कराने वाली हो तो यह वैचारिक बुनियाद बेहद मजबूत बनती है। पढ़ना और पढ़े हुए को गुननाव्यक्ति की बौद्धिकता की धार को तेज करता है। देश और दुनिया में हो रहे बदलावों से वाकिफ कराता है। यही नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति का भी उद्देश्य है।

यही वजह है कि योगी सरकार-2 का जोर इस बार भी शिक्षा को लेकर समग्रता में है। वह शिक्षा को सिर्फ किताबी ज्ञान तक सीमित रखने की बजाय विद्यार्थियों के व्यक्तित्व के समग्र विकास का जरिया बनाना चाहती है। ऐसी शिक्षा जो जमाने के अनुसार हो। इस शिक्षा पाने वाला विद्यार्थी सिर्फ रोजगार का याचक न हो। जो शिक्षा उसे मिली है उसके जरिये वह जीवन के जिस भी क्षेत्र में जाए उसमें उसकी प्रभावी छाप दिख जाए। लोककल्याण संकल्पपत्र-2022 में भाजपा ने इस तरह की शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता भी जतायी है। अब सरकार अगले पांच साल तक पूरी प्रतिबद्धता से इसे अमली जामा पहनाने को कृतसंकल्पित है। स्वाभाविक रूप से इसकी शुरुआत प्राथमिक शिक्षा से होगी।

शेष प्राथमिक स्कूलों का होगा कायाकल्प, सभी बुनियादी सुविधाओं से संतृप्त होंगे माध्यमिक स्कूल

इस क्रम में योगी सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान जिन प्राथमिक स्कूलों का कायाकल्प नहीं हो सका था उनको ऑपरेशन कायाकल्प के जरिए स्मार्ट स्कूलों के रूप में विकसित किया जाएगा। माध्यमिक विद्यालयों की बेहतरी के लिए सरकार 30 हजार करोड़ रुपए खर्च करेगी। इसके तहत सभी माध्यमिक विद्यालयों में ऑडियो-वीडियो प्रोजेक्टर के लैश स्मार्ट क्लास, एक सम्पन्न लाइब्रेरी, कंप्यूटर एवं साइंस लैब और आर्ट रूम बनाए जाएंगे। इनको वाई-फाई से भी जोड़ा जाएगा। प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों से शुरू यह सिलसिला हायर एजुकेशन तक जाएगा।

पाठ्यक्रमों में गौरवशाली अतीत का बोध कराने को महापुरुषों की जीवनी होगी

इस शिक्षा में देश के अतीत का गौरवबोध कराने के लिए महापुरुषों की जीवनी होगी तो देश को आजाद कराने के लिए हंसते-हंसते अपना सब कुछ न्योछावर करने वाले जंगे आजादी के सपूतों की वीरगाथा भी होगी। मसलन अगर पाठ्यक्रम में अनिवार्य रूप से और विस्तार पूर्वक महाराणा प्रताप की जीवनी होगी तो इसे पढ़ने वालों से यह उम्मीद की जाएगी कि बेहद विपरीत परिस्थितियों में बह उनके भीतर देश के लिए वही जोश, जज्ज्बा और जुनून हो जो महाराणा प्रताप में था।

युवाओं में राष्ट्रप्रेम का जज्बा-जुनून जगाने के लिए जंगे आजादी के नायकों की गाथा भी होगी पाठ्यक्रम का हिस्सा

इसी तरह जंगे आजादी के सपूतों से उनको यह जानेंगे कि देश को यह आजादी अंग्रेजों से प्लेट में रखकर नहीं दे दी थी।

लखनऊ और नोएडा में खुलेंगी डिजिटल एकेडमी

यह दौर डिजिटल युग का है। इस दौर में डिजिटल ज्ञान के बिना शिक्षा अधूरी है। इसके लिए योगी सरकार-2 लखनऊ एवं नोएडा में डिजिटल एकेडमी की स्थापना करेगी। शिक्षा पाने वाले सिर्फ सरकारी के याचक न बनें बल्कि खुद का रोजगार स्थापित कर बाकी लोंगों को भी रोजगार देने की स्थिति में हों इसके लिए व्यावसायिक शिक्षा पर भी बराबर का जोर होगा। इसके लिए सरकार शीघ्र ही 2500 करोड़ रुपये की लागत से युवाओं को व्यावसायिक शिक्षा देने के लिए हर ब्लॉक में आईटीआई की स्थापना करेगी।

एक मंडल, एक विश्वविद्यालय पर काम करेगी सरकार

शिक्षा सबके लिए सुलभ हो। इसके लिए संसाधन खर्च करके दूर न जाना पड़े इसके लिए सरकार एक मंडल एक विश्वविद्यालय योजना पर भी काम शुरू करेगी। इस पर काम भी शुरू हो चुका है। अलीगढ़ में राजा महेंद्र सिंह विश्वविद्यालय, आजमगढ़ में महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय, लखनऊ में इंस्टीट्यूट ऑफ पुलिस एंड फॉरेंसिक साइंस, अयोध्या में आयुर्वेद के लिए आयुष शैक्षणिक संस्थान, गोरखपुर में महायोगी गुरु गोरक्षनाथ आयुष विश्वविद्यालय, प्रयागराज में नेशनल लॉ कॉलेज, मेरठ में मेजर ध्यानचंद स्पोर्ट्स विश्वविद्यालय की स्थापना के पीछे यही मकसद है। इनमें से कुछ संचालित हैं। कुछ पर काम चल रहा है और कुछ पाइपलाइन में हैं।

आज से 90 साल पहले ही गोरक्षपीठ ने कर ली थी ऐसी शिक्षा की परिकल्पना

शिक्षा ज्ञान के साथ अपने सम्पन्न इतिहास का बोध कराए। विद्यार्थियों में देश प्रेम के प्रति जज्ज्बा एवं जुनून पैदा करे। इसकी परिकल्पना गोरक्षपीठ ने 90 साल पहले ही कर ली थी। यही वजह है कि 1932 में मौजूदा मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ के दादा गुरु ब्रह्मलीन महंथ अवेद्यनाथ ने 1932 में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के नाम से जिस शैक्षिक प्रकल्प की स्थापना की थी उसके पीछे यही सोच थी। उस सोच को उनके शिष्य और योगीजी के गुरु ब्रह्मलीन महंथ अवेद्यनाथ एवं खुद योगीजी ने नई ऊंचाई दी। आज यह परिषद खुद में उत्तर भारत के लिए नजीर बन चुका है।

90 साल पहले स्थापित महाराणा शिक्षा परिषद अब विशाल वट वृक्ष बन चुका है। इसकी चार दर्जन से अधिक शिक्षण संस्थाओं में शिशु से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक हर तरह की शिक्षा मुहैया कराई जाती है। महायोगी गुरु श्रीगोरक्षनाथ के नाम से स्थापित इंटीग्रेटेड (एकीकृत) विश्वविद्यालय की पूरी तरह स्थापना और संचलन के बाद तो अपनी बेहद संपन्न फैकल्टी के कारण एमपी शिक्षा परिषद उत्तर भारत के श्रेष्ठतम शिक्षण संस्थाओं में शुमार होगा।

इन सभी शिक्षण संस्थाओं में पढ़ने वाले छात्र छात्राओं को समय-समय पर राष्ट्रवाद का पाठ पढ़ाया जाता है। इसका वृहद रूप हर साल 4 दिसंबर से 10 दिसंबर तक आयोजित एमपी शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह में दिखता है। इसके उदघाटन और समापन सत्र की अध्यक्षता देश की कोई जानी-मानी हस्ती करता है। सबके संबोधन के केंद्र में महाराणा प्रताप का देश प्रेम के प्रति जोश,जज्बा और जुनून ही होता होता है। इसमें शामिल हजारों युवाओं से भी यही अपील की जाती है कि वह भी खुद में समय आने पर देश के लिए प्रताप जैसा ही जोश,जज्बा और जूनन पैदा करें।

अब गोरक्षपीठ और पूर्वांचल के युवाओं के इस सपने को गोरखपुर में स्थापित होने वाला सैनिक स्कूल और ऊंची उड़ान देगा।
स्वाभाविक है कि महाराणा प्रताप शिक्षण परिषद से जुड़ी संस्थाओं के जरिए जो संकल्पना की गई थी वह पद के अनुरूप व्यापक फलक पर लागू की जा रही है।

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