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स्वामित्व योजना : ग्रामीणों को मिलेगा ‘राइट ऑफ रिकॉर्ड’

2025 तक देश के सभी ग्रामीणों को राइट ऑफ रिकॉर्ड मिल जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा प्रयास शुरू भी किए जा चुके हैं। केंद्र सरकार द्वारा इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए ”स्वामित्व योजना” शुरू की गई। वहीं इस योजना के पायलट चरण को 2020-2021 के दौरान महाराष्ट्र, कर्नाटक, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और पंजाब एवं राजस्थान के चुनिंदा गांवों में लागू किया गया था। आइए अब जानते हैं कि आखिर स्वामित्व योजना क्या है व किनके लिए लाभकारी है और अब तक ये योजना अपने लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा कहां तक पहुंची…

क्या है स्वामित्व योजना ?

सामाजिक-आर्थिक रूप से एक सशक्त और ‘आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत’ को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केन्द्रीय क्षेत्र की एक योजना के रूप में स्वामित्व (SWAMITVA-सर्वे ऑफ विलेजेज एंड मैपिंग विथ इम्प्रोवाइज्ड टेक्नोलॉजी इन विलेज एरियाज) का शुभारंभ किया गया। दरअसल, स्वामित्व योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के सपने में गांवों को आत्मनिर्भर बनाने में एक महत्वपूर्ण कदम है।

कब हुई योजना की शुरुआत

इस योजना को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 24 अप्रैल, 2020 को शुरू किया गया था। इसमें मैपिंग और सर्वेक्षण के आधुनिक तकनीकी साधनों का उपयोग करके ग्रामीण भारत को बदलने की क्षमता है। यह ग्रामीणों द्वारा ऋण और अन्य वित्तीय लाभों का फायदा उठाने के लिए संपत्ति को वित्तीय परिसंपत्ति के रूप में उपयोग करने का मार्ग प्रशस्त करता है। पंचायती राज मंत्रालय, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, नागरिक उड्डयन मंत्रालय, भारतीय सर्वेक्षण एवं राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र की यह नई कार्यक्षमता योजना की व्यापक पहुंच और पारदर्शिता में मदद करेगी। यह योजना पंचायती राज मंत्रालय के एक केंद्रीय क्षेत्र की स्वामित्व, राष्ट्रीय स्तर पर पंचायती राज दिवस (24 अप्रैल 2021) को नौ राज्यों में योजना के पायलट चरण के सफल समापन के बाद राष्ट्रीय स्तर पर शुरू की गई थी।

किन्हें मिलेगा योजना से लाभ ?

इस योजना के जरिए 2021-2025 के दौरान देशभर के लगभग 6.62 लाख गांवों को कवर करने की योजना बनाई गई है। यानि इन गांव में रहने वाले सभी ग्रामीणों को इस योजना का लाभ प्राप्त होगा। ग्रामीण को अपनी सम्पत्ति का ”रिकॉर्ड ऑफ राइट” देकर गांवों में कमजोर आबादी के मजबूती प्रदान की जाएगी।

जून से फिर शुरू होने वाला है सर्वे

इसके संबंध में शुक्रवार को केंद्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री गिरिराज सिंह ने बताया है कि 2025 तक देश के सभी ग्रामीणों को राइट ऑफ रिकॉर्ड मिल जाएगा। पीएम मोदी के ”आत्मनिर्भर भारत” के सपने में ग्रामों को आत्मनिर्भर बनाने की महत्वपूर्ण कड़ी में शुरू ”स्वामित्व योजना” के तहत जून से होने वाले सर्वे की जानकारी क्षेत्र के सांसदों और विधायकों को एसएमएस के माध्यम से दी जाएगी। निर्वाचित प्रतिनिधियों की भागीदारी से योजना कार्यान्वयन से जनता में विश्वास पैदा होता है।

गांव की जमीन के सर्वेक्षण के लिए उड़ेंगे ड्रोन

”स्वामित्व योजना” के तहत सर्वेक्षण के लिए निर्धारित क्षेत्र में ड्रोन उड़ान शुरू होने की जानकारी मिलने से लोग अचंभित नहीं होंगे। ”राइट टू रिकॉर्ड” का काम सफलतापूर्वक पूरा हो सकेगा। स्वामित्व लोगों को उनकी संपत्ति के अधिकार का रिकॉर्ड प्रदान करता है, जिसका उपयोग ऋण और अन्य लाभ लेने के लिए वित्तीय संपत्ति के रूप में किया जा सकता है।

स्वामित्व योजना का उद्देश्य

इस योजना का उद्देश्य सभी ग्रामीणों को ”रिकॉर्ड का अधिकार” प्रदान करना और संपत्ति कार्ड जारी करना है। यह महत्वपूर्ण योजना पूरे देश में पांच वर्षों में चरणबद्ध तरीके से लागू की जा रही है जो कि 2025 तक देशभर के सभी गांवों को कवर कर देगी। आधुनिक तकनीक के उपयोग के साथ यह योजना लाखों ग्रामीण संपत्ति मालिकों को और अधिक लाभान्वित करने के लिए चलाई जा रही है।

अब तक 15 हजार से अधिक गांव का ड्रोन सर्वे पूरा

अब तक विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 108 जिलों में ड्रोन उड़ान भरी जा चुकी है तथा कई और पूरा होने के कगार पर हैं। एक लाख 16 हजार 205 गांव का ड्रोन सर्वे पूरा हो गया है जिसमें से 81 हजार 911 गांव का नक्शा बनाकर राज्य को दिया जा चुका है।

एक करोड़ 11 लाख डिजिटाइज हुए लैंड पार्सल

अब तक एक करोड़ 11 लाख डिजिटाइज हुए लैंड पार्सल हुए हैं, वहीं 29 हजार 464 प्रॉपर्टी कार्ड लाभार्थियों को बांटे जा चुके हैं। SMS एप सेवा के माध्यम से सभी सांसद एवं विधायक को ड्रोन उड़ान की सभी जानकारी एसएमएस के द्वारा दो दिन पहले भेजे जाएंगे। इससे योजना के संबंध में सरकार के कार्य की जानकारी को लेकर मीडिया एवं ऑन-ग्राउंड पर जागरूकता फैलाने में मदद मिलेगी और योजना के लाभ के बारे में प्रभावशाली ढंग से प्रचार हो सकेगा।

मेरी सम्पत्ति मेरा हक” के जरिए प्रत्येक ग्रामीण को मिलेगा संपत्ति का रिकॉर्ड

”मेरी सम्पत्ति मेरा हक” के माध्यम से प्रत्येक ग्रामीण को अपनी सम्पत्ति का रिकॉर्ड ऑफ राइट देकर गांवों में कमजोर आबादी के सामाजिक-आर्थिक मानकों में सुधार करना है। इससे स्पष्ट रूप से प्रॉपर्टी का सीमांकन और प्रॉपर्टी का उचित कागजात नहीं रहने के कारण होने वाले भूमि विवाद के मामलों को प्रभावशाली रूप से निवारण होगा। बेहतर ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (जीपीडीपी) के लिए हाई रिजॉल्यूशन डिजिटल मैप से बुनियादी ढांचे स्कूलों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, नदियों, स्ट्रीट लाइट, सड़कों आदि में सुधार लक्ष्य है।

प्रॉपर्टी कार्ड की मदद से किसी भी बैंक से अब कम से कम ब्याज पर मिलेगा ऋण

”इकोनामिक ग्रोथ” के लिए अपनी प्रॉपर्टी को कलैटरल के रूप में उपयोग में लाकर बैंक ऋण को आसान बनाना और राज्य स्तर पर संपत्ति कर को सुनियोजित करना है। स्वामित्व से पहले ग्रामीण को ऋण प्राईवट लेंडर द्वारा भारी ब्याज दर पर मिलता था और प्रॉपर्टी हाथ से जाने का डर बना रहता था। प्रॉपर्टी कार्ड की मदद से किसी भी बैंक से अब कम से कम ब्याज पर ऋण मिल सकता है और प्रॉपर्टी पर कब्जा होने का भी डर नहीं रहेगा। बुनियादी कार्यों की प्लानिंग ऑन ग्राउंड फोर्स से किया जाता था, अब पंचायत अपने जीपीडीपी की प्लानिंग डिजिटल मैप से आसानी से कर सकते हैं। राज्यों द्वारा प्रॉपर्टी टैक्स का काफ़ी कम कलेक्शन हो पाता था। पंचायत अब आसानी से प्रॉपर्टी टैक्स की मॉनिटरिंग कर सकती है।

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