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नो स्मोकिंग डे: सेकेंड हैंड स्मोकिंग से रहे सावधान, नवजात बच्चों के लिए जानलेवा

हर साल मार्च के दूसरे बुधवार को नो स्मोकिंग डे यानी ‘धूम्रपान निषेध दिवस’ मनाया जाता है। इस वर्ष ‘धूम्रपान निषेध दिवस’ 10 मार्च को मनाया जाएगा। इस दिन का मुख्य उद्देश्य धूम्रपान के माध्यम से तंबाकू उपभोग की वजह से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले हानिकारक प्रभावों के बारे में लोगों को जागरूक करना है। धूम्रपान का घातक प्रभाव से कई बार हृदय रोग, ब्रोंकाइटिस, निमोनिया, स्ट्रोक और विभिन्न प्रकार के कैंसर में से संभावित मौखिक कैंसर जैसी गंभीर स्थितियां विकसित हो जाती है। लेकिन अक्सर धूम्रपान न करने वाले भी इससे होने वाली बीमारी के शिकार हो जाते हैं।

दरअसल कई बार लोग खुद धूम्रपान नहीं करते हैं मगर धूम्रपान करने वाले दोस्तों, रिश्तेदारों और परिवारजनों के बीच रहकर सेकेंड हैंड स्मोकिंग यानी दूसरों के धूम्रपान के धुएं का सेवन करते हैं। ऐसे लोगों को भ्रम हो सकता है कि उन्हें कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा इसलिए नहीं है क्योंकि वह तो सिगरेट पीते ही नहीं। मगर सेकेंड हैंड स्मोकिंग भी उतनी ही खतरनाक है जितनी कि खुद सिगरेट पीने वाले को।

धुंआ गर्भवती महिला के लिए भी हानिकारक

डॉ. राममनोहर लोहिया चिकित्सालय में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नमिता दास ने कहा कि गर्भवती के लिए सेकेंड हैंड स्मोकिंग उसके और उसके बच्चे दोनों के लिए खतरनाक हो सकती है। स्मोकिंग के धुंए के प्रभाव से बच्चे का विकास रुक सकता है और गर्भपात भी हो सकता है। धूम्रपान के धुएं की वजह से सडेन इंफेंट डेथ सिंड्रोम का खतरा बढ़ जाता है।

बच्चों में हो सकती हैं अलग-अलग गंभीर समस्याएं

इसके अलावा सेकंड हैंड स्मोकिंग से सबसे ज्यादा खतरा बच्चों को होता है क्योंकि उनके फेफड़े और अंग नाजुक होते हैं और प्रदूषण, धुंए या धूम्रपान के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं। इसका खामियाजा सबसे ज्यादा उन बच्चों को भुगतना पड़ता है जिनके मां-बाप या इनमें से कोई एक स्वयं धूम्रपान करता है। धूम्रपान के संपर्क में रहने से बच्चों को दांतों संबंधी कई समस्याएं हो सकती हैं। इसके बच्चों में कैंसर, शुगर, सांस संबंधी कई बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है।

इस रोग में पैदा हुए बच्चों की एक साल के अंदर बिना किसी कारण के मौत हो सकती है। कई बार बच्चा समय से पहले पैदा हो सकता है यानी प्री-मैच्योर डिलिवरी हो सकती है, बच्चे का वजन सामान्य से कम हो सकता है, बच्चे की मानसिक क्षमता सामान्य से कम हो सकती है, उसके सीखने और समझने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। अगर मां खुद धूम्रपान करती है तो यह सारे खतरे कई गुना तक बढ़ जाते हैं।

धूम्रपान से तात्पर्य सभी तरह के मादक पदार्थ

तम्बाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ फर्रुखाबाद के सलाहकार सूरज दुबे बताते हैं धूम्रपान से तात्पर्य सिर्फ सिगरेट पीने से नहीं है बल्कि इसके अंतर्गत बीड़ी, तम्बाकू युक्त पदार्थ, सिगार और पाइप भी शामिल हैं। तम्बाकू में लगभग 4000 केमिकल कंपाउंड होते हैं, जिनमें से लगभग 250 केमिकल्स जान ले सकते हैं।

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