
सहरसा गांव से महिषी गांव महज 18 किमी है, महिषी प्रसिद्ध विद्वान महान विद्वान मंडन मिश्र की जन्मभूमि है, जिनकी पत्नी भारती ने शास्त्रार्थ में आदि शंकराचार्य को परास्त किया था। ज्ञान की उसी वसुधा पर 96 वर्षीय जल प्रहरी रामजी पोद्दार भी रहते हैं जो मात्र 2 मीटर पॉलीथिन के जरिए जल संरक्षित कर रहे हैं। अपनी आयु को चुनौती देते हुए रामजी पोद्दार अपने गांव के अलावा महिषी के पांचो पंचायत में वर्षा जल संचयन, पुराने कुओं के जीर्णोद्धार की मुहिम चला रहे हैं। इतना ही नहीं ग्रामीणों को प्रेरित करने के लिए रामजी पोद्दार साल 2006 में मेघ-पाइन अभियान से जुड़े।
जल संग्रहण की तकनीक को लोगों ने अपनाया
रामजी पोद्दार ने स्वदेशी तकनीक से जल संग्रहण का नमूना पेश किया और महज दो मीटर का पॉलीथिन टांग कर वर्षा जल का संग्रहण कर नजीर पेश की। इस बारे में रामजी पोद्दार कहते हैं कि इस देशी तकनीक को पांचों पंचायतों के लोगों ने अपनाया और वर्षा जल संग्रहण किया। इसके अलावा गांव में कई बार पानी दूषित हो जाता है, धूल आदि से पीने लायक नहीं रह जाता, इसलिए बंद कुओं का भी निर्माण शुरू किया।
बाढ़ के समय में लोगों को मिला पीने का साफ पानी
रामजी पोद्दार यहीं नहीं रुके गांव के पुराने जल स्रोतों के जीर्णोद्धार के लिए ग्रामीणों को प्रेरित किया। पुराने कुओं और तालाब की खुदाई शुरू हो गई। रामजी का नुस्खा बाढ़ के समय में जल को दूषित होने से बचाने में भी कारगर साबित हुआ, जहां लोग गंदा पानी पीने को मजबूर थे। मेघ पाइन अभियान के मैनेजिंग ट्रस्टी एकलव्य प्रसाद कहते हैं कि रामजी पोद्दार के बाढ़ के समय में वर्षा चल संचयन और बाकी समय में कुओं का जीर्णोद्धार में मेघ पाईन अभियान की बहुत मदद की।
आज भी इस अभियान से जुड़े हैं और इस कार्य को कर रहे हैं। कोसी की त्रासदी झेल रहे इलाके लोगों के लिए शुद्ध पेयजल और शौचालय एक चुनौती रही है। ऐसे में रामजी पोद्दार जल संचयन और फायदेमंद शौचालय के जरिए लोगों को सीख दे रहे हैं। बता दें कि मेघ पाईन अभियान के तहत बाढ़ वाले इलाके में वर्षा जल संग्रह कर पीने के पानी के संकट को समाप्त करने जैसे कई अभियान चलाया जाता है।



