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भारत में 120 वर्षो बाद दिखी मैंडेरिन डक, वन्यजीव प्रेमियों में उत्साह

गुवाहाटी । भारत के वन्यजीव प्रेमियों के लिए पीछा हफ्ता काफी रोमांचक रहा। हाल ही में असम में एक दुर्लभ मैंडेरिन बतख दिखाई दी। विशेषज्ञों का कहना है कि ये बत्तख यहां पिछली 100 सालों नहीं देखी गयी है। सोशल मीडिया भी इस खूबसूरत पक्षी की तस्वीरों से रंगा रहा। खबर के बाहर आते ही इस खूबसूरत रंग-बिरंगी बत्तख की एक झलक पाने के लिए बर्ड वॉचर्स और वाइल्डलाइफ में दिलचस्पी रखने वाले असम के तिनसुकिया जिले में पहुंचे। खबरों के अनुसार, असम की मागूरी झील में मैंडेरिन डक को करीब 120 साल बाद देखा गया है। इस पक्षी को आखिरी बार 1902 में यहां देखा गया था। फिलहाल विशेषज्ञ पता लगा रहे हैं कि यह पक्षी इतने लंबे अंतराल के बाद कैसे असम तक पहुंचा है।

वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया की एक टीम भी इस बत्तख को देखने वहां पहुंच चुकी है। डिब्रू-साईखोवा नेशनल पार्क के भीतर मागुरी झील में बीते एक सप्ताह से इस दुर्लभ, सुंदर बत्तख को देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ रही है। मैंडेरिन डक बेहद सुंदर होते हैं। खासकर नर बत्तख को तो उसकी सुंदरता के चलते दूर से ही पहचाना जा सकता है। नर बत्तख मादा की तुलना में अधिक रंगीन होते हैं। यह पक्षी भारत में बहुत कम नजर आते हैं। मैंडेरिन डक को आखिरी बार तिनसुकिया जिले में रांगागोरा इलाके में डिब्रू नदी के तट पर देखा गया था। यह विलुप्तप्राय प्रजाति का जीव नहीं है, लेकिन इसका यहां पाया जाना महत्वपूर्ण है। इसकी वजह यह है कि आम तौर पर यह इस इलाके में देखने को नहीं मिलता। दुनिया की सबसे सुंदर बत्तख कहे जाने वाले मैंडेरिन डक की तलाश सबसे पहले स्वीडन के जीव विज्ञानी कार्ल लीनेयस ने 1758 में की थी। यह बत्तख चीन, जापान, कोरिया और रूस के कुछ हिस्सों में भी पायी जाती है।

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