नई दिल्ली : अर्जेंटीना के दिग्गज फुटबॉलर डिएगो माराडोना का दिल का दौरा पड़ने से साल 60 की उम्र में निधन हो गया। पिछले दिनों ही उन्होंने ब्रेन की सर्जरी कराई थी। इसके जरिए ब्लड क्लॉट यानी खून के थक्के को हटाया गया था। ड्रग और अल्कोहल के आदि रहे माराडोना को हाइ रिस्क मरीज़ के तौर पर देखा जाता था। ऐसे में शराब की लत हटाने का भी इलाज किया जाना था। कुछ दिनों पहले एक बॉडीगार्ड को कोरोना वायरस के लक्षण नज़र आने के बाद माराडोना पिछले हफ्ते दूसरी बार सेल्फ आइसोलेशन में गए थे। माराडोना ने 30 अक्टूबर को अपना 60वां जन्मदिन मनाया था।
माराडोना बोका जूनियर्स, बार्सिलोना और नेपोली जैसे क्लब के लिए खेले हैं। इटली के क्लब नेपोली के लिए खेलते हुए उन्होंने टीम को दो सीरी ए खिताब जिताए थे। माराडोना ने अपनी कप्तानी में 1986 में अर्जेंटीना को फीफा फुटबॉल वर्ल्ड कप जिताया था। फाइनल में उनके हाथ से लगकर गेंद गोलपोस्ट में गई थी. इसे माराडोना ने हैंड ऑफ गोल कहा था।
माराडोना ने अर्जेंटीना के लिए 91 मैच में 34 इंटरनेशनल गोल किए। वे चार बार अर्जेंटीना के लिए वर्ल्ड कप भी खेले थे। 1990 के वर्ल्ड कप में भी वे टीम को फाइनल तक ले गए थे। लेकिन यहां पर वेस्ट जर्मनी से हार मिली थी। 1994 के वर्ल्ड कप में भी वे टीम के कप्तान थे लेकिन ड्रग टेस्ट में फेल होने के चलते उन्हें वापस घर भेज दिया गया था।
करियर के दूसरे हिस्से में माराडोना कोकीन की लत से जूझते रहे। इससे उन्हें काफी परेशानी भी हुई। 1991 में ड्रग टेस्ट में पॉजिटिव आने के बाद उन पर 15 मिनट का बैन भी लगा था। वे 1997 में फुटबॉल से रिटायर हो गए थे। इसके बाद साल 2008 में वे अर्जेंटीना के कोच बने। उनके रहते टीम 2010 के क्वार्टर फाइनल में जर्मनी से हारकर बाहर हो गई।



