
अखिलेश यादव पर ओपी राजभर समेत कई मंत्रियों का हमला, PDA पर उठाए सवाल
उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और भाजपा के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर, कपिलदेव अग्रवाल और अनिल राजभर ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए पीडीए की राजनीति, पिछड़ों के प्रतिनिधित्व और दलितों के सम्मान को लेकर सवाल उठाए। भाजपा प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने भी सपा पर परिवारवाद का आरोप लगाया। नेताओं ने दावा किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में फिर एनडीए की सरकार बनेगी।
लखनऊ : उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज होने लगी है। प्रदेश सरकार के मंत्रियों ओम प्रकाश राजभर, कपिलदेव अग्रवाल और अनिल राजभर सहित भाजपा के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा है। नेताओं ने सपा की पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) राजनीति पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पार्टी पिछड़े वर्गों और दलितों के हितों की बात केवल चुनावी लाभ के लिए करती है। उन्होंने सपा के शासनकाल, गैर-यादव पिछड़ों के प्रतिनिधित्व और कानून-व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। साथ ही, आगामी विधानसभा चुनाव में प्रदेश में एक बार फिर एनडीए की सरकार बनने का दावा किया।
सत्ता में रहते पिछड़ी जातियों को प्रतिनिधित्व क्यों नहीं दिया: ओम प्रकाश राजभर
कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता से बाहर होने के बाद सपा प्रमुख को पिछड़ी जातियों के सम्मान और प्रतिनिधित्व की याद आ रही है, जबकि सत्ता में रहते हुए उन्होंने इन वर्गों के लिए पर्याप्त काम नहीं किया।
राजभर ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव की राजनीति मुख्य रूप से यादव समुदाय के इर्द-गिर्द केंद्रित रही है। उन्होंने कहा कि कश्यप, प्रजापति, पाल, नाई, गोंड़ और बंजारा जैसी पिछड़ी जातियों को सपा सरकार के कार्यकाल में अपेक्षित राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं मिला।
उन्होंने दावा किया कि सपा सरकार के दौरान गैर-यादव पिछड़ी जातियों को उचित भागीदारी देने की मांग उठाई जाती थी, लेकिन उस समय उनकी मांगों पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया। राजभर ने कहा कि अब सत्ता से बाहर होने के बाद सपा पिछड़े वर्गों के सम्मान और अधिकारों की बात कर रही है।
राजभर ने सपा की पीडीए राजनीति को भी निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव पिछड़ों और दलितों के हितों की बात तो करते हैं, लेकिन पार्टी के भीतर उन्हें बराबरी का अवसर देने के सवाल पर उनका रवैया अलग दिखाई देता है। उन्होंने इसे चुनावी राजनीति का हिस्सा बताते हुए कहा कि प्रदेश की जनता सपा की नीतियों और उसके राजनीतिक उद्देश्यों को समझ चुकी है।
संविधान से ज्यादा परिवार की चिंता: राजभर
ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव के संविधान संबंधी बयानों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा प्रमुख संविधान की चिंता जताकर राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि उनकी प्राथमिकता अपने परिवार की राजनीतिक स्थिति बनाए रखना है।
राजभर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संविधान को कोई खतरा नहीं है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के बाद एनडीए फिर से सरकार बनाएगा।
सपा को परिवार की पार्टी बताकर कपिलदेव अग्रवाल ने घेरा
उत्तर प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिलदेव अग्रवाल ने भी अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए समाजवादी पार्टी को परिवार केंद्रित पार्टी बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा में सैफई परिवार से बाहर के नेताओं को अपेक्षित सम्मान और आगे बढ़ने के अवसर नहीं मिलते।
अग्रवाल ने कहा कि पिछड़ों के अधिकारों की बात करने से पहले अखिलेश यादव को अपनी पार्टी में गैर-यादव अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के नेताओं को बराबरी का अवसर देना चाहिए। उन्होंने पीडीए की राजनीति को छलावा बताते हुए आरोप लगाया कि सपा का राजनीतिक व्यवहार उसके दावों से मेल नहीं खाता।
कानून-व्यवस्था और रोजगार को लेकर सपा पर आरोप
कपिलदेव अग्रवाल ने सपा सरकार के कार्यकाल को लेकर आरोप लगाया कि उस दौरान प्रदेश में अपराधियों और माफिया का प्रभाव था तथा सत्ता का संरक्षण मिलने के कारण कानून-व्यवस्था प्रभावित होती थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सपा शासन में दलितों की जमीन पर कब्जे की घटनाएं होती थीं।
इसके विपरीत, अग्रवाल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार में कानून-व्यवस्था बेहतर होने का दावा किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी सरकार ने कदम उठाए हैं।
रोजगार के मुद्दे पर मंत्री ने दावा किया कि योगी सरकार के कार्यकाल में 9.50 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां दी गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा शासन में सरकारी नौकरी की भर्तियों को लेकर अनियमितताओं और वसूली की शिकायतें सामने आती थीं। हालांकि, इन आरोपों और आंकड़ों के संबंध में उन्होंने इस बयान में विस्तृत दस्तावेजी विवरण प्रस्तुत नहीं किया।
अग्रवाल ने चौधरी चरण सिंह और अजित सिंह को लेकर अखिलेश यादव की कथित टिप्पणियों पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणियों का जवाब जनता चुनाव में देगी। मंत्री ने दावा किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में एनडीए प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाएगा।
पीडीए के नाम पर पिछड़ों को गुमराह करने का आरोप: अनिल राजभर
प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने भी अखिलेश यादव पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी पीडीए के नाम पर पिछड़ों और दलितों को गुमराह कर रही है। उन्होंने कहा कि सपा का राजनीतिक इतिहास पिछड़े वर्गों के नेताओं के सम्मान और प्रतिनिधित्व को लेकर सवालों के घेरे में रहा है।
अनिल राजभर ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव गैर-यादव ओबीसी नेताओं को अपने बराबर राजनीतिक स्थान देने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सपा शासनकाल में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह और अपना दल के संस्थापक सोनेलाल पटेल जैसे नेताओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया गया।
उन्होंने सपा सरकार पर एक वर्ग विशेष को प्राथमिकता देने का आरोप लगाते हुए कहा कि योगी सरकार में सभी जातियों, वर्गों और धर्मों के लोगों को सम्मान देने का प्रयास किया जा रहा है। इस संदर्भ में उन्होंने श्रृंगवेरपुर धाम में भगवान श्रीराम और भगवान निषादराज की गले मिलती हुई प्रतिमा का उल्लेख किया और इसे सामाजिक समरसता का प्रतीक बताया।
राज्यसभा चुनाव और विपक्षी गठबंधन पर भाजपा का निशाना
भाजपा के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने भी अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्यसभा चुनाव के दौरान सपा की पीडीए राजनीति को लेकर सवाल उठे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव संविधान की रक्षा की बात करते हैं, लेकिन उनकी राजनीति में परिवार का हित प्रमुख दिखाई देता है।
सपा और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर सामने आ रही तनातनी पर टिप्पणी करते हुए दिनेश प्रताप सिंह ने विपक्षी गठबंधन पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि दोनों दलों के बीच मतभेद बढ़ रहे हैं और उनका गठबंधन कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है। उन्होंने इसे तंज कसते हुए ‘लठबंधन’ करार दिया।
भाजपा प्रवक्ता ने दावा किया कि एनडीए की राजनीतिक ताकत से विपक्षी दल दबाव में हैं और उत्तर प्रदेश की जनता आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को समर्थन देगी।
चुनावी माहौल में पीडीए और पिछड़ों का प्रतिनिधित्व बना मुद्दा
प्रदेश सरकार के मंत्रियों और भाजपा नेताओं के इन बयानों से स्पष्ट है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पीडीए की राजनीति, गैर-यादव पिछड़ों के प्रतिनिधित्व, दलितों के अधिकार, कानून-व्यवस्था और रोजगार जैसे मुद्दों पर सियासी बहस तेज हो रही है।
भाजपा और उसके सहयोगी दल सपा की पीडीए रणनीति पर सवाल उठाकर गैर-यादव पिछड़े वर्गों के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, इन आरोपों के बीच अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी का पक्ष इस समाचार में शामिल नहीं है। सपा की प्रतिक्रिया मिलने पर इस राजनीतिक विवाद के दूसरे पक्ष को भी सामने रखा जा सकता है।
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