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अखिलेश को राजभर की खुली चुनौती, भाजपा नेताओं ने PDA से EVM तक हर मुद्दे पर घेरा

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और सहयोगी दलों ने अखिलेश यादव पर राजनीतिक हमला तेज कर दिया है। ओमप्रकाश राजभर ने अयोध्या और जहूराबाद का जिक्र कर चुनौती दी, जबकि अनिल राजभर ने सपा की विचारधारा पर सवाल उठाए। धर्मपाल सिंह ने SIR और महिला सुरक्षा, दिनेश प्रताप सिंह ने EVM, वहीं राकेश त्रिपाठी, राजेश चौधरी, अमरपाल मौर्य, प्रकाश पाल और अंकुश त्रिपाठी ने PDA, परिवारवाद तथा लोहिया के आदर्शों को लेकर निशाना साधा।

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दलों ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के खिलाफ राजनीतिक मोर्चा खोल दिया है। प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर, अनिल राजभर और धर्मपाल सिंह से लेकर भाजपा के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह, राज्यमंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना, प्रदेश प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी, विधायक राजेश चौधरी, भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमरपाल मौर्य, राज्यसभा सांसद प्रकाश पाल और प्रदेश प्रवक्ता डॉ. अंकुश त्रिपाठी ने अलग-अलग मुद्दों पर सपा प्रमुख को घेरा है। भाजपा नेताओं ने PDA की राजनीति, परिवारवाद, डॉ. राममनोहर लोहिया के आदर्शों, महिला सुरक्षा, महापुरुषों के सम्मान तथा चुनाव आयोग और EVM को लेकर अखिलेश यादव के रुख पर सवाल उठाए हैं।

भाजपा नेताओं का आरोप है कि समाजवादी पार्टी अपने राजनीतिक हितों के लिए समाजवाद और सामाजिक न्याय की बात करती है, लेकिन उसके व्यवहार में इन सिद्धांतों का पालन दिखाई नहीं देता। वहीं, ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव को अयोध्या और जहूराबाद का जिक्र करते हुए चुनौती दी और कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में सपा प्रमुख का बड़बोलापन और अहंकार मटियामेट हो जाएगा।

अयोध्या और जहूराबाद का जिक्र कर ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश को घेरा

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से अखिलेश यादव को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती दिए जाने से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बीच राजभर ने कहा कि इतिहास गवाह है कि ललकारकर भागने वाले को भगोड़ा कहते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि अखिलेश यादव भगोड़ा साबित नहीं होंगे।

राजभर ने अयोध्या और जहूराबाद का उल्लेख करते हुए सपा प्रमुख को चुनौती दी। उन्होंने सवाल उठाया कि अखिलेश यादव जिन मुद्दों पर बोल सकते हैं, उन पर स्पष्ट रुख क्यों नहीं अपनाते। राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव बढ़-चढ़कर बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन जिन विषयों पर बोलना चाहिए, उन पर चुप्पी साध लेते हैं।

कैबिनेट मंत्री ने कांग्रेस नेताओं से जुड़े विवादों का उल्लेख करते हुए अखिलेश यादव से अपना पक्ष स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय, एक महिला नेता और इमरान मसूद से जुड़े विवाद का जिक्र किया। राजभर ने सवाल उठाया कि इमरान मसूद के गिरेबान पर हाथ डालना सही था या नहीं। उन्होंने कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी के हाथ जोड़कर माफी मांगने के मामले और कांग्रेस नेताओं की कथित गाली-गलौज पर भी सपा प्रमुख से जवाब मांगा।

राजभर ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कहा कि 2027 में अखिलेश यादव और उनके सहयोगियों का बड़बोलापन तथा अहंकार मटियामेट हो जाएगा। उन्होंने अपने बयान में कहा कि उत्तर प्रदेश का स्वाभिमान जीतेगा और 2027 में उत्तर प्रदेश की जनता की जीत होगी।

लोहिया के समाजवाद से दूर हो गई सपा: अनिल राजभर

कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने अखिलेश यादव की राजनीति पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी अब डॉ. राममनोहर लोहिया के सिद्धांतों से दूर हो चुकी है। उन्होंने कहा कि लोहिया परिवारवाद की राजनीति के विरोधी थे और सनातन परंपरा के सम्मान की बात करते थे, लेकिन वर्तमान सपा की राजनीति उनके विचारों से मेल नहीं खाती।

अनिल राजभर ने चुनाव आयोग पर अखिलेश यादव की ओर से उठाए जा रहे सवालों को भी निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा को आगामी विधानसभा चुनाव में हार का अंदेशा है, इसलिए पार्टी पहले से ही हार के बहाने तैयार करने में जुट गई है। भाजपा नेता के मुताबिक, केवल किसी महापुरुष का नाम लेने से उसकी विचारधारा का प्रतिनिधित्व नहीं किया जा सकता, बल्कि उसके सिद्धांतों पर चलना भी जरूरी है।

भाजपा नेताओं ने PDA की राजनीति को लेकर भी सपा पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि अखिलेश यादव का PDA सामाजिक न्याय के व्यापक उद्देश्य से हटकर परिवार और राजनीतिक हितों तक सीमित हो गया है। भाजपा नेताओं ने इसे चुनावी राजनीति से जोड़ते हुए कहा कि जनता आगामी विधानसभा चुनाव में दलों की नीतियों और व्यवहार का मूल्यांकन करेगी।

SIR और मतदाता सूची को लेकर धर्मपाल सिंह का विपक्ष पर हमला

कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विपक्ष के पास विकास और जनकल्याण का कोई ठोस एजेंडा नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता के बीच स्वीकार्यता घटने के कारण विपक्ष SIR को मुद्दा बना रहा है।

धर्मपाल सिंह ने कहा कि मतदाता सूची से फर्जी नाम हटने के कारण विपक्ष परेशान है और इसी वजह से चुनाव आयोग पर सवाल उठाए जा रहे हैं। उन्होंने विपक्ष को सलाह दी कि वह चुनावी प्रक्रिया पर आरोप लगाने के बजाय जनता के बीच अपने काम और नीतियों पर चर्चा करे।

महिला सुरक्षा के मुद्दे पर भी धर्मपाल सिंह ने सपा सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में महिलाओं की सुरक्षा की स्थिति से पूरा प्रदेश परिचित है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सपाइयों को देखकर ही बेटियां घबराती थीं। इसके विपरीत, उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार में महिलाओं, बेटियों, व्यापारियों और आम नागरिकों की सुरक्षा प्राथमिकता है।

चुनाव आयोग और EVM पर सवाल उठाने को बताया दोहरा रवैया

भाजपा के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष अपनी राजनीतिक कमियों पर विचार करने के बजाय सत्ता हासिल करने के लिए दूसरे रास्ते तलाश रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों ने एनडीए को हराने के लिए कई तरीके अपनाए, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।

दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि जिन राज्यों में विपक्ष चुनाव जीतता है, वहां चुनाव आयोग, EVM और मतगणना व्यवस्था पर सवाल नहीं उठाए जाते। लेकिन जब परिणाम प्रतिकूल आते हैं, तब पूरी व्यवस्था पर आरोप लगाए जाने लगते हैं। उन्होंने इसे विपक्ष का दोहरा रवैया बताया और कहा कि जनता ऐसे राजनीतिक नैरेटिव को समझती है।

अखिलेश यादव की राजनीतिक गतिविधियों पर टिप्पणी करते हुए दिनेश प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि सपा प्रमुख साढ़े चार साल तक निष्क्रिय रहते हैं और चुनाव नजदीक आते ही जाति तथा धर्म के आधार पर राजनीति करने लगते हैं। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को सरकार और भाजपा पर आरोप लगाने से पहले अपनी कमियों पर विचार करना चाहिए।

भाजपा प्रवक्ता ने लोहिया की विचारधारा का उल्लेख करते हुए विवादित टिप्पणी की कि अखिलेश यादव का लोहिया के विचारों से कोई लेना-देना नहीं है और वह मुख्तार अंसारी तथा अतीक अहमद की विचारधारा का अनुसरण करते हैं।

महिला पत्रकारों के सम्मान पर भाजपा का पलटवार

महिला पत्रकारों के सम्मान और सुरक्षा को लेकर अखिलेश यादव के बयान पर उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महिला पत्रकारों का सम्मान होना चाहिए और हर महिला को सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा ने महिलाओं के सम्मान को हमेशा महत्व दिया है।

सक्सेना ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी अपने शासनकाल की घटनाओं को भूलकर आज महिला सम्मान की बात कर रही है। उन्होंने कहा कि सपा सरकार के दौरान महिलाओं के साथ गंभीर घटनाएं होती थीं और प्रदेश में दंगों की स्थिति बनी रहती थी। मंत्री ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश की जनता तीसरी बार अखिलेश यादव को सबक सिखाएगी।

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने भी अखिलेश यादव पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी को महिला सुरक्षा पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा शासनकाल में महिलाओं के खिलाफ दुर्व्यवहार करने वालों को संरक्षण दिया जाता रहा।

त्रिपाठी ने यह भी आरोप लगाया कि अखिलेश यादव सार्वजनिक रूप से पत्रकारों के सम्मान की बात करते हैं, जबकि अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों को अपमानित करते हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकारों और महिलाओं के सम्मान की बात करने वाले नेताओं को अपने आचरण में भी मर्यादा का पालन करना चाहिए।

लोहिया के आदर्शों पर चलने की नसीहत, PDA को लेकर राजेश चौधरी का हमला

राकेश त्रिपाठी ने डॉ. राममनोहर लोहिया की विचारधारा का उल्लेख करते हुए कहा कि लोहिया रामायण मेलों की बात करते थे, जबकि सपा नेताओं पर रामचरितमानस को फाड़ने और जलाने के आरोप लगे। उन्होंने यह भी कहा कि लोहिया परिवारवाद के विरोधी थे, लेकिन समाजवादी पार्टी आज परिवारवाद को समर्पित हो गई है। त्रिपाठी ने अखिलेश यादव को केवल लोहिया का नाम लेने के बजाय उनके बताए आदर्शों पर चलने की नसीहत दी।

भाजपा विधायक राजेश चौधरी ने भी अखिलेश यादव की राजनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव और डॉ. राममनोहर लोहिया के आदर्शों में कोई तालमेल नहीं है। उनके अनुसार, लोहिया सद्भावना और सामूहिकता की बात करते थे, जबकि सपा प्रमुख की राजनीति समाज को जातियों में बांटने वाली है।

राजेश चौधरी ने PDA के नारे को विभाजन का नारा बताते हुए आरोप लगाया कि सपा प्रमुख एक धर्म और एक जाति विशेष को ध्यान में रखकर राजनीति करते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अखिलेश यादव अपने राजनीतिक हितों के लिए दूसरे समाजों में विघटन और विद्रोह पैदा करना चाहते हैं।

अंबेडकर और गेस्ट हाउस कांड का उल्लेख कर अमरपाल मौर्य ने सपा को घेरा

भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमरपाल मौर्य ने आरोप लगाया कि जब-जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार रही, तब-तब महापुरुषों का अपमान किया गया। उन्होंने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि सपा प्रमुख को महापुरुषों के सम्मान की बात करने से पहले अपनी पार्टी के शासनकाल से जुड़े मामलों पर जवाब देना चाहिए।

अमरपाल मौर्य ने तत्कालीन सपा सरकार में मंत्री रहे आजम खान का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर को भू-माफिया बताया था। मौर्य ने सवाल उठाया कि अखिलेश यादव ने उस मामले में कार्रवाई क्यों नहीं की।

महिला सम्मान के मुद्दे पर अमरपाल मौर्य ने 1995 के चर्चित गेस्ट हाउस कांड का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस घटना में तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों के दौरान दलित समाज की नेता मायावती के साथ दुर्व्यवहार और उन पर हमले की कोशिश हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा को अपने राजनीतिक इतिहास से जुड़े ऐसे प्रसंगों पर जवाब देना चाहिए।

चुनाव आयोग पर अखिलेश यादव के सवालों को लेकर भी मौर्य ने सपा पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने पर पार्टी को आयोग की व्यवस्था सही लगती है, लेकिन हारने पर उसी आयोग पर सवाल उठाए जाते हैं।

समाजवाद परिवारवाद में सिमटा, प्रकाश पाल ने विपक्ष को दी चुनौती

भाजपा के राज्यसभा सांसद प्रकाश पाल ने समाजवादी पार्टी की विचारधारा पर निशाना साधते हुए कहा कि डॉ. राममनोहर लोहिया ने जिस समाजवाद को आगे बढ़ाया था, वह आज अखिलेश यादव के नेतृत्व में एक परिवार तक सिमटकर रह गया है। उन्होंने कहा कि सपा अब समाजवादी नहीं, बल्कि परिवारवादी पार्टी बन चुकी है।

प्रकाश पाल ने तंज कसते हुए कहा कि लोहिया जी की आत्मा यह सब देखकर रो रही होगी। उन्होंने अखिलेश यादव और विपक्षी गठबंधन के नेताओं को चुनौती देते हुए कहा कि उन्हें जो भी आरोप लगाने हैं, वे सच्चे और ठोस मुद्दों पर आधारित होने चाहिए। केवल आरोप लगाकर पीछे हटना और बयानों से माहौल खराब करना उचित नहीं है।

दिल्ली में हो रहे प्रदर्शनों और राहुल गांधी को लेकर प्रकाश पाल ने विवादित टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जिन लोगों में चुनाव लड़कर जीतने की हिम्मत नहीं बची है, वे कॉकरोचों के सहारे राजनीति करने में लगे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेता महिला पुलिसकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाओं को छिपाने और देश का माहौल खराब करने का प्रयास कर रहे हैं।

2024 में सपा की सीटें बढ़ीं तो EVM मुद्दा नहीं था: अंकुश त्रिपाठी

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता डॉ. अंकुश त्रिपाठी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी गठबंधन संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाकर अपनी राजनीतिक जिम्मेदारियों से बचने की कोशिश करता है।

अंकुश त्रिपाठी ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की सीटें बढ़ीं, तब अखिलेश यादव के लिए EVM कोई मुद्दा नहीं था और चुनाव आयोग निष्पक्ष एवं पारदर्शी संस्था था। उन्होंने आरोप लगाया कि अब 2027 के विधानसभा चुनाव में हार की आशंका के कारण सपा प्रमुख पहले से बहाने तलाश रहे हैं और चुनाव आयोग को निशाना बना रहे हैं।

महिला सुरक्षा के मुद्दे पर भी अंकुश त्रिपाठी ने अखिलेश यादव को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान महिलाओं के विरुद्ध अपराध के मामलों में उत्तर प्रदेश शीर्ष पर था और उस सरकार में दुष्कर्म के आरोपी नेता मंत्री पद पर बने रहते थे।

उन्होंने डॉ. राममनोहर लोहिया की जयंती के संदर्भ में अखिलेश यादव के बयानों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि विपक्षी नेता महापुरुषों की बातें तो करते हैं, लेकिन उनकी शिक्षाओं से सीख नहीं लेते। उनके मुताबिक, जनता नेताओं की कथनी और करनी के अंतर को देख रही है और 2027 के विधानसभा चुनाव में इसका जवाब देगी।

2027 के चुनाव से पहले तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी

भाजपा और उसके सहयोगी दलों के नेताओं के इन बयानों में परिवारवाद, PDA, महिला सुरक्षा, महापुरुषों का सम्मान, लोहिया की विचारधारा और चुनाव आयोग की निष्पक्षता जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव को अयोध्या और जहूराबाद का उल्लेख कर चुनौती दी, जबकि अन्य भाजपा नेताओं ने सपा की राजनीतिक विचारधारा और उसके शासनकाल को लेकर सवाल उठाए।

सत्तापक्ष के नेताओं ने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में जनता राजनीतिक दलों के कामकाज, नीतियों और व्यवहार के आधार पर फैसला करेगी। वहीं, चुनाव आयोग, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दे प्रदेश की राजनीति में बहस के केंद्र में बने हुए हैं।

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