
अयोध्या से 2027 तक अखिलेश पर बरसे भाजपा के दिग्गज, राम मंदिर और वोट बैंक पर जमकर हमला
अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने सपा पर सनातन संस्कृति से दूरी और वोट बैंक की राजनीति का आरोप लगाया। ओपी राजभर ने अखिलेश यादव, शिवपाल यादव और चुनाव आयोग के मुद्दे पर निशाना साधते हुए 2027 में एनडीए की बड़ी जीत का दावा किया। भाजपा MLC सुभाष यदुवंश ने अखिलेश यादव और राहुल गांधी को परिवारवाद की राजनीति से जोड़कर हमला बोला। जानिए नेताओं के सभी प्रमुख बयान और सियासी मायने।
लखनऊ : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे और राम मंदिर दर्शन को लेकर उत्तर प्रदेश की सत्तारूढ़ भाजपा और सहयोगी दल सुभासपा के नेताओं ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, कैबिनेट मंत्री एवं सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर और भाजपा विधान परिषद सदस्य सुभाष यदुवंश ने अलग-अलग बयानों में अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए उन पर तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति करने के आरोप लगाए। नेताओं ने राम मंदिर से लेकर 2027 के विधानसभा चुनाव, चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष के विरोध, अखिलेश-शिवपाल संबंध और राहुल गांधी-अखिलेश यादव की राजनीतिक कार्यशैली तक पर सवाल उठाए।
अयोध्या गए, लेकिन राम मंदिर नहीं गए अखिलेश: ब्रजेश पाठक
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अयोध्या में राम मंदिर दर्शन को लेकर पूछे गए सवाल पर समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि सपा का सनातन संस्कृति से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी तुष्टीकरण और वोट की राजनीति करती है और इसी कारण उसके नेता राम मंदिर जाने से बचते हैं।
ब्रजेश पाठक ने कहा कि समाजवादी पार्टी के नेताओं के हाथ कारसेवकों के खून से रंगे हुए हैं। उनके मुताबिक, ऐसे में सपा नेता राम मंदिर कैसे जा सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव को इस बात का डर है कि यदि वह राम मंदिर जाएंगे तो अल्पसंख्यक मतदाता उनसे नाराज हो सकते हैं। पाठक ने कहा कि समाजवादी पार्टी के लिए यह पूरा विषय आस्था से अधिक वोट की राजनीति से जुड़ा हुआ है।
उपमुख्यमंत्री ने सपा की राजनीतिक सोच पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी को सनातन संस्कृति और धार्मिक आस्था से कोई सरोकार नहीं है और वह केवल चुनावी लाभ को ध्यान में रखकर अपनी राजनीति करती है।
चुनाव आयोग के मुद्दे पर विपक्ष पर भी निशाना
ब्रजेश पाठक ने चुनाव आयोग और एसआईटी से जुड़े विवाद को लेकर विपक्ष पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि विपक्ष जब चुनाव जीतता है तो निर्वाचन आयोग की व्यवस्था उसे अच्छी लगती है, लेकिन चुनाव हारने के बाद वही विपक्ष अपनी खीज निर्वाचन आयोग पर निकालने लगता है।
उन्होंने केरल, तमिलनाडु और हिमाचल प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि इन राज्यों में विपक्ष चुनाव जीता, लेकिन जीत के बाद उसने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल नहीं उठाए। पाठक के मुताबिक, चुनाव परिणाम अपने पक्ष में होने पर आयोग की निष्पक्षता पर सवाल नहीं उठाना और हार के बाद चुनावी प्रक्रिया पर संदेह करना विपक्ष की दोहरी राजनीति को दर्शाता है।
‘2027 में सपा की लुटिया डूबने वाली है’
आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर भी ब्रजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में सपा की स्थिति बेहद खराब होने वाली है और उसकी ‘लुटिया डूबने वाली है।’
पाठक ने आरोप लगाया कि विपक्ष को अपनी आने वाली राजनीतिक स्थिति का अंदाजा हो गया है और इसी वजह से वह चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस तरह के मुद्दों के जरिए अपनी राजनीतिक स्थिति बचाने और भविष्य में हार का ठीकरा चुनावी व्यवस्था पर फोड़ने की तैयारी कर रहा है।
ओम प्रकाश राजभर का अखिलेश पर हमला, बोले- ‘न राम प्यारे हैं, न कृष्ण’
इसी क्रम में योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने भी अखिलेश यादव पर जमकर हमला बोला।
अयोध्या में आयोजित कथा में अखिलेश यादव के जाने और राम मंदिर से जुड़े सवाल पर राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव को न तो राम प्यारे हैं और न ही कृष्ण। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव स्वयं को भगवान कृष्ण का वंशज बताते हैं, लेकिन मथुरा और अयोध्या जाने से बचते हैं।
राजभर ने दावा किया कि अखिलेश यादव को इस बात का डर रहता है कि यदि वह खुलकर राम मंदिर या धार्मिक स्थलों पर जाएंगे तो मुस्लिम मतदाता समाजवादी पार्टी से दूर हो सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा की राजनीति इसी राजनीतिक समीकरण के इर्द-गिर्द घूमती है।
राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव सुबह से दोपहर तक ‘अली-अली’ करते हैं और उसके बाद ‘बजरंगबली’ की बात करने लगते हैं। उन्होंने सपा प्रमुख की राजनीति को ‘माया मिली न राम’ जैसी स्थिति बताया।
‘2027 में 350 सीट जीतेंगे’
ओम प्रकाश राजभर ने 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर एनडीए की जीत का दावा भी किया। उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में एनडीए 350 सीटें जीतने जा रहा है।
राजभर ने सपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक रिश्तों पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव कांग्रेस को ‘चालू पार्टी’ बता चुके हैं, जबकि कांग्रेस की ओर से समाजवादी पार्टी को भाजपा की ‘बी टीम’ बताया जाता रहा है। उनके मुताबिक, 2027 में सपा और कांग्रेस के बीच कोई वास्तविक राजनीतिक लड़ाई नहीं है और एनडीए मजबूत स्थिति में रहेगा।
शिवपाल यादव को लेकर भी अखिलेश पर निशाना
सुभासपा प्रमुख ने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल यादव और अखिलेश यादव के संबंधों को लेकर भी तीखी टिप्पणी की।
राजभर ने कहा कि सपा में शिवपाल यादव की स्थिति ऐसी हो गई है जैसे किसी बैंड पार्टी में झुनझुना बजाने वाले व्यक्ति की होती है, जिसका सुर-ताल से कोई मतलब नहीं होता। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव शिवपाल यादव को पसंद नहीं करते और लगातार उन्हें राजनीतिक रूप से अपमानित करते रहे हैं।
राजभर ने कहा कि शिवपाल यादव को लोहिया ट्रस्ट से हटाए जाने की बात सामने आई है और अब ऐसी स्थिति बन गई है कि उन्हें पार्टी कार्यालय जाने के लिए भी अखिलेश यादव से पूछना पड़ेगा। उन्होंने इसे दोनों के बीच अविश्वास का उदाहरण बताया।
उन्होंने दावा किया कि अखिलेश यादव हमेशा शिवपाल यादव को अपमानित करने का काम करते हैं और दोनों के बीच राजनीतिक दूरी लगातार बनी हुई है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी राजभर का विपक्ष पर हमला
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शन पर भी ओम प्रकाश राजभर ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष को मुख्य चुनाव आयुक्त को धन्यवाद देना चाहिए कि उनके कार्यकाल में निष्पक्ष चुनाव हुए।
राजभर ने कहा कि हालिया चुनावी परिणामों में समाजवादी पार्टी को 37 और कांग्रेस को छह सीटें मिलीं। उन्होंने सवाल किया कि यदि चुनाव में धांधली होती तो विपक्ष को इतनी सीटें कैसे मिलतीं।
उन्होंने 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि यदि चुनाव में चोरी होती तो 2019 में भाजपा 303 सीटें नहीं जीतती और 2024 में भाजपा की सीटें घटकर 240 नहीं आतीं। उनके मुताबिक, चुनाव परिणामों में बदलाव स्वयं इस बात का संकेत है कि जनता अलग-अलग चुनावों में अलग-अलग तरीके से अपना जनादेश देती है।
‘2014 से पहले सिस्टम पर कांग्रेस का कब्जा था तो मोदी प्रधानमंत्री कैसे बने?’
राजभर ने कांग्रेस के पुराने राजनीतिक प्रभाव का हवाला देते हुए विपक्ष से सवाल किया कि यदि 2014 से पहले पूरे देश के सिस्टम पर कांग्रेस का कब्जा था और निर्वाचन आयोग भी उसके प्रभाव में था, तो क्या कांग्रेस ने चुनाव आयोग के साथ मिलकर नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनवा दिया था?
इसी तरह उत्तर प्रदेश की पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी सरकार का जिक्र करते हुए उन्होंने सवाल किया कि यदि 2012 से 2017 तक उत्तर प्रदेश के पूरे सिस्टम पर सपा का कब्जा था, तो क्या अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग से मिलकर योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनवा दिया था?
राजभर ने कहा कि नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ की सरकारों के कामकाज से जनता का विश्वास बढ़ा और लोगों ने राहुल गांधी तथा अखिलेश यादव को पीछे छोड़ दिया। उनके अनुसार, विपक्ष अब इस स्थिति से परेशान होकर प्रदर्शन कर रहा है, ताकि आगामी चुनाव में अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने पर वह जनता के बीच ‘वोट चोरी’ का आरोप लगा सके।
‘सुभासपा एनडीए के साथ’
2027 में सुभासपा भाजपा के साथ रहेगी या किसी अन्य राजनीतिक गठबंधन का हिस्सा बनेगी, इस सवाल पर ओम प्रकाश राजभर ने स्पष्ट कहा कि उनकी पार्टी एनडीए के साथ है।
उन्होंने अखिलेश यादव के पुराने गठबंधनों का उल्लेख करते हुए कहा कि सपा प्रमुख ने भी अलग-अलग समय में बसपा, आरएलडी, कांग्रेस और सुभासपा सहित कई दलों के साथ समझौते किए हैं। राजभर ने कहा कि जब अखिलेश यादव बार-बार राजनीतिक गठबंधन बदलते हैं तो उनसे इस तरह के सवाल क्यों नहीं पूछे जाते।
सपा पर तंज कसते हुए राजभर ने कहा कि समाजवादी पार्टी डूबती हुई नाव है और जिसे डूबना हो, वही उस पार्टी में जाए।
भाजपा MLC सुभाष यदुवंश का अखिलेश-राहुल पर हमला
भाजपा के विधान परिषद सदस्य सुभाष यदुवंश ने भी अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दोनों नेताओं को ‘राजकुमार’ बताते हुए कहा कि दोनों एक-दूसरे को बर्दाश्त नहीं कर सकते।
‘इंडी गठबंधन की बैठक में अखिलेश को बुलाया तक नहीं गया’
दिल्ली में कांग्रेस की ओर से आयोजित इंडी गठबंधन की बैठक का जिक्र करते हुए यदुवंश ने दावा किया कि अखिलेश यादव को बैठक में बुलाया तक नहीं गया।
उन्होंने कहा कि जब अखिलेश यादव लखनऊ लौट आए, तब राहुल गांधी के किसी ‘शिष्य’ का फोन उनके पास आया। यदुवंश ने कुछ दिन पहले दिए गए एक बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें उनके अनुसार अखिलेश यादव के इशारे पर एक सपा सांसद ने कांग्रेस की राजनीतिक हैसियत को लेकर टिप्पणी की थी।
भाजपा MLC ने इसे कांग्रेस और सपा के बीच जारी राजनीतिक खींचतान का उदाहरण बताया।
‘चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुए दोनों राजकुमार’
सुभाष यदुवंश ने अखिलेश यादव और राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए कहा कि दोनों नेता ‘चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुए राजकुमार’ हैं और सत्ता हासिल करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।
उन्होंने दोनों नेताओं की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनमें न तो अनुशासन है, न टीम भावना और न ही आपसी समन्वय। यदुवंश के मुताबिक, दोनों नेता किसी व्यवस्था को प्रभावी ढंग से चलाने की क्षमता नहीं रखते।
‘डेढ़ साल मंच पर पूरा परिवार लड़ता रहा’
अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री कार्यकाल को लेकर भी भाजपा MLC ने हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के ‘युवराज’ को सत्ता मिली तो लंबे समय तक पार्टी और परिवार के भीतर विवाद चलता रहा।
यदुवंश ने आरोप लगाया कि करीब डेढ़ साल तक सपा का पूरा परिवार सार्वजनिक मंचों पर आपसी संघर्ष करता रहा और इस दौरान उत्तर प्रदेश को ‘सिरफुटौव्वल का अड्डा’ बना दिया गया।
उन्होंने इसे परिवार आधारित राजनीति की कमजोरी बताते हुए कहा कि जिस पार्टी के भीतर ही नेतृत्व और अधिकार को लेकर संघर्ष चलता रहे, वह प्रदेश की जनता के हितों के लिए प्रभावी ढंग से काम नहीं कर सकती।
राहुल गांधी पर 2013 के अध्यादेश का हवाला देकर निशाना
सुभाष यदुवंश ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी परिवारवाद और सत्ता की राजनीति को लेकर हमला बोला। उन्होंने 2013 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार द्वारा लाए गए जनप्रतिनिधित्व संशोधन अध्यादेश का जिक्र किया।
गौरतलब है कि उस समय दोषी ठहराए गए सांसदों और विधायकों को तत्काल अयोग्यता से बचाने के उद्देश्य से अध्यादेश लाया गया था। राहुल गांधी ने उस समय एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अध्यादेश को सार्वजनिक रूप से खारिज करते हुए उसे फाड़ दिया था।
इसी घटना का हवाला देते हुए यदुवंश ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था से ऊपर स्वयं को समझते हैं। उन्होंने कहा कि इस घटना से यह संदेश गया कि कांग्रेस नेतृत्व में परिवार और व्यक्ति की राजनीतिक शक्ति को संस्थागत प्रक्रिया से ऊपर रखा जाता है।
‘अखिलेश-राहुल को वोट देना बच्चों का भविष्य बर्बाद करना’
सुभाष यदुवंश ने अखिलेश यादव और राहुल गांधी पर परिवारतंत्र की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसे नेताओं पर भरोसा करना और उन्हें वोट देना अपने बच्चों का भविष्य बर्बाद करने के समान है।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और अखिलेश यादव दोनों ही परिवारतंत्र और राजतंत्र जैसी राजनीतिक सोच में विश्वास करते हैं। यदुवंश ने दावा किया कि जनता अब परिवार आधारित राजनीति से आगे बढ़कर विकास और स्थिर सरकार को प्राथमिकता दे रही है।
राम मंदिर, वोट बैंक से लेकर 2027 तक सियासी टकराव तेज
अखिलेश यादव को लेकर भाजपा और सुभासपा नेताओं के इन बयानों से स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी तापमान बढ़ने लगा है। एक ओर ब्रजेश पाठक ने राम मंदिर और सनातन संस्कृति के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी को घेरा, तो दूसरी ओर ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव की धार्मिक राजनीति, शिवपाल यादव के साथ उनके संबंध, चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष के विरोध और 2027 के गठबंधन पर निशाना साधा।
वहीं भाजपा MLC सुभाष यदुवंश ने अखिलेश यादव और राहुल गांधी को परिवारवाद तथा कथित ‘राजकुमार राजनीति’ से जोड़ते हुए कांग्रेस-सपा के रिश्तों पर सवाल उठाए।
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