जौनपुर के बूथ से राज्यसभा तक पहुंची विद्यासागर सोनकर की सियासी यात्रा, जानिए हर पड़ाव
भाजपा ने वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद विद्यासागर सोनकर को उत्तर प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए प्रत्याशी घोषित किया है। जौनपुर के सुखीपुर से शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर करीब चार दशक का है। 1985 में बूथ अध्यक्ष से शुरुआत करने वाले सोनकर नगर पालिका सदस्य, 1996 में सैदपुर से लोकसभा सांसद, भाजपा जिलाध्यक्ष, प्रदेश महामंत्री और विधान परिषद सदस्य रहे। 2023 में उन्हें विधान परिषद में भाजपा का उपनेता बनाया गया। अब राज्यसभा प्रत्याशी बनाए जाने से उनके राजनीतिक सफर में नया अध्याय जुड़ गया है।
जौनपुर। उत्तर प्रदेश की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी के पुराने संगठनात्मक चेहरों में शामिल विद्यासागर सोनकर का राजनीतिक सफर एक बार फिर चर्चा में है। भाजपा ने 5 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए घोषित अपने आठ प्रत्याशियों में विद्यासागर सोनकर को भी शामिल किया है। जौनपुर के सुखीपुर से शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर बूथ स्तर के संगठन से लेकर लोकसभा, भाजपा के प्रदेश संगठन और उत्तर प्रदेश विधान परिषद तक पहुंचा है। अब राज्यसभा प्रत्याशी बनाए जाने के साथ उनके सार्वजनिक जीवन में एक नया अध्याय जुड़ गया है।
छात्र जीवन में संघ से जुड़ाव, बूथ अध्यक्ष से शुरुआत
विद्यासागर सोनकर का जन्म 21 जुलाई 1961 को जौनपुर जिले के सुखीपुर में हुआ। उत्तर प्रदेश विधान परिषद की आधिकारिक प्रोफाइल में उनके पिता का नाम बिमल चंद्र सोनकर दर्ज है। उन्होंने एमए, बीएड और एलएलबी की शिक्षा प्राप्त की। उनका पेशा अधिवक्ता, कृषक तथा राजनीतिक-सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में दर्ज है।

राजनीतिक जीवन की शुरुआत उन्होंने छात्र जीवन के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़कर की। इसके बाद भाजपा संगठन में बूथ स्तर पर सक्रिय हुए और 1985 में बूथ अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। यह दौर उनके लिए संगठन को जमीनी स्तर पर समझने और कार्यकर्ताओं के बीच अपनी पहचान बनाने का समय था।
सोनकर ने सामाजिक गतिविधियों में भी भागीदारी की। संसदीय जीवनी के अनुसार वे 1986 से 1990 के बीच ‘गीतांजलि’ नामक सामाजिक एवं रचनात्मक संस्था के अध्यक्ष रहे और सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े रहे।
नगर पालिका से सक्रिय चुनावी राजनीति में प्रवेश
संगठन में काम करने के बाद सोनकर ने स्थानीय चुनावी राजनीति का रुख किया। 1989 से 1994 तक वे जौनपुर नगर पालिका परिषद के सदस्य रहे। संसदीय जीवनी में 1994 से उन्हें भाजपा जौनपुर जिला संगठन में सचिव के रूप में भी दर्ज किया गया है।
नगर की राजनीति से आगे बढ़ते हुए उनकी नजर बड़ी चुनावी भूमिका पर गई और वर्ष 1996 उनके राजनीतिक जीवन का निर्णायक मोड़ साबित हुआ।
1996 में लोकसभा पहुंचकर राष्ट्रीय राजनीति में बनाई जगह
1996 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें तत्कालीन सैदपुर (अनुसूचित जाति) संसदीय क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया। चुनाव जीतकर उन्होंने 11वीं लोकसभा में प्रवेश किया। आधिकारिक संसदीय जीवनी के अनुसार सोनकर को इस चुनाव में 1,96,624 मत मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी राज बहादुर को 1,72,255 मत मिले।
सांसद बनने के बाद भी सोनकर का संगठन से जुड़ाव खत्म नहीं हुआ। यही उनकी राजनीतिक यात्रा की एक खास विशेषता रही कि जनप्रतिनिधि की भूमिका के साथ-साथ वे पार्टी संगठन की जिम्मेदारियों में भी सक्रिय रहे।
जिलाध्यक्ष से प्रदेश संगठन तक
वर्ष 2000 में उन्हें भाजपा जौनपुर जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली। इसके बाद उन्होंने भाजपा के अनुसूचित जाति मोर्चे, युवा मोर्चे और काशी तथा गोरखपुर क्षेत्र में संगठन से जुड़ी विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं। संगठन में उनकी सक्रियता धीरे-धीरे प्रदेश स्तर तक पहुंची।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार वर्ष 2000 के आसपास उन्हें काशी प्रांत का सदस्यता प्रमुख भी बनाया गया था। उस समय गोरखपुर क्षेत्र भी काशी प्रांत के संगठनात्मक दायरे में शामिल था। इससे पूर्वांचल में पार्टी संगठन के विस्तार से जुड़ी जिम्मेदारियों में उनकी भूमिका रही।
वर्ष 2015 के बाद उन्हें भाजपा प्रदेश महामंत्री की जिम्मेदारी मिली। 2016 में भी उनके प्रदेश महामंत्री बनाए जाने की खबर प्रकाशित हुई और 2018 में उन्हें दोबारा इस पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। उनके राजनीतिक जीवन में यह वह दौर था जब वे प्रदेश भाजपा संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों में शामिल रहे।
चुनावी उतार-चढ़ाव के बीच संगठन में सक्रियता
सोनकर की राजनीतिक यात्रा केवल चुनावी जीत की कहानी नहीं है। 2009 के लोकसभा चुनाव और 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद पार्टी संगठन में उनकी सक्रियता बनी रही। 2017 के बाद उन्हें उत्तर प्रदेश विधान परिषद का सदस्य बनाया गया।
विधान परिषद में भी उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई। वर्ष 2023 में उन्हें उत्तर प्रदेश विधान परिषद में भाजपा का उपनेता बनाया गया। इस भूमिका ने उनके संसदीय अनुभव को विधान परिषद की जिम्मेदारी से जोड़ा।
इससे पहले लोकसभा सदस्य के रूप में उनका संसदीय अनुभव रहा था और बाद में विधान परिषद सदस्य के रूप में उन्होंने उत्तर प्रदेश की विधायी राजनीति में भूमिका निभाई। इस तरह उनकी राजनीतिक यात्रा में संगठन और विधायी संस्थाओं- दोनों का अनुभव जुड़ता गया।
अब राज्यसभा की ओर
5 अक्टूबर 2026 को भाजपा ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए अपने आठ उम्मीदवारों के नाम घोषित किए। इनमें विद्यासागर सोनकर का नाम भी शामिल है। राज्यसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश की 10 सीटों पर 16 अक्टूबर 2026 को मतदान प्रस्तावित है, जबकि नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर बताई गई है।
राज्यसभा प्रत्याशी बनाए जाने के साथ सोनकर के करीब चार दशक लंबे राजनीतिक सफर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव सामने है। जिस राजनीतिक यात्रा की शुरुआत जौनपुर में बूथ अध्यक्ष के रूप में हुई थी, वह नगर पालिका, लोकसभा, जिला संगठन, प्रदेश महामंत्री और विधान परिषद की जिम्मेदारियों से गुजरते हुए अब संसद के उच्च सदन के चुनाव तक पहुंची है।
विद्यासागर सोनकर की राजनीतिक यात्रा का सबसे स्पष्ट पक्ष उनका संगठनात्मक अनुभव और अलग-अलग स्तरों पर काम करने का लंबा सिलसिला रहा है। जौनपुर की स्थानीय राजनीति से लेकर प्रदेश भाजपा संगठन और विधान परिषद तक उनकी भूमिका बदलती रही, लेकिन पार्टी संगठन से उनका जुड़ाव लगातार बना रहा। अब राज्यसभा प्रत्याशी के रूप में उनका नाम सामने आने से उनके राजनीतिक सफर में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है।
ग्रीन कॉरिडोर की तर्ज पर फैजुल्लागंज से नैमिष तक बनेगा तटबंध: मुख्यमंत्री योगी



