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गंगा केवल नदी नहीं, भारत की संस्कृति और सभ्यता की जीवनधारा : रमेश पोखरियाल ‘निशंक’

वाराणसी में श्रेयन कॉलेज ऑफ फायर एंड सेफ्टी इंजीनियरिंग और अर्पित फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में ‘स्पर्शगंगा अभियान’ आयोजित हुआ। पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने गंगा को स्वच्छ, निर्मल और अविरल बनाए रखने के लिए जनभागीदारी को जरूरी बताया। कार्यक्रम में युवाओं, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की। वक्ताओं ने गंगा में कूड़ा न डालने, स्वच्छता को दैनिक आदत बनाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया।

वाराणसी। गंगा को स्वच्छ, निर्मल एवं अविरल बनाए रखने और समाज में गंगा संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से श्रेयन कॉलेज ऑफ फायर एंड सेफ्टी इंजीनियरिंग, वाराणसी एवं अर्पित फाउंडेशन, देहरादून के संयुक्त तत्वावधान में ‘स्पर्शगंगा अभियान’ का आयोजन किया गया। अभियान के माध्यम से लोगों को गंगा की स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सहभागिता के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम में शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवाओं और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, आस्था, परंपरा और सभ्यता की जीवनधारा है। करोड़ों लोगों की आस्था गंगा से जुड़ी है और इसलिए गंगा की निर्मलता एवं अविरलता बनाए रखना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।

उन्होंने कहा कि गंगा संरक्षण के लिए सरकार द्वारा अनेक स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन इन प्रयासों को सफल बनाने के लिए समाज की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। विशेष रूप से युवाओं को इस अभियान से जोड़ना समय की मांग है। युवा शक्ति जागरूक होकर आगे आएगी तो गंगा संरक्षण का संदेश समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाया जा सकता है।

श्री निशंक ने लोगों से गंगा में किसी भी प्रकार की गंदगी, कूड़ा-कचरा अथवा प्रदूषणकारी सामग्री नहीं डालने की अपील की। उन्होंने कहा कि केवल गंगा तट पर सफाई करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि गंगा में प्रदूषण पहुंचाने वाले स्रोतों को रोकना और लोगों की जीवनशैली में स्वच्छता को शामिल करना भी जरूरी है। उन्होंने उपस्थित लोगों से स्वयं स्वच्छता का पालन करने तथा अपने आसपास के लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।

जनभागीदारी से ही मजबूत होगा गंगा संरक्षण अभियान

कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि डॉ. नम्रता जोशी, सुपरिटेंडेंट, आयुर्वेदिक फार्मेसी, IMS, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी ने कहा कि गंगा की स्वच्छता के लिए जनजागरूकता और जनभागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि गंगा के प्रति हमारी जिम्मेदारी केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे पर्यावरण, स्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जोड़कर भी देखना होगा। उन्होंने कहा कि नदियों और पर्यावरण के संरक्षण के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी भूमिका तय करनी होगी। उन्होंने ऐसे अभियानों को निरंतर जारी रखने और अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ने पर बल दिया।

स्वच्छता को अभियान नहीं, आदत बनाने की जरूरत

विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर राजेश कुमार, एक्टिंग डायरेक्टर एवं डीन, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, BHU, वाराणसी ने कहा कि गंगा की निर्मलता बनाए रखने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। उन्होंने कहा कि स्वच्छता केवल किसी विशेष दिन या अभियान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे दैनिक जीवन की आदत बनाना होगा। उन्होंने कहा कि गंगा संरक्षण के लिए सरकारी संस्थाओं के साथ सामाजिक संगठनों, शिक्षण संस्थानों और युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने गंगा एवं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सामाजिक संगठनों और युवाओं द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

युवाओं को गंगा संरक्षण अभियान से जोड़ना समय की आवश्यकता

अर्पित फाउंडेशन की अध्यक्ष श्रीमती हनी पाठक ने कहा कि गंगा संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक एवं पर्यावरणीय अभियानों में युवाओं की भागीदारी बढ़ाना समय की आवश्यकता है। युवा केवल देश का भविष्य ही नहीं, बल्कि वर्तमान में भी सामाजिक बदलाव के महत्वपूर्ण वाहक हैं। यदि युवा शक्ति जागरूक होकर गंगा और पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आती है तो स्वच्छ एवं निर्मल गंगा का संकल्प निश्चित रूप से और मजबूत होगा।उन्होंने कहा कि गंगा संरक्षण के संदेश को केवल गंगा तट तक सीमित रखने के बजाय विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों और आम जनजीवन तक पहुंचाने की आवश्यकता है। इसके लिए लगातार जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए।

‘स्वच्छ, निर्मल, अविरल मां गंगा’ का लिया संकल्प

अभियान में उपस्थित शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवाओं और अन्य प्रतिभागियों ने ‘स्वच्छ, निर्मल, अविरल मां गंगा’ के संकल्प के साथ गंगा एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। प्रतिभागियों ने लोगों को गंगा में कूड़ा-कचरा न डालने, स्वच्छता बनाए रखने और पर्यावरण संरक्षण के लिए अपने स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि गंगा को स्वच्छ बनाए रखने के लिए केवल सरकारी योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं। जब तक आम नागरिक अपनी जिम्मेदारी को समझकर व्यवहार में बदलाव नहीं लाएंगे, तब तक गंगा संरक्षण का लक्ष्य पूरी तरह हासिल करना चुनौतीपूर्ण रहेगा।

समारोह में रोटरी क्लब इलीट के अध्यक्ष ऋषि देव अग्रवाल, आर्किटेक्ट रोहित गुप्ता एवं पियूष अग्रवाल ने पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ को स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका स्वागत किया। इस अवसर पर प्रख्यात ज्योतिषाचार्य उमंग नाथ शर्मा सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में श्रेयन कॉलेज ऑफ फायर एंड सेफ्टी इंजीनियरिंग, वाराणसी के निदेशक नवल मधेशिया एवं अर्पित फाउंडेशन की अध्यक्ष श्रीमती हनी पाठक की विशेष सहभागिता रही।

आयोजकों ने जताया आभार

कार्यक्रम के अंत में आयोजक एवं श्रेयन कॉलेज ऑफ फायर एंड सेफ्टी इंजीनियरिंग के निदेशक नवल मधेशिया ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों, शिक्षाविदों, सामाजिक संगठनों, कार्यकर्ताओं, युवाओं एवं सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि गंगा हमारी साझा विरासत है और इसके संरक्षण की जिम्मेदारी भी सामूहिक है। उन्होंने उपस्थित लोगों से गंगा स्वच्छता एवं संरक्षण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने और अभियान को निरंतर आगे बढ़ाने का आह्वान किया। ‘स्पर्शगंगा अभियान’ के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि गंगा की स्वच्छता केवल एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी, सांस्कृतिक विरासत और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा विषय है।

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