यूपी में वस्त्र उद्योग को मिल रहा नया विस्तार, 5,354 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मंजूर
उत्तर प्रदेश में वस्त्रोद्योग को नई रफ्तार देने के लिए यूपी टेक्सटाइल कॉन्क्लेव-2026 में 5,354 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मंजूर हुए। लखनऊ-हरदोई के बीच 1,000 एकड़ में पीएम मित्र पार्क विकसित किया जा रहा है। अमरोहा, बिजनौर, संत कबीर नगर, बरेली और बनारस में टेक्सटाइल पार्क के लिए जमीन उपलब्ध है। उद्योग जगत ने यूपी को देश का प्रमुख टेक्सटाइल और टेक्निकल टेक्सटाइल हब बनाने की संभावनाएं जताईं। सरकार निवेश, सब्सिडी, इंफ्रास्ट्रक्चर और कौशल विकास पर जोर दे रही है।
लखनऊ : वस्त्र उद्योग मंत्री राकेश सचान ने कहा कि योगी सरकार की नीतियों और निवेश अनुकूल माहौल से प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ उद्योगों को भी नई गति मिली है। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश से करीब 35 हजार करोड़ रुपये का हस्तशिल्प निर्यात हुआ है, जबकि 2 लाख से अधिक हथकरघा बुनकर इस क्षेत्र से जुड़े हैं और 110 करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात किया जा रहा है। कहा कि यूपी के वस्त्र उत्पादों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है।
5,354 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मंजूर
राकेश सचान ने बताया कि प्रदेश में वस्त्र उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार निवेशकों को प्रोत्साहन दे रही है। आज 5,354 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मंजूर किए गए हैं। वर्ष 2017 और 2022 की वस्त्र उद्योग नीतियों के तहत करीब 116 निवेशकों को 322 करोड़ रुपये का इंसेंटिव दिया गया है। इसके अलावा करीब 96 करोड़ रुपये का इंसेंटिव भी दिया जा चुका है। उन्होंने बताया कि उद्यमियों को कैपिटल सब्सिडी, 100 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी में छूट और 60 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी समेत जमीन आवंटन और बिजली में भी छूट जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मेलों में हिस्सा लेने वाले उद्यमियों को 90 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है।
प्रदेश के 17 उत्पादों को जीआई टैग
मंत्री ने कहा कि गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद का गारमेंट क्षेत्र, कानपुर का होजरी उद्योग, वाराणसी की सिल्क साड़ी, भदोही-मिर्जापुर की कालीन, लखनऊ की चिकनकारी, पिलखुवा के घरेलू वस्त्र, मेरठ के खेल परिधान और फर्रुखाबाद की वस्त्र छपाई प्रदेश की पहचान बन चुके हैं। प्रदेश के 17 उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है। योगी सरकार बुनकरों को डिजाइन, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और डिजिटल मार्केटिंग में मदद दे रही है। वाराणसी में 443 विद्यार्थियों को 84 लाख रुपये की वित्तीय सहायता देकर आगे बढ़ाने का काम किया गया है। इससे पारंपरिक हुनर को आधुनिक बाजार से जोड़ने में मदद मिलेगी।
1 हजार एकड़ में पीएम मित्र पार्क
राकेश सचान ने बताया कि लखनऊ-हरदोई के बीच 1 हजार एकड़ में पीएम मित्र पार्क विकसित किया जा रहा है। इसके लिए योगी सरकार 1,100 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। पार्क में सिक्स लेन सड़क, 125 केवी की विद्युत लाइन और पानी की सप्लाई पहुंच चुकी है। मास्टर डेवलपर भी तय हो गया है।
पांच स्थानों पर टेक्सटाइल पार्क के लिए जमीन
उन्होंने बताया कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में 10 टेक्सटाइल पार्क विकसित करने का लक्ष्य दिया है। इसके तहत अमरोहा, बिजनौर, संत कबीर नगर, बरेली और बनारस में शिल्प पार्क के लिए जमीन उपलब्ध हो चुकी है। करीब 400 एकड़ क्षेत्र में उद्यमियों को निवेश का अवसर मिलेगा और विभाग उन्हें सस्ती दरों पर जमीन उपलब्ध कराएगा। कानपुर समेत अन्य स्थानों पर टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग पार्क के लिए भी जमीन चिन्हित की जा रही है।
उन्होंने कहा कि 2022 की तरह ही 2027 में बनने वाली नई नीति में भी प्रदेश के उद्यमियों के सुझावों को शामिल किया जाएगा। पर्यटन के बढ़ते दायरे और 25 करोड़ की आबादी वाले घरेलू बाजार को देखते हुए वस्त्र एवं ओडीओपी उत्पादों में निवेश की बड़ी संभावनाएं हैं। इसके लिए उद्यमियों को यूपी में बड़े स्तर पर निवेश के लिए आमंत्रित किया।
यूपी में बड़े निवेश के लिए उद्योग जगत उत्साहित: रामी रेड्डी
उत्तर प्रदेश को वस्त्रोद्योग क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने के लिए उद्योग जगत बड़े निवेश को लेकर उत्साहित है। ‘यूपी टेक्सटाइल कॉन्क्लेव-2026’ के उद्घाटन समारोह में पूर्व राज्यसभा सदस्य, उद्योगपति, समाजसेवी तथा रामकी समूह के फाउंडर एवं चेयरमैन अल्ला अयोध्या रामी रेड्डी ने उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए उपलब्ध अनुकूल वातावरण की जमकर सराहना की। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में हो रहे तेज विकास और बेहतर औद्योगिक वातावरण की प्रशंसा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश अब उद्योगों के लिए निवेश और विकास की संभावनाओं वाला महत्वपूर्ण गंतव्य बनकर उभरा है।
रामी रेड्डी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जिस गति से देश आगे बढ़ रहा है, उसी दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उत्तर प्रदेश को नई सोच, अनुशासन और नियंत्रण के साथ आगे ले जा रहे हैं। प्रदेश में अनुशासन, नियंत्रण और सुरक्षा का वातावरण उद्योगपतियों में निवेश का भरोसा पैदा करता है। उद्योगपति अपना पैसा वहीं लगाना चाहते हैं, जहां उन्हें सुरक्षा के साथ स्थिर और भरोसेमंद वातावरण मिले। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य होने के साथ ही संसाधनों से समृद्ध है। प्रदेश में मजबूत राजनीतिक नेतृत्व और सक्षम प्रशासनिक नेतृत्व उद्योग जगत को यह विश्वास दे रहा है कि यहां आकर निवेश किया जा सकता है और कारोबार को आगे बढ़ाया जा सकता है। इससे प्रदेश में बड़े औद्योगिक निवेश की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं।
श्री रेड्डी ने कहा कि वस्त्रोद्योग देश के सबसे पुराने और महत्वपूर्ण उद्योगों में से एक है। देश के विभिन्न हिस्सों में इस क्षेत्र का विकास हो रहा है, लेकिन तमिलनाडु ने वस्त्रोद्योग के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उत्तर प्रदेश को इस क्षेत्र में देश का नंबर एक राज्य बनाने के लिए तमिलनाडु जैसे राज्यों के सफल अनुभवों से सीख लेते हुए अपनी परिस्थितियों के अनुरूप ठोस दृष्टि और कार्ययोजना तैयार करनी होगी। इसके लिए प्रदेश सरकार और उद्योग जगत को मिलकर आगे बढ़ना होगा।
उन्होंने कहा कि लखनऊ के आसपास तथा पूरे प्रदेश में चार-पांच स्थानों पर बनाए जा रहे वस्त्रोद्योग केंद्र और पार्क इस दिशा में महत्वपूर्ण शुरुआत हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि योगी सरकार वस्त्रोद्योग को लेकर गंभीरता से काम कर रही है और इस क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक विकास की तैयारी की जा रही है। राज्य सरकार की ओर से स्थिर वातावरण, बेहतर आधारभूत ढांचा और सस्ती उपयोगी सेवाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन उद्योग जगत के लिए महत्वपूर्ण है। ‘वॉक टु वर्क’ कॉसेप्ट के साथ निजी क्षेत्र की श्रेष्ठ औद्योगिक इकाइयों को इन केंद्रों में लाए जाने स उद्योग व श्रमिक, दोनों को लाभ होगा तथा वस्त्रोद्योग का समग्र विकास तेजी से हो सकेगा।
रामी रेड्डी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के वस्त्रोद्योग क्षेत्र में बड़े निवेश की आवश्यकता है और उद्योग जगत इसके लिए प्रतिबद्ध है। देशभर का उद्योग जगत उत्तर प्रदेश के वस्त्रोद्योग क्षेत्र में होने वाले विकास को लेकर आशान्वित है और इस विकास यात्रा का हिस्सा बनने के लिए उत्सुक है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश न केवल देश बल्कि वस्त्रोद्योग के वैश्विक मानचित्र पर भी अपनी मजबूत पहचान स्थापित करेगा।
भारतीय वस्त्र एवं परिधान उद्योग का बाजार 350 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य: अश्विन चंद्रन
इस अवसर पर प्रीकॉट लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक तथा कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (सीआईटीआई) के उपाध्यक्ष अश्विन चंद्रन ने कहा कि भारतीय वस्त्र एवं परिधान उद्योग एक महत्वपूर्ण बदलाव के दौर में प्रवेश कर रहा है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव के बीच खरीदार अब लागत के साथ गुणवत्ता, प्रौद्योगिकी, स्थिरता, उत्पादकता और समय पर आपूर्ति को भी प्राथमिकता दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भारत के पास कच्चे माल से तैयार उत्पाद तक, पूरी वस्त्र मूल्य श्रृंखला और विशाल घरेलू बाजार मौजूद है। अगले पांच वर्षों में भारतीय वस्त्र एवं परिधान बाजार को मौजूदा करीब 180 अरब डॉलर से बढ़ाकर लगभग 350 अरब डॉलर और निर्यात को करीब 37 अरब डॉलर से बढ़ाकर 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य है। इसके लिए बड़े पैमाने पर विस्तार, एकीकृत औद्योगिक तंत्र, तकनीकी उन्नयन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रोबोटिक्स का उपयोग बढ़ाना होगा।
चंद्रन ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास युवा कार्यबल, मजबूत एमएसएमई आधार, वस्त्र एवं परिधान समूह, हथकरघा-हस्तशिल्प की समृद्ध परंपरा और विशाल घरेलू बाजार है। प्रदेश तकनीकी वस्त्र, टिकाऊ एवं रीसाइकिल्ड उत्पाद तथा उच्च मूल्य वाले घरेलू वस्त्रों के क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभा सकता है। उद्योग के विस्तार के लिए स्थिर नीतियां, तैयार आधारभूत ढांचा, प्रतिस्पर्धी दरों पर बिजली-पानी, बेहतर परिवहन, कुशल मानव संसाधन और त्वरित स्वीकृतियां आवश्यक हैं। वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए गुणवत्ता, उत्पादकता, स्थिरता, आपूर्ति की निगरानी और अनुपालन पर भी विशेष ध्यान देना होगा।
उन्होंने उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन की विभिन्न पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि सीआईटीआई भारत सरकार के साथ समर्थ योजना के तहत वस्त्र क्षेत्र में कौशल विकास पर काम कर रहा है। इसी अनुभव के आधार पर संगठन उत्तर प्रदेश सरकार के साथ मिलकर मौजूदा औद्योगिक समूहों और नई निवेश परियोजनाओं के लिए भविष्य की जरूरतों के अनुरूप कुशल कार्यबल तैयार करने में सहयोग करने को तैयार है।
उत्तर प्रदेश बनेगा टेक्सटाइल व टेक्निकल टेक्सटाइल क्षेत्र का प्रमुख केंद्र
उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख टेक्सटाइल और टेक्निकल टेक्सटाइल केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में यूपी टेक्सटाइल कॉन्क्लेव-2026 को महत्वपूर्ण पहल बताते हुए उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों ने राज्य में निवेश, आधुनिक तकनीक, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। वक्ताओं ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास मजबूत औद्योगिक आधार, युवा कार्यबल, समृद्ध पारंपरिक टेक्सटाइल विरासत और विशाल बाजार है, जिसका लाभ उठाकर प्रदेश वैश्विक टेक्सटाइल आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
टेक्निकल टेक्सटाइल का प्रमुख केंद्र बन सकता है यूपी: मनोज गुप्ता
एमकेयू लिमिटेड के अध्यक्ष एवं रक्षा-सुरक्षा क्षेत्र के प्रमुख उद्योगपति मनोज गुप्ता ने कहा कि उत्तर प्रदेश रक्षा क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले टेक्निकल टेक्सटाइल और उच्च क्षमता वाले पदार्थों के उत्पादन का प्रमुख केंद्र बन सकता है। उन्होंने लखनऊ-हरदोई में स्थापित किए जा रहे पीएम मित्र मेगा टेक्सटाइल पार्क को प्रदेश को देश के प्रमुख वस्त्र विनिर्माण राज्यों में शामिल करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।
उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले कई रणनीतिक मटीरियल के लिए भारत अभी काफी हद तक आयात पर निर्भर है। उनके समूह ने कानपुर डिफेंस कॉरिडोर में करीब तीन हेक्टेयर में आधुनिक मटीरियल एवं साइंसेज की अत्याधुनिक विनिर्माण इकाई स्थापित की है, जहां पॉली-एथलीन आधारित उच्च क्षमता वाले फैब्रिक का उत्पादन होता है, जिसका उपयोग बुलेट प्रूफ जैकेट और हेलमेट में किया जाता है। उत्तर प्रदेश में हाई परफॉर्मेंस फाइबर से लेकर तैयार उत्पाद तक पूरा ईकोसिस्टम विकसित कर आत्मनिर्भर भारत को मजबूती दी जा सकती है। ऐसे रणनीतिक मटीरियल का देश में उत्पादन बढ़ने से रक्षा क्षेत्र की आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ विदेशी निर्भरता भी कम होगी। इससे प्रदेश में नई औद्योगिक इकाइयों, निवेश और रोजगार के अवसरों का भी विस्तार होगा।
टेक्सटाइल सेक्टर में मिल सकती हैं नई ऊंचाइयां: रवि सैम
टेक्सप्रोसिल के वाइस चेयरमैन एवं साउथ इंडिया टेक्सटाइल रिसर्च एसोसिएशन के चेयरमैन रवि सैम ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद दुनिया की निगाहें भारत पर हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की वैश्विक साख मजबूत हुई है और विभिन्न देशों के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों से भारतीय टेक्सटाइल उद्योग के लिए नए अवसर पैदा हुए हैं। उत्तर प्रदेश का टेक्सटाइल निर्यात लगातार बढ़ रहा है और प्रदेश में इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं हैं। कौशल विकास, क्षमता विस्तार, सस्टेनेबिलिटी, ट्रेसेबिलिटी और समयबद्ध आपूर्ति पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि टेक्सटाइल प्रोसेसिंग में आधुनिक और विश्वस्तरीय सुविधाएं विकसित कर उत्तर प्रदेश वैश्विक गुणवत्ता मानकों को पूरा कर सकता है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास भगवान श्रीराम, श्रीकृष्ण, बाबा विश्वनाथ और मां विंध्यवासिनी का आशीर्वाद है। इसके साथ ही बनारसी वस्त्र, मिर्जापुर और भदोही के कालीन जैसे उत्पादों की वैश्विक पहचान प्रदेश की समृद्ध टेक्सटाइल विरासत को दर्शाती है। इन पारंपरिक ताकतों को आधुनिक तकनीक, निवेश और बेहतर प्रसंस्करण सुविधाओं से जोड़कर उत्तर प्रदेश टेक्सटाइल क्षेत्र में नई ऊंचाइयां हासिल कर सकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि सही रणनीति और विश्वस्तरीय आधारभूत सुविधाओं के साथ उत्तर प्रदेश देश का अग्रणी टेक्सटाइल हब बन सकता है।
टेक्सटाइल मशीनरी में आत्मनिर्भरता से मजबूत होगा ‘मेक इन इंडिया’ अभियान: केतन संघवी
आईटीएमई सोसायटी एवं लक्ष्मी शटललेस लूम्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक केतन संघवी ने कहा कि टेक्सटाइल मशीनरी निर्माण के क्षेत्र में भारत में अभी बड़ी संभावनाएं हैं। उन्होंने कानपुर के आसपास लगभग 1000 एकड़ में विशेष टेक्सटाइल मशीनरी पार्क विकसित करने की उत्तर प्रदेश सरकार की योजना को सराहनीय बताते हुए कहा कि कुछ क्षेत्रों में मशीनरी के लिए भारत की आयात निर्भरता 80 से 90 प्रतिशत तक है। स्थानीय निर्माण से आयात घटेगा, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में टेक्सटाइल मशीनरी निर्माण का मजबूत आधार विकसित होने से प्रदेश में मशीनरी से जुड़े सहायक उद्योगों और नए निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे टेक्सटाइल उद्योग को आवश्यक मशीनरी स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराने के साथ उत्पादन लागत और आपूर्ति में लगने वाला समय कम किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए आईटीएमई सोसायटी दिसंबर में ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो मार्ट में 4 से 9 दिसंबर तक अंतरराष्ट्रीय टेक्सटाइल मशीनरी प्रदर्शनी आयोजित करेगी, जिसमें करीब 40 देशों की कंपनियां और 3500 से अधिक मशीनों का प्रदर्शन किया जाएगा। यह आयोजन नई तकनीकों, निवेश और वैश्विक सहयोग के लिए महत्वपूर्ण मंच साबित होगा।
योजनाओं की जानकारी से लेकर निवेश तक, अधिकारियों का सहयोग: उद्यमी
उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास की तस्वीर तेजी से बदली है। बेहतर कानून-व्यवस्था, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, निर्बाध बिजली आपूर्ति, बेहतर सड़क और कनेक्टिविटी के साथ उद्योगों को मिल रही सरकारी सुविधाओं ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। मंगलवार को लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में शुरू हुए दो दिवसीय यूपी टेक्सटाइल कॉन्क्लेव-2026 में उद्योगपतियों ने प्रदेश में बदले कारोबारी माहौल की खुलकर सराहना की।
योजनाओं की जानकारी से लेकर निवेश तक, अधिकारियों का सहयोग
बरेली के राम कुमार एग्रो के राहुल अग्रवाल ने कहा कि अधिकारियों की ओर से उद्योगपतियों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के साथ लगातार मार्गदर्शन और सहयोग किया जा रहा है। प्रदेश में नई इंडस्ट्री स्थापित हो रही हैं और कारोबारी अब निडर होकर निवेश करने का माहौल महसूस कर रहे हैं। उनकी फैक्ट्री में करीब 500 लोगों को रोजगार मिलने की जानकारी देते हुए उन्होंने बिजली आपूर्ति, सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार को उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण बताया।
सब्सिडी और सरकारी सहायता से विस्तार को मिला प्रोत्साहन
गाजियाबाद की एफको एक्सपोर्ट्स की आरुषि सिंघल ने कहा कि 2017 के बाद प्रदेश में हर क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। सरकारी सहयोग से उद्योगों को विस्तार का प्रोत्साहन मिल रहा है। उनकी इंडस्ट्री में करीब 800 लोग कार्यरत हैं और आने वाले समय में रोजगार बढ़ाने की योजना है। उन्होंने टीयूएफ योजना के तहत करीब 25 प्रतिशत सरकारी सहायता और एक्सपोर्ट लाइसेंस सहित अन्य सब्सिडी का भी उल्लेख किया।
टेक्सटाइल नीति ने निवेशकों को दिया मजबूत आधार
टांडा स्थित पार्थ थ्रेड प्राइवेट लिमिटेड के अम्बिका प्रसाद पांडे ने टेक्सटाइल सेक्टर के लिए लागू नीतियों की सराहना की। उन्होंने बताया कि कंपनी को 35 प्रतिशत तक कैपिटल सब्सिडी और 60 प्रतिशत तक ब्याज सब्सिडी का लाभ मिला है। करीब 150 करोड़ रुपये के निवेश और कई हजार लोगों को रोजगार देने की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण योजनाओं के माध्यम से उद्योगों को कुशल कारीगर भी उपलब्ध हो रहे हैं।
कानून-व्यवस्था और कनेक्टिविटी बनी निवेश की बड़ी ताकत
रामपुर के जीएसएल स्पिनर्स के के.के. जैन ने कहा कि सीएम योगी के मार्गदर्शन में यूपी में बदलाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। बेहतर कानून-व्यवस्था, लगातार बिजली, सिंगल पोर्टल से अप्रूवल और मजबूत परिवहन व्यवस्था ने उद्योग स्थापित करना आसान बनाया है। कंपनी करीब 250 करोड़ रुपये का निवेश कर चुकी है और लगभग 700 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है। किसी भी निवेशक के लिए कानून-व्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण होती है और इस दिशा में प्रदेश में काफी सुधार हुआ है। योगी सरकार की औद्योगिक नीतियां केवल निवेश आकर्षित करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उद्योगों के विस्तार, रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
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