
नेपाल में कुदरत का कहर: भोटेकोशी की बाढ़ में 95 की मौत, 484 लापता; 133 भारतीयों की तलाश
नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। अब तक 95 शव बरामद किए गए हैं, जबकि सैकड़ों पर्यटकों, यात्रियों और स्थानीय लोगों के लापता होने की सूचना है। लापता लोगों में बड़ी संख्या भारतीय नागरिकों की बताई जा रही है। नेपाल सेना और सुरक्षा बल राहत-बचाव अभियान में जुटे हैं। भारत ने अपने नागरिकों की सहायता के लिए दूतावास स्तर पर प्रयास तेज किए हैं। बिहार और उत्तर प्रदेश में भी प्रशासन ने सतर्कता बढ़ाई है।
काठमांडू : तिब्बत सीमा से लगे नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार सुबह भोटेकोशी नदी में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने व्यापक तबाही मचा दी। नेपाल में अब तक 95 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि सैकड़ों पर्यटकों, तीर्थयात्रियों, स्थानीय लोगों, सुरक्षाकर्मियों और अन्य लोगों के लापता होने की खबर है। लापता पर्यटकों और यात्रियों का आंकड़ा दिनभर में लगातार बढ़ा है। नेपाल पर्यटन बोर्ड की शुरुआती सूची में 384 यात्रियों के लापता होने की जानकारी थी, जबकि बाद के अपडेट में यह संख्या 484 पर्यटकों तक पहुंचने की रिपोर्ट है।
सबसे बड़ी चिंता भारतीय तीर्थयात्रियों को लेकर है। शुरुआती पर्यटन बोर्ड सूची में 105 भारतीयों के लापता होने की बात कही गई थी, जबकि बाद में सामने आए अधिकारियों के आंकड़ों में 133 भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी दी गई है। इनमें बड़ी संख्या उन यात्रियों की है जो कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए तिब्बत की ओर जा रहे थे। स्थिति लगातार बदल रही है। लापता लोगों की संख्या और मृतकों की पहचान को लेकर राहत-बचाव अभियान के साथ आंकड़ों में बदलाव संभव है।
सात जिलों में मिले 95 शव
नेपाल पुलिस के ताजा आंकड़ों के अनुसार रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा, चितवन, तनहुं और नवलपरासी पूर्व में कुल 95 शव बरामद किए गए हैं। इनमें 27 महिलाएं, 37 पुरुष, छह बच्चियां, पांच बच्चे और 20 अज्ञात शव शामिल हैं। सबसे अधिक 33 शव चितवन में तथा 18 धादिंग में बरामद किए गए हैं। बाढ़ में घायल 63 लोगों को सुरक्षित निकालकर विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। राहत और बचाव दल लगातार मलबे और नदी किनारे के इलाकों में तलाशी अभियान चला रहे हैं।
सुरक्षाकर्मी भी लापता
आपदा में नेपाल के सुरक्षा बलों को भी भारी नुकसान हुआ है। नेपाल पुलिस के दर्जनों जवानों के संपर्क में नहीं होने की जानकारी सामने आई है। बाद के सरकारी आंकड़ों में नेपाल सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के 85 कर्मियों के लापता होने की रिपोर्ट दी गई है। रसुवा के तिमुरे, रसुवागढ़ी, स्याफ्रुबेसी, मेलुंग और अन्य इलाकों में तैनात सुरक्षाकर्मियों से संपर्क टूट गया है। बाढ़ के कारण सीमा क्षेत्र में राहत एवं बचाव कार्य भी बेहद कठिन हो गया है।
भोटेकोशी के साथ त्रिशूली नदी भी उफनी
बाढ़ का सबसे भीषण प्रभाव रसुवा के तिमुरे और स्याफ्रुबेसी क्षेत्र में देखा गया। इसके बाद पानी और मलबा भोटेकोशी तथा त्रिशूली नदी के रास्ते निचले इलाकों तक पहुंचा। नुवाकोट, धादिंग, गोरखा और चितवन समेत कई क्षेत्रों में बस्तियां, सड़कें, पुल और बिजली परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। अधिकारियों ने भोटेकोशी, त्रिशूली और नारायणी नदी के किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। बाढ़ ने नेपाल-चीन सीमा को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण व्यापार और यातायात मार्ग को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। कई पुल और सड़कें मलबे में दब गई हैं। कई जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचने की सूचना है।
अचानक आया सैलाब, वजह पर जांच जारी
बाढ़ बुधवार सुबह करीब 8:30 से 9 बजे के बीच अचानक आई। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार पानी तिब्बत की ओर से तेजी से नेपाल की तरफ आया। शुरुआत में ग्लेशियर झील फटने की आशंका जताई गई, लेकिन बाद की वैज्ञानिक रिपोर्टों में ग्लेशियर से बर्फ और चट्टानों के अचानक खिसकने से नदी का मार्ग अवरुद्ध होने और फिर पानी के तेज दबाव से अचानक बहाव बढ़ने की संभावना सामने आई है।
अंतरराष्ट्रीय पर्वतीय पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार ल्हेन्दे खोला, जो भोटेकोशी की सहायक नदी है, में असाधारण तेजी से जलस्तर बढ़ा। त्रिशूली नदी का जलस्तर भी कुछ समय में कई मीटर बढ़ गया। हालांकि आपदा के सटीक कारण और घटनाक्रम की विस्तृत जांच अभी जारी है।
14 हेलीकॉप्टर राहत-बचाव में जुटे
नेपाल सेना, नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल और स्थानीय प्रशासन ने बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया है। नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार सेना और निजी क्षेत्र के 14 हेलीकॉप्टर बचाव, राहत और मेडिकल इवैक्यूएशन में लगाए गए हैं। ड्रोन और प्रशिक्षित खोजी दलों की मदद से भी लापता लोगों की तलाश की जा रही है।
नेपाल पर्यटन बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि लापता यात्रियों के आंकड़े अभी प्रारंभिक और सत्यापनाधीन हैं। ट्रैवल एजेंसियों, गाइडों, स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के साथ सूचनाओं का मिलान किया जा रहा है। इसलिए लापता लोगों की संख्या आगे और बदल सकती है।
भारत ने मदद का भरोसा दिया
नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों को लेकर भारत सरकार भी सक्रिय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से बातचीत कर आपदा पर संवेदना जताई और हर संभव मानवीय एवं राहत सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है। भारतीय अधिकारियों द्वारा नेपाली पक्ष के साथ लापता भारतीय नागरिकों की जानकारी और बचाव प्रयासों के समन्वय की कोशिश की जा रही है।
भारतीय दूतावास ने आपातकालीन नम्बर जारी किये
नेपाल में भारतीय दूतावास ने वहां अचानक आयी बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों की सहायता और उनके बारे में जानकारी हासिल करने के लिए आपातकालीन नंबर जारी किये हैं।दूतावास ने कहा है कि बाढ के कारण फंसे भारतीय नागरिकों के बारे में जानकारी के लिए 977 985 131 6807 और 977 970 910 7500 नम्बरों पर संपर्क किया जा सकता है। इन दोनों नम्बरों पर व्हाट्सऐप के माध्यम से भी संपर्क किया जा सकता है।इस बीच दूतावास अचानक आयी बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों के शीघ्र बचाव और राहत के लिए नेपाल सरकार के संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है। नेपाल सरकार के समन्वय में बचाव और राहत प्रयासों को लगातार मजबूत किया जा रहा है।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से फोन पर बात कर हर संभव मानवीय सहायता का आश्वासन दिया है।
बिहार बाढ़ आशंका : शाह ने सम्राट चौधरी से बात कर मदद का आश्वासन दिया
केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नेपाल में मूसलाधार बारिश और ग्लेशियर फटने से बिहार में बाढ़ के खतरे को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से फोन पर बात कर केन्द्र की तरफ से हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि श्री शाह ने श्री चौधरी से फोन पर बात कर संभावित संकट से निपटने के लिए राज्य सरकार को केन्द्र की तरफ से हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।गृह मंत्री ने राज्य सरकार को बताया कि किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल को तैयार किया जा रहा है।
नेपाल में फंसे उत्तर प्रदेश के नागरिकों की मदद के लिए 1070 हेल्पलाइन जारी
नेपाल में आई भीषण बाढ़ और प्राकृतिक आपदा के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने वहां फंसे प्रदेश के नागरिकों की मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर 1070 जारी कर दिया है। उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक अगर कोई यूपी का नागरिक नेपाल में फंसा है या उसे किसी प्रकार की सहायता की आवश्यकता है, तो उसके परिजन तत्काल 1070 पर संपर्क कर सकते हैं। प्रदेश सरकार ने नागरिकों की सुरक्षित वापसी और उन्हें तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के लिए दूतावास स्तर पर भी संपर्क शुरू कर दिया है।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर राहत आयुक्त कार्यालय ने भारतीय और नेपाल दूतावासों से संपर्क किया है। दोनों दूतावासों से कहा गया है कि नेपाल में फंसे उत्तर प्रदेश के नागरिकों की जानकारी मिलने पर उसे तत्काल यूपी के राहत आयुक्त कार्यालय के साथ साझा किया जाए। इससे संबंधित व्यक्ति तक जल्द से जल्द आवश्यक मदद पहुंचाई जा सकेगी। लोगों से अपील की है कि नेपाल में फंसे अपने परिजनों की सूचना बिना देरी किए हेल्पलाइन नंबर 1070 पर दें।
सीमावर्ती जिलों में बढ़ाई गई सतर्कता
नेपाल के रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ को देखते हुए यूपी के सीमावर्ती महाराजगंज और कुशीनगर में सतर्कता बढ़ा दी गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेपाल में हुई क्षति को चिंताजनक बताते हुए दोनों जिलों के प्रशासन को जरूरी तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। गंडक और नारायणी नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखने को कहा गया है। मुख्यमंत्री ने सभी के सकुशल रहने की प्रार्थना की है।
मुख्यमंत्री योगी ने भगवान पशुपतिनाथ से सभी के सकुशल रहने की प्रार्थना की
नेपाल के रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ को देखते हुए उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती महाराजगंज और कुशीनगर जिलों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेपाल में भीषण बाढ़ से हुई क्षति को अत्यंत चिंताजनक बताते हुए महाराजगंज और कुशीनगर में स्थानीय प्रशासन को सभी जरूरी तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
नेपाल में बाढ़ के प्रभाव से महाराजगंज और कुशीनगर में गंडक एवं नारायणी नदियों का जलस्तर बढ़ने की आशंका है। इसे लेकर मुख्यमंत्री ने स्थानीय प्रशासन को नदियों के जलस्तर पर नजर रखते हुए पूरी सतर्कता बरतने को कहा है। उन्होंने कहा है कि नेपाल में आई बाढ़ से हुई क्षति अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने भगवान पशुपतिनाथ से सभी के सकुशल रहने की प्रार्थना की है।(वार्ता)
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