Varanasi

काशी कुष्ठ आश्रम पहुंची संकल्प संस्था, बांटी खुशियां

वाराणसी के सारनाथ स्थित काशी कुष्ठ सेवा आश्रम में संकल्प संस्था ने स्वतंत्रता दिवस सेवा और अपनत्व के साथ मनाया। ‘हर घर तिरंगा’ अभियान की भावना से जुड़े कार्यक्रम में आश्रमवासियों को फल, नमकीन और खाद्य सामग्री वितरित की गई। संस्था के सदस्यों ने आत्मीय संवाद कर स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं और सेवा, सम्मान एवं सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश दिया।

वाराणसी। स्वतंत्रता दिवस केवल राष्ट्रीय ध्वज फहराने और देशभक्ति के नारों तक सीमित रहने का पर्व नहीं, बल्कि यह उन मूल्यों को आत्मसात करने का अवसर भी है, जिनके लिए देश के स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना जीवन समर्पित कर दिया। इसी भावना को साकार करते हुए संकल्प संस्था ने इस स्वतंत्रता दिवस पर समाज के जरूरतमंद, वंचित और उपेक्षित वर्ग के बीच पहुंचकर सेवा, सम्मान और अपनत्व का संदेश दिया।

माननीय प्रधानमंत्री एवं वाराणसी के सांसद नरेंद्र मोदी के ‘हर घर तिरंगा’ अभियान की भावना को आगे बढ़ाते हुए संस्था के सदस्यों ने सारनाथ स्थित काशी कुष्ठ सेवा आश्रम में स्वतंत्रता दिवस का पर्व आश्रमवासियों के साथ आत्मीयता और संवेदनशीलता के वातावरण में मनाया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल खाद्य सामग्री का वितरण करना नहीं, बल्कि उन लोगों के साथ राष्ट्रीय पर्व की खुशियां साझा करना था, जिन्हें समाज के मुख्य प्रवाह में अक्सर अपेक्षित स्थान नहीं मिल पाता।

इस अवसर पर आश्रम में रहने वाले लोगों के बीच फल, नमकीन सहित विभिन्न खाद्य सामग्री का वितरण किया गया। संस्था के सदस्यों ने आश्रमवासियों से आत्मीय संवाद किया, उनका हालचाल जाना और उन्हें स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान सेवा के साथ मानवीय संवेदना का ऐसा भाव देखने को मिला, जिसने स्वतंत्रता दिवस के आयोजन को महज एक औपचारिक कार्यक्रम के बजाय मानवीय सरोकार से जोड़ दिया।

आजादी का उत्सव तभी सार्थक, जब खुशियां सबके साथ बांटी जाएं

कार्यक्रम के दौरान संकल्प संस्था के संरक्षक अनिल कुमार जैन ने कहा कि भारत की स्वतंत्रता अनगिनत स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के त्याग, तपस्या, संघर्ष और बलिदान का परिणाम है। देश को आजाद कराने के लिए अनेक वीरों ने अपने सुख-सुविधाओं का त्याग किया और राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। इसलिए स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव मनाने का दिन नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को याद करने और अपने सामाजिक दायित्व को समझने का अवसर भी है।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों ने जिस भारत का सपना देखा था, उसमें समाज का कोई भी व्यक्ति उपेक्षित या अकेला न रहे। जरूरतमंदों की सहायता करना, वंचित लोगों के जीवन में सम्मान और खुशियां लाना तथा समाज के प्रत्येक वर्ग को अपनत्व का अनुभव कराना ही राष्ट्रनिर्माण की वास्तविक भावना है।

अनिल कुमार जैन ने कहा कि प्रधानमंत्री एवं वाराणसी के सांसद नरेंद्र मोदी का ‘हर घर तिरंगा’ अभियान राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान, राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति की भावना को जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण प्रयास है। तिरंगा केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि देश की स्वतंत्रता, लोकतंत्र, त्याग और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। ऐसे में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर तिरंगे की भावना को सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ना भी सच्ची देशभक्ति का हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि “जब राष्ट्रीय पर्व की खुशियां उन लोगों तक पहुंचती हैं, जो समाज के किसी कारणवश पीछे छूट गए हैं, तब स्वतंत्रता दिवस का उत्सव और अधिक सार्थक हो जाता है।” जरूरतमंदों के बीच जाकर उनके साथ समय बिताना, उनसे संवाद करना और उन्हें यह महसूस कराना कि वे समाज का अभिन्न हिस्सा हैं-यही सेवा का वास्तविक उद्देश्य है।

सेवा में केवल सामग्री नहीं, सम्मान और संवेदना भी जरूरी

संकल्प संस्था के सदस्यों ने कहा कि किसी जरूरतमंद को भोजन या सामग्री उपलब्ध कराना निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है उसके साथ सम्मान और आत्मीयता का व्यवहार करना। काशी कुष्ठ सेवा आश्रम में आयोजित कार्यक्रम में इसी मानवीय सोच को प्राथमिकता दी गई।

आश्रमवासियों के साथ संवाद के दौरान संस्था के सदस्यों ने उनके अनुभव सुने और उनके साथ समय बिताया। इस आत्मीय संवाद ने कार्यक्रम को भावनात्मक रूप से और अधिक विशेष बना दिया। सेवा के इस प्रयास में यह संदेश भी निहित रहा कि समाज में किसी व्यक्ति की परिस्थितियां चाहे जैसी हों, उसके सम्मान और गरिमा में कोई कमी नहीं होनी चाहिए।

स्वतंत्रता सेनानियों के आदर्शों को जीवन में उतारने का संकल्प

कार्यक्रम में यह भावना भी व्यक्त की गई कि स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि केवल उन्हें स्मरण करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उनके त्याग, अनुशासन, राष्ट्रप्रेम और सेवा भावना को अपने जीवन में उतारना ही उनके प्रति वास्तविक सम्मान है।

आज जब देश स्वतंत्रता की भावना के साथ विकास की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है, ऐसे समय में सामाजिक एकता, सहयोग, सेवा और संवेदना को मजबूत करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। समाज के कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशील होकर उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास राष्ट्रनिर्माण में महत्वपूर्ण योगदान है।

सदस्यों की रही सक्रिय सहभागिता

काशी कुष्ठ सेवा आश्रम में आयोजित इस सेवा कार्यक्रम में श्रीमती गीता जैन, आलोक कुमार राय, सुशांत श्रीवास्तव, प्रमोद, अमित सहित संकल्प संस्था के अन्य सदस्य प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। सभी सदस्यों ने सेवा कार्य में सक्रिय सहभागिता की और आश्रमवासियों के साथ स्वतंत्रता दिवस की खुशियां साझा कीं।

कार्यक्रम के दौरान वातावरण में राष्ट्रप्रेम, सेवा और मानवीय संवेदना का भाव दिखाई दिया। संस्था के सदस्यों ने कहा कि आने वाले समय में भी समाज के जरूरतमंद और वंचित वर्ग के बीच सेवा कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।

काशी की धरती पर स्वतंत्रता दिवस के इस आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि देशभक्ति केवल शब्दों और नारों में नहीं, बल्कि जरूरतमंद के चेहरे पर मुस्कान लाने, उसके साथ खड़े होने और उसे सम्मान देने में भी दिखाई देती है। जब तिरंगे की आन, स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान और सेवा की भावना एक साथ जुड़ती है, तभी स्वतंत्रता दिवस का उत्सव वास्तव में जन-जन का उत्सव बनता है।

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