मतदाता सूची पुनरीक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर, विपक्ष पर भाजपा का बड़ा हमला
उच्चतम न्यायालय ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को वैध ठहराते हुए चुनाव आयोग के अधिकारों को बरकरार रखा है। अदालत ने कहा कि निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनावों के लिए मतदाता सूची की शुद्धता आवश्यक है। फैसले के बाद भाजपा ने कांग्रेस और इंडिया गठबंधन पर तीखा हमला बोला। भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने इसे विपक्ष की राजनीतिक, नैतिक और संवैधानिक हार बताया तथा कहा कि अदालत ने भ्रम फैलाने वालों को करारा जवाब दिया है।
नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने चुनाव आयोग की ओर से किये गये मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की वैधता को बरकरार रखते हुए बुधवार को कहा कि यह प्रक्रिया स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिए जरूरी है।शीर्ष अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 तथा उसके तहत बनाए गये नियमों के अनुसार आयोग को एसआईआर कराने का अधिकार प्राप्त है।मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने उन याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाया, जिनमें निर्वाचन आयोग द्वारा पिछले वर्ष जून में बिहार में एसआईआर कराने संबंधी जारी अधिसूचना को चुनौती दी गई थी।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत द्वारा सुनाए गये फैसले में कहा गया कि जब कानून स्वयं चुनाव आयोग को किसी भी समय विशेष पुनरीक्षण कराने का अधिकार देता है, तो केवल इस आधार पर इस प्रक्रिया को अवैध नहीं ठहराया जा सकता कि यह नियमित पुनरीक्षण की सामान्य प्रक्रिया के प्रत्येक पहलू का पूरी तरह पालन नहीं करती।उच्चतम न्यायालय ने कहा, “हमारी सुविचारित राय में यह विवादित एसआईआर ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम’ और उसके नियमों की जगह नहीं लेता है, बल्कि, यह धारा 21(3) द्वारा निर्धारित सटीक कानूनी सीमाओं के भीतर अनुच्छेद 324 के तहत दिए गए संवैधानिक आदेश में नयी जान डालता है। इसलिए, यह नहीं कहा जा सकता कि आयोग ने अपनी कानूनी शक्तियों से बढ़कर कोई कार्य किया है।
”शीर्ष अदालत ने कहा कि एसआईआर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की संवैधानिक आवश्यकता को आगे बढ़ाता है। न्यायालय के अनुसार, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव केवल मतदान की प्रक्रिया तक सीमित नहीं हैं। वे मूल रूप से मतदाता सूची की सटीकता और विश्वसनीयता पर आधारित होते हैं, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया की नींव है।पीठ ने कहा कि विस्तृत विचार के बाद वह इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 16 के तहत चुनाव आयोग को मतदाता सूची तैयार करने अथवा संशोधित करने की प्रक्रिया में नागरिकता से जुड़े प्रश्नों की जांच करने का अधिकार है।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ऐसी जांच केवल मतदाता सूची में नाम शामिल करने अथवा हटाने तक सीमित उद्देश्य से ही की जा सकती है और यह प्रक्रिया उस मतदाता के पक्ष में लागू पूर्वधारणा का सम्मान करते हुए की जानी चाहिए, जिसका नाम पहले से मतदाता सूची में दर्ज है। न्यायालय ने कहा कि आयोग केवल चुनावी प्रयोजनों के लिए उपलब्ध सामग्री का आकलन कर निर्णय ले सकता है।
एसआईआर पर उच्चतम न्यायालय के फैसले से ‘सनातन धर्म विध्वंसक और घुसपैठिया संरक्षक इंडिया गठबंधन’ का वास्तविक चरित्र सामने आया: भाजपा
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि उच्चतम न्यायालय के निर्णय से ‘सनातन धर्म विध्वंसक और घुसपैठिया संरक्षक इंडिया गठबंधन’ का वास्तविक चरित्र सामने आ गया है।भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने बुधवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि एसआईआर प्रक्रिया को उच्चतम न्यायालय ने संविधान सम्मत और चुनाव आयोग के अधिकार के अंतर्गत माना है। इसके साथ ही निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया के लिए इसे आवश्यक माना है।
उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि राजनीतिक पराजय के बाद और देश में अराजकता-अव्यवस्था उत्पन्न करने की नैतिक पराजय के बाद अब यह विपक्ष और कांग्रेस की संवैधानिक धरातल पर भी पराजय हुई है। लोकतंत्र की समस्त संस्थाओं को अपनी राजनीतिक अक्षमता को ढकने के लिए आरोपित करने और लांछित करने के सभी कुप्रयास आज न्यायालय के धरातल पर निष्फल सिद्ध हुए।”कांग्रेस पर निशाना साधते हुए भाजपा प्रवक्ता ने कहा, “बिहार और पश्चिम बंगाल में निर्णायक और करारी हार के बाद और देश में अराजकता भड़काने की उनकी (कांग्रेस की) नापाक साज़िश के बावजूद कोई प्रतिक्रिया न मिलने पर यह एक नैतिक हार है। अब शीर्ष अदालत में एसआईआर पर उनकी याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया गया है। इसे संवैधानिक हार कहा जा सकता है।
उच्चतम न्यायालय के इस फैसले ने विपक्ष खास तौर पर कांग्रेस पार्टी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की पूरी हार को राजनीतिक, संवैधानिक और नैतिक हार के रूप में सारांशित किया है।”उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने अपने निर्णय से एसआईआर विरोध के नाम पर भ्रम फैलाने वालों को करारा जवाब दिया है। श्री गांधी और इंडिया गठबंधन जिस एसआईआर प्रक्रिया को लेकर लगातार देश में भ्रम और राजनीति फैलाने की कोशिश कर रहे थे, उस पर अब देश की सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट रुख रख दिया है।
उन्होंने कहा कि मामला सिर्फ़ यह नहीं है कि एसआईआर के ख़िलाफ़ लगाया गया आरोप बेबुनियाद साबित हुआ। यह विषय उससे कहीं ज़्यादा गंभीर है। आज विपक्षी दल, विशेष रूप से कांग्रेस का अनुबंध चीन के साथ है। उनका परिवार इटली में है। उनकी सोच का केंद्र इंग्लैंड और यूरोप में है, उनके दुष्प्रचार का केंद्र अमेरिकी संस्थाओं में है, और उनके वोटों का प्रवाह बंगलादेश से जुड़ा हुआ है। इसलिए यह फैसला और महत्वपूर्ण है।(वार्ता)
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