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आज़मगढ़ की ब्लैक पॉटरी: परंपरा से वैश्विक पहचान तक कारीगरों की उड़ान

आज़मगढ़ के निज़ामाबाद की ब्लैक पॉटरी अपनी अनूठी कारीगरी और काले रंग के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। ODOP योजना और कॉमन फैसिलिटी सेंटर की मदद से कारीगरों को प्रशिक्षण, आधुनिक संसाधन और बाजार मिला है। इससे उत्पादन बढ़ा है और उनकी आय में सुधार हुआ है, जिससे यह पारंपरिक कला नई ऊंचाइयों पर पहुंच रही है।

  • निज़ामाबाद की काली मिट्टी की कला को ODOP योजना से मिला नया बाजार, कारीगरों की बढ़ी आय

आज़मगढ़। मिट्टी से जन्म लेकर कला का रूप लेने वाली आज़मगढ़ की ब्लैक पॉटरी आज सिर्फ एक शिल्प नहीं, बल्कि संघर्ष, परंपरा और आत्मनिर्भरता की जीवंत कहानी बन चुकी है। सदियों पुरानी यह कला, जो कभी सीमित दायरे में सिमटी हुई थी, आज वैश्विक बाजार में अपनी चमक बिखेर रही है।

निज़ामाबाद क्षेत्र की यह अनूठी कारीगरी अपनी गहरे काले रंग, महीन नक्काशी और अद्वितीय चमक के कारण देश-विदेश में विशेष पहचान रखती है। यहां के कारीगर अपने हाथों से सिर्फ बर्तन या सजावटी वस्तुएं नहीं बनाते, बल्कि हर उत्पाद में अपनी संस्कृति, परंपरा और भावनाओं को भी ढालते हैं।

इस क्षेत्र में 200 से अधिक कारीगर इस विरासत को जीवित रखने में जुटे हैं। फूलदान, चायदान, शक्करदान, सजावटी वस्तुएं और देवी-देवताओं की सुंदर प्रतिमाएं-हर एक कलाकृति में एक कहानी छिपी होती है। गणेश, लक्ष्मी, शिव, दुर्गा और सरस्वती की प्रतिमाएं मेलों और त्योहारों में विशेष आकर्षण का केंद्र बनती हैं, जो आस्था और कला का अद्भुत संगम प्रस्तुत करती हैं।

ब्लैक पॉटरी की सबसे बड़ी विशेषता इसका आकर्षक काला रंग है, जो एक जटिल और पारंपरिक प्रक्रिया से प्राप्त होता है। कारीगर पहले बर्तन को विशेष मिट्टी और वनस्पति के घोल में तैयार करते हैं, फिर उसे सावधानीपूर्वक पकाते हैं और अंत में चमक देने के लिए पारंपरिक तकनीकों का उपयोग करते हैं। यह प्रक्रिया न केवल तकनीकी कौशल का उदाहरण है, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही विरासत का प्रमाण भी है।

हाल के वर्षों में इस परंपरागत कला को नई दिशा और पहचान देने में उत्तर प्रदेश सरकार की “एक जिला एक उत्पाद (ODOP)” योजना ने अहम भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इस योजना के तहत कारीगरों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बेहतर विपणन के अवसर मिले हैं। इसका परिणाम यह हुआ कि जो कला कभी सीमित बाजार तक थी, वह आज अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बना रही है।

निज़ामाबाद के ब्लैक पॉटरी फाउंडेशन के निदेशक संजय कुमार यादव बताते हैं कि कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) की स्थापना उनके लिए एक नई उम्मीद लेकर आई। यहां आधुनिक मशीनों और संसाधनों की उपलब्धता ने उत्पादन प्रक्रिया को आसान और तेज बना दिया है। अब कारीगर बड़े ऑर्डर भी समय पर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा कर पा रहे हैं।

कॉमन फैसिलिटी सेंटर ने कारीगरों को एक ऐसा मंच दिया है, जहां कच्चे माल से लेकर तैयार उत्पाद तक की पूरी प्रक्रिया एक ही स्थान पर पूरी हो जाती है। इससे न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि लागत भी कम हो रही है और मुनाफा बढ़ रहा है।

आज यह ब्लैक पॉटरी केवल एक शिल्प नहीं, बल्कि आज़मगढ़ की अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बन चुकी है। कृषि के साथ-साथ यह उद्योग हजारों परिवारों की आजीविका का सहारा बना हुआ है।

यह कहानी सिर्फ मिट्टी से बने बर्तनों की नहीं, बल्कि उन हाथों की है जो हर दिन अपने हुनर से सपनों को आकार देते हैं। यह कहानी उस विश्वास की है कि अगर परंपरा को सही दिशा और समर्थन मिले, तो वह आधुनिक समय में भी नई ऊंचाइयों को छू सकती है।

आज़मगढ़ की यह काली मिट्टी आज दुनिया को यह संदेश दे रही है कि भारत की जड़ों में बसती कला आज भी जीवित है-और हर गुजरते दिन के साथ और भी अधिक मजबूत हो रही है।

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